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सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन

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लघु सचिवालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए विभिन्न जनसंगठनों के लोग। - फोटो : Bhiwani
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शुक्रवार को 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व कर्मचारी संगठनों और फेडरेशनों के आह्वान पर कोरोना संकट में मजदूरों, कर्मचारियों व आमजन पर आर्थिक हमलों, जनतांत्रिक अधिकारों, श्रम कानूनों को खत्म करने, सार्वजनिक क्षेत्र को खत्म करने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री को उपायुक्त के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन में एटक, सीआईटीयू, एआईयूटीयूसी, इंटक, एचएमएस, सर्व कर्मचारी संघ, सर्व कर्मचारी महासंघ ने हिस्सा लिया।
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इससे पहले तमाम ट्रेड यूनियनों के सदस्यों ने स्थानीय सुरेंद्र मेमोरियल पार्क में इकट्ठा होकर जनसभा की। जनसभा की अध्यक्षता एटक से ईश्वर शर्मा, सीआईटीयू से धर्मबीर बामला, एआईयूटीयूसी से राजकुमार जांगड़ा, इंटक से हवासिंह बीरन, एचएमएस से कविता दहिया व सर्व कर्मचारी संघ से सूरजभान ने की। ट्रेड यूनियनों के नेताओं ने कहा कि केंद्र व अधिकांश राज्य सरकारों ने इस महामारी को मजदूरों-कर्मचारियों व आमजन के अधिकारों पर हमले के अवसर के रूप में ही लिया है।
बीते तीन महीने का अर्सा दिखाता है कि सरकार इस बीमारी से बचाने के लिए कम गंभीर नजर आई है जबकि सार्वजनिक क्षेत्र को बेचने, श्रमिकों के पक्ष में बने कानूनों व अधिकारों को निरस्त करने, संविधान में मौलिक अधिकारों की रक्षा एवं न्याय परस्त लोगों को जेल में डालने में ज्यादा व्यस्त रही है। कोरोना संक्रमण के लिए जरूरी स्वास्थ्य ढांचा खड़ा करने की बजाय थाली पिटवाई गई। एटक से फूलसिंह इंदौर, सीआईटीयूा से ओप्रकाश, एआईयूटीयूसी से राजकुमार बासिया, इंटक से रामोतार खोरड़ा, एचएमएस से रतन लाल लोहिया और सर्व कर्मचारी महासंघ से सुरजमल ने संबोधित किया। एटक से जिला प्रधान ईश्वर शर्मा ने बताया कि ट्रेड यूनियनों ने 1983 बर्खास्त किये गए पीटीआई अध्यापकों की बहाली के लिए चल रहे आंदोलन का समर्थन किया।
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