भिवानी। प्रॉपर्टी आईडी बनवाने और इसकी त्रुटियां सही करवाने के लिए लोग नप कार्यालय का चक्कर लगाने को मजबूर हैं। दरअसल, नगर परिषद में एक सप्ताह पहले ही निदेशालय ने पीआईडी की वेबसाइट खोली है। शहरी दायरे में नई प्रॉपर्टी आईडी बनवाने या फिर त्रुटि ठीक कराने में काफी दिक्कतें आ रही हैं, इसकी वजह नए नियम बने हैं। अब शहरी दायरे में प्रॉपर्टी आइडी बनाने से पहले नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी (ईओ) के मोबाइल फोन पर ओटीपी नंबर आएगा। जिसके बाद ही पीआईडी बन पाएगी। मगर इस नई शर्त व नियम में भी एक पेंच यह फंस गया है कि अधिकारी कभी मीटिंग में होने का बहाना बनाते हैं तो कभी गाड़ी चला रहे होने की बात कहते हैं, कभी अन्य जगह व्यस्तता। ऐसे में चार मिनट इंतजार के बाद ओटीपी नंबर न भरने की वजह से आईडी बनाने की प्रक्रिया ही खारिज हो जाती है। दिक्कत यह है कि पांच अप्रैल तक पीआईडी की त्रुटियां दूर करा सकते हैं, इसके बाद त्रुटि दूर नहीं होगी। ऐसे में लोग नप कार्यालय में चक्कर लगा परेशान हो रहे हैं।
प्रॉपर्टी मैनेजमेंट सिस्टम के लिए पीएमएसहरियाणाडॉटकॉम वेबसाइट बनाई हुई है। इस वेबसाइट पर ही नई प्रॉपर्टी आईडी व पहले बनी आईडी की त्रुटियां दूर की जा रही हैं। पहले एक बार वेबसाइट लॉगिन हो जाती थी तो पूरा दिन उस पर पीआईडी कर्मचारी बनाता था, मगर अब वेबसाइट पर प्रत्येक पीआईडी बनाने के लिए पहले नगर परिषद के ईओ के मोबाइल पर उसका ओटीपी नंबर आएगा। इस नंबर को फिर पीआईडी बना रहे कर्मचारी के पास भेजा जाएगा। जिसके बाद ही पीआईडी बन पाएगी। एक पीआईडी के ओटीपी नंबर में सिर्फ चार मिनट तक का ही समय निर्धारित है, अगर इस अवधि में ओटीपी नंबर नहीं डाला तो फिर उसकी विजिट ही खारिज हो जाएगी। शहर के सभी 31 वार्डों में वेबसाइट पर करीब 75 हजार शहरी पीआईडी दर्शायी जा रही हैं। इनमें अधिकांश में त्रुटियां हैं। अहम सवाल यह भी है कि अधिकांश प्रॉपर्टी मालिकों को खुद यह तक मालूम नहीं है कि उनकी प्रॉपर्टी सही है या नहीं। (संवाद)
ये बोले पार्षद
मैं वार्ड नंबर 24 से लगातार सातवीं बार चुनाव जीत पार्षद बना हूं। मेरा नाम गोविंदराम उर्फ बिल्लू बादशाह है। मेरी पीआईडी में खुद मुझे ही मेरा पिता बना डाला। पीआईडी में मेरा नाम गोविंदराम और पिता का नाम बिल्लू बादशाह है। जबकि मेरे पिता का नाम रामलाल है। मेरा पता भी जोगीवाला मंदिर दर्शाया जा रहा है, जो गलत है।
- गोविंदराम उर्फ बिल्लू बादशाह, पार्षद वार्ड नंबर 24
ये बोले लोग
एक सप्ताह से नप कार्यालय के चक्कर लगा रहा हूं। कभी अधिकारी नहीं मिलते तो कभी कर्मचारी कोई संतोषजनक जवाब नहीं देते। जिन लोगों की सिफारिशें हैं, उनके काम झट से हो जाते हैं, आम आदमी इधर से उधर घूम परेशान हो रहा है। मैं पीआईडी बनवाने आया हूं, मगर अधिकारी ओटीपी नंबर नहीं बता रहे हैं, इस वजह से मेरा काम अटका हुआ है।
- सुमित, भारत नगर वासी।
सुबह से नप कार्यालय में खड़ा हूं। कोई एमसी का नाम लेकर आता है तो कोई चेयरमैन का, उनके तो काम झट से हो रहे हैं, मगर हमें कई घंटे तक खड़े रहने पर भी कुछ नहीं बताया जाता। कर्मचारी बोल रहे हैं कि ओटीपी नंबर साहब के फोन में आएगा। अब साहब कभी मीटिंग में बैठे होने तो कभी गाड़ी चलाने का बहाना बना रहे हैं।
-पप्पू, दादरीगेट क्षेत्रवासी।
मैं कई दिनों से नप कार्यालय के चक्कर काट रहा हूं। मुझे किसी कार्य के लिए पीआईडी नंबर चाहिए। मगर यहां कोई काम करने को राजी नहीं है। मुझे बताया गया है कि अब नए नियम के बाद ईओ साहब के फोन में ओटीपी आएगा। तीन बार वेबसाइट विजिट किया, मगर समय पर ओटीपी नहीं बताया, इस वजह से हर बार काम बनते-बनते बिगड़ गया। नप अधिकारी मनमानी कर रहे हैं, जनता परेशान हो रही है।
- राजेंद्र रोहिल्ला, लक्ष्मीनगर कोंट रोडवासी।
वर्जन:::
पीआईडी के लिए अब नए नियम आए हैं, मेरे फोन पर पीआईडी का ओटीपी नंबर आता है, मैं तुरंत कर्मचारी को ओटीपी भेज देता हूं। कभी कभार हम बैठक में या फिर सफर में गाड़ी चला रहे होते हैं, जिस वजह से भी परेशानी आ रही है। नियम सरकार ने बनाए हैं, हम इसमें कुछ नहीं कर सकते।
- संजय यादव कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद भिवानी।