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Bhiwani News: जेल में ''बंद'' बेगुनाह मासूमों को सुकून दे रहा बंदी मां का आंचल

Fri, 07 Jul 2023 10:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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​भिवानी जिला कारागार
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भिवानी। खुद के हाथों अपना सुहाग उजाड़ भले ही जिला कारागार में सलाखों के पीछे पहुंच गई, फिर मां की ममता ने साथ नहीं छोड़ा। अपराध बोध के साथ जेल में बंद महिलाएं आंचल में ममता को समेटे बच्चों की परवरिश में भूमिका निभा रही हैं, वे खुद भले ही अपराध में दलदल में धंसी हैं, मगर बच्चों को नेकी की राह जरूर सुझा रही हैं।
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भिवानी जिला कारागार में महिलाओं के साथ तीन मासूम बच्चे भी बिना किसी अपराध के जेल में हैं। मगर उनके साथ यहां कैदियों जैसा सुलूक नहीं होता बल्कि उन्हें यहां प्यार दुलार के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और चहुंमुखी विकास का वो माहौल भी दिया जा रहा है, जो एक बच्चे का मौलिक हक है। पांच साल का मासूम तो जिला जेल से रोजाना पुलिस पब्लिक स्कूल जाकर जिंदगी में नेक इंसान बनने का सबक सिख रहा है।

भिवानी जिला कारागार में 960 कैदी और विचाराधीन बंदी हैं। जिनमें 40 महिलाएं भी शामिल हैं। इनमें 15 महिला कैदी तो अपने अपराध की सजा काट रही हैं, जबकि 25 महिलाएं विचाराधीन मामलों में यहां बंदी हैं। तीन विचाराधीन बंदियों के साथ उनके तीन मासूम बच्चे भी यहां जेल में हैं। एक बच्चा पांच साल, दूसरा तीन माह तो तीसरा बच्चा डेढ़ साल का है। पांच साल के बच्चे को मां दुलार के साथ रोजाना जिला जेल से ही तैयार करके पुलिस पब्लिक स्कूल में पढ़ाई करने के लिए भेजती है, जिसे जेल वार्डन रोजाना स्कूल छोड़ने और लाने जाता है। जबकि तीन माह का मासूम बच्चा अपने मां के आंचल में ही सिमटा रहता है। उसे तो यह तक आभास नहीं है कि जिस माहौल में वह पल रहा है शायद उसे जेल कहते हैं। तीसरा बच्चा अभी डेढ़ साल का है जो मां के साथ रहने के अलावा जिला जेल में चलाए जा रहे क्रेच में खेलकूद कर समय बिता रहा है। जिला जेल उप अधीक्षक नरेश बूरा का कहना है कि डीजीपी जेल मोहम्मद अकील के निर्देश पर भिवानी जिला कारागार में महिला बंदियों और छोटे बच्चों के लिए कुछ खास व्यवस्थाएं कराई गई हैं। जेल के अंदर भले ही महिला किसी अपराध की वजह से यहां तक पहुंची हैं, लेकिन उन्हें यहां बुराई से हमेशा दूर रहने का ही सबक सिखाया जाता है। इसलिए डीजीपी जेल के आदेश पर टेलरिंग कटिंग, ब्यूटीशियन के तिमाही और छ माही कोर्स कराए जा रहे हैं। संवाद
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ये है महिलाओं की अपराध हिस्ट्री

तीन माह के मासूम बच्चे की मां सात फरवरी 2023 से हत्या के प्रयास के मामले में अपने पति सहित अन्य सात परिजनों के साथ जिला कारागार में विचाराधीन बंदी है। पांच साल के मासूम बच्चे की मां पर अपने ही पति की हत्या का आरोप है। आठ अक्तूबर 2022 से जिला कारागार में विचाराधीन बंदी है। बच्चे के पालन पोषण के लिए कोई नहीं है। महिला का भाई उसकी पैरवी कर रहा है, जबकि डेढ़ साल के बच्चे की मां भी अपने पति की हत्या की आरोपी है। महिला 2020 से जिला कारागार में विचाराधीन बंदी है। कोरोना काल में उसे अंतरिम जमानत दी गई थी, जिसके बाद 12 अप्रैल 2023 से फिर से वह बच्चे के साथ जेल में है।



महिलाओं को मिल रहा पौष्टिक आहार

जिला जेल में सभी बंदियों और कैदियों के लिए खाने की व्यवस्था जेल प्रशासन ही कराता है। इसके लिए जेल प्रशासन खुद आर्गेनिक खेती भी करा रहा है, जिससे उगने वाली सब्जियां बंदियों के खाने में इस्तेमाल होती हैं। मगर महिलाओं के साथ छोटे बच्चों की हेल्थ और उनके खान-पान पर भी विशेष ध्यान दिया रहा है। बच्चों और महिलाओं को पौष्टिक आहार मिलता है। नियमित रूप से भी उनका जेल के अंदर हेल्थ चेकअप होता है। जिसके लिए जेल में डिस्पेंसरी भी है।
जिला कारागार में इस समय 40 महिलाएं कैदी और विचाराधीन बंदी हैं। तीन छोटे बच्चे भी जेल के अंदर अपनी माताओं के साथ हैं। एक बच्चा नियमित स्कूल जा रहा है, जबकि दूसरा बच्चा यहां क्रेच में खेलकूद के साथ प्रारंभिक पढ़ाई में खुद को ढाल रहा है। एक दुधमुंहा बच्चा भी महिला विचाराधीन बंदी के पास है। महिलाओं को स्वरोजगार के लिए टेलरिंग व ब्यूटीशियन के कोर्स कराए जा रहे हैं। डीजीपी जेल के निर्देशानुसार यहां बंदियों और कैदियों के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं कराई गई हैं।
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-सेवा सिंह, जेल अधीक्षक, जिला कारागार भिवानी।
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