मारपीट मामले में जेल में बंद शराब ठेकेदार की रविवार देर रात संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि उसकी हत्या की गई है, जबकि जेल प्रशासन की दलील है कि मृतक की तबीयत खराब थी। रात को छाती में दर्द हुआ और अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। परिजनों की मांग पर शव को पोस्टमार्टम के लिए पीजीआई रोहतक रेफर किया गया। मामले की मजिस्ट्रेट जांच होगी।
घटना रविवार देर रात करीब साढे़ 10 बजे की है। मारपीट मामले में जेल में बंद शराब ठेकेदार नीमड़ी वासी करीब 35 वर्षीय हरिओम की संदिग्ध परिस्थितियों में तबीयत बिगड़ गई। पुलिस उसे उपचार के लिए सामान्य अस्पताल लाई, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। जेल से आए कांस्टेबल सुरेश कुमार ने बताया कि रात को खाना खाने के बाद हरिओम को अचानक छाती में दर्द उठा। जेल अस्पताल में जांच के बाद उसे सामान्य अस्पताल की इमरजेंसी लाया गया। जहां उसने दम तोड़ दिया। उसका बीमारी की वजह से निधन हुआ है।
जेल कर्मचारी व परिजनों में हुई बहस
सदर थाना से एसआई चंद्र सिंह जब मामले में सामान्य अस्पताल चौकी में मृतक के भाई हरिकेश के बयान कलमबद्ध करने लगे तो उस समय वहां जेल कर्मचारी भी था। परिजन हत्या का आरोप लगा रहे थे और जेल कर्मचारी ने बताया कि उसकी तबीयत खराब थी। अस्पताल लाते समय दम तोड़ दिया। इसी बात पर परिजनों व जेल कर्मचारी में बहस भी हुई। बाद में सदर थाना से आए एसआई चंद्र सिंह ने कार्रवाई रोक दी और मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान नोट करने की बात कही। बाद में मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज किए गए।
बीमारी से नहीं हत्या की गई है
मृतक के भाई हरिकेश ने बताया कि पहले उसके भाई हरिओम को जबरन मारपीट के केस में झूठा फंसाया गया और अब उसकी हत्या की गई है। हरिकेश ने बताया कि उसका भाई हरिओम शराब ठेकेदार था। बामला के दो व्यक्ति भी हिस्सेदार थे। हरिकेश ने बताया कि उनका ठेकेदार मालपोष गांव के नजदीक था और मालपोष गांव में अवैध शराब की बिक्री हो रही थी। 14 जून को उसके भाई ने दूसरे पार्टनर को फोन कर अवैध शराब बिक्री की बात बताई और पुलिस छापा मरवाने की बात कही।
मगर दूसरे ठेकेदार ने पुलिस को सूचना देने की बजाय अपने कुछ युवकों को भेज दिया। वहां अवैध शराब बेचने वालों और ठेकेदार के भेजे गए युवकों में झगड़ा हुआ और अवैध शराब बेचने वालों की बाइक भी जला दी गई। उस केस से उसके भाई का कोई लेना-देना नहीं था। उस केस में भी बाद में समझौता हो गया और बाइक के रुपये दे दिए गए। मगर उसके भाई का नाम जबरन केस में जोड़ दिया गया। तीन जुलाई को पुलिस ने उसके भाई को गिरफ्तार किया। रविवार रात साढे़ 11 बजे सरपंच के मार्फत उनके पास फोन आया कि तुम्हारे भाई की मौत हो गई है। मृतक के भाई ने आरोप लगाया कि उसके भाई की हत्या की गई है और इसमें ठेकेदार, पुलिस की मिलीभगत है। मृतक हरिओम के तीन बच्चे दो लड़कियां व एक लड़का है।