गर्भवती महिलाओं में हर पांचवीं महिला खून की कमी की समस्या झेल रही है। सिविल अस्पताल में हर माह करीब सवा सौ डिलीवरी के मामले आते हैं जिनमें खून की कमी की शिकायत आम बात हो गई है। ऐसे में अस्पताल में रोजाना औसतन सात यूनिट तक खून की खपत डिलीवरी के मामलों में हो रही है। सर्जरी से जुड़े डिलीवरी के मामलों के लिए यहां कोई कोई जगह नहीं है।
इस समय हर पांचवीं गर्भवती महिला को डिलीवरी के दौरान खून की जरूरत पड़ने लगी है। ऐसी गर्भवती महिलाओं में 10 ग्राम या इससे नीचे खून की मात्रा मिल रही है जबकि कम से कम 12 ग्राम या अधिकतम 14 ग्राम तक खून होना चाहिए तभी महिला को डिलीवरी के लिए फिट माना जाता है।
सर्जरी से डिलीवरी की सुविधा न होना भी बनी परेशानी
सिविल अस्पताल में सर्जरी से जुड़ी डिलीवरी आने पर उसे पीजीआई या जिला मुख्यालय के अस्पताल में भेजने के सिवाय कोई दूसरा विकल्प नहीं है। यहां केवल सामान्य डिलीवरी ही करवाई जाती हैं ऐसे में क ई बार तो सर्जरी की अचानक जरूरत होने पर परिजनों को काफी भागदौड़ करनी पड़ती है। मां व शिशु तक को खतरा पैदा होने लगता है। आनन-फानन में चिकित्सक भी रेफर कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। सिविल अस्पताल में रोजाना औसत सात यूनिट तक खून की खपत ऐसे ही मामलों में हो रही है।
सामान्य ओपीडी में 45 प्रतिशत महिलाएं
सिविल अस्पताल की रोजाना करीब 700 मरीजों की ओपीडी है जिनमें करीब 45 प्रतिशत महिला मरीजों की भी संख्या होती है। ऐसे में यहां महिला चिकित्सकों की और जरूरत बनी हुई है। अस्पताल में स्पेशल महिला सर्जन तैनात नहीं है। इसलिए डिलीवरी के ऐसे मामलों को तत्काल पीजीआई भेज दिया जाता है। इस समय अस्पताल में दो महिला चिकित्सक जरूर हैं। यह सामान्य ओपीडी भी देखती हैं तथा सामान्य डिलीवरी के मामले भी निपटाती हैं।