धरने पर मौजूद पटवारियों व कानूनगो को संबोधित करते संघ के पदााधिकारी ।
भिवानी। पटवारी और कानूनगो की हड़ताल 31 जनवरी तक जारी रहेगी। वार्ता विफल होने के बाद लघु सचिवालय के बाहर सोमवार को पटवारी और कानूनगो का धरना जारी रहा। अब तक हड़ताल से करीब 10 करोड़ के राजस्व का नुकसान हो चुका है। पटवारी हड़ताल पर जाने से न्यायालय में लंबित मामलों की रिपोर्ट भी लंबित पड़ी हैं। वहीं कुछ रजिस्ट्री होने के अलावा कोई काम काज नहीं हो रहा है। जाति और रिहायशी प्रमाण पत्र बनाने में तस्दीक के काम बंद हैं। 27 दिन से तहसील का काम ठप है।
पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन की वित्त विभाग के एसीएस अनुराग रस्तोगी के साथ सोमवार को चंडीगढ़ में साढ़े 11 बजे वार्ता हुई। हरियाणा के पटवारियों का पे ग्रेड संशोधन, एसीपी, बढ़े हुए वेतनमान को 1 जनवरी 2016 से काल्पनिक और 25 जनवरी 2023 से वास्तविक रूप से लागू करवाने, नायब तहसीलदार की परीक्षा हर छह महीने में करवाने, पटवारियों और कानूनगो को अच्छे क्वालिटी के टैब और लैपटॉप देने, जल्द से जल्द रिक्त पदों को भरने, समय पर पदोन्नति करने, गिरदावरी सहायकों के बकाया पैसे देने, एलटीसी मुद्दों पर चर्चा की गई। पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन के जिला उप प्रधान विकास राठी ने बताया कि पहले दौर की बैठक में दो पॉइंट पर चर्चा हुई। एडिशनल चीफ सेक्रेटरी के समक्ष पे ग्रेड की मांग रखी। वार्ता में जो बातें हुई उससे पटवारी व कानूनगो संतुष्ट नहीं है।
संगठन की एक और वार्ता एफसीआर के साथ होगी,एफसीआर के साथ बैठक होने के बाद फिर से अपनी स्थिति स्पष्ट कर पाएंगे। पटवारी और कानूनगो 31 जनवरी तक धरना प्रदर्शन जारी रखेंगे। विकास राठी ने बताया कि बैठक में पे स्केल और एसीपी को लेकर बात रखी गई,कई मुद्दों पर पे स्केल को लेकर वित्त विभाग के एसीएस अनुराग रस्तोगी के साथ विस्तार से चर्चा हुई। लेकिन पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन बातों से सहमत नहीं हुई, उन्होंने कहा कि पे स्केल को बढ़ाने को लेकर कानूनी अड़चने आ रही है।
पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन के जिला प्रधान सुनील कुमार का कहना है कि 1 जनवरी 2016 से जो उनका मौजूदा पे स्केल है 32 हजार 100 को बढ़ाया है उसे 01-01-2016 से नोशनली लागू किया जाए। 31 जनवरी तक हड़ताल जारी रहेगी, उसके बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा। पिछले 27 दिनों से पटवारी और कानूनगो हड़ताल पर चल रहे हैं। 27 दिनों से भिवानी पटवारी खाना खाली पड़ा है। वहीं न्यायालय में विचाराधीन मामलों की रिपोर्ट लंबित पड़ी हैं। लोग भी रजिस्ट्री कराने के लिए भूमि से जुड़ा पुराना रिकार्ड निकलवाने के लिए चक्कर लगा रहे हैं।