फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिना भूखंड कैसे लगेंगे उद्योग

Fri, 27 Nov 2015 12:57 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला भिवानी
विज्ञापन
विज्ञापन
भिवानी। इंडस्ट्रीज एरिया में नया उद्योग स्थापित करने के लिए भूखंड ही नहीं है। करीब 28 खाली प्लाटों का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। भूखंड के अभाव में न केवल नए उद्योग धंधे स्थापित नहीं हो पा रहे है बल्कि यहां के उद्योगपति अन्य राज्यों में जाकर उद्योग करने को मजबूर है।
विज्ञापन

जब जगह ही नहीं है तो उद्योग कहां से बढ़े। यहीं हाल है भिवानी की उद्योग नगरी का। तमाम समस्याओं के बावजूद उद्यमी अपने व्यापार को बढ़ाना चाहते है। कुछ नए लोग भी उद्योग धंधा शुरू करना चाहते है। मगर मुख्य समस्या है भूखंड नहीं। कहने को तो इंडस्ट्रीज एरिया में 35 प्लाट खाली पड़े है। मगर इनका मामला कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में इन्हें अलाट नहीं किया जा सकता। नया इंडस्ट्रीज एरिया की मांग पर विचार ही नहीं किया जा रहा। ऐसे में भिवानी में निकट भविष्य में उद्योगों को बढ़ावा मिलता नजर नहीं आ रहा। उद्यमी संजय ने बताया कि उसने 2008 में प्लाट के लिए आवेदन किया। उसके प्लाट निकल भी आया मगर अब मामला कोर्ट में चल रहा है। ऐसे में यह प्लाट का कोई प्रयोग नहीं हो पा रहा है। उल्टा वकीलों की फीस व अन्य झंझट अलग।
नियमों पर खरी नहीं उतरती फैक्ट्रियां
इक्का दुक्का को छोड़ कोई भी फैक्ट्री नियमों पर खरी नहीं उतरती। नियमानुसार फैक्ट्री के चारों और निर्धारित जगह छोड़नी होती है। मगर इंडस्ट्रीज एरिया में जगह की कमी के चलते उद्यमी जगह छोड़ना तो दूर आसपास की अन्य जगह तक पर भी काम कर रहे है। करीब दो वर्ष पूर्व कोर्ट के निर्देश पर जिला प्रशासन ने फैक्ट्री संचालकों के खिलाफ अभियान चलाया था और दो-तीन फैक्ट्रियों में तोड़ फ़ोड़कर अतिक्रमण भी हटाया गया था।
विज्ञापन

प्रॉपर्टी डीलरों, राजनीतिज्ञों को प्लाट, कैसे बढ़े उद्योग
वर्ष 2008 में इंडस्ट्रीज एरिया के विभिन्न 28 प्लाटों के लिए आवेदन मांगे गए। मगर बाद में इसे रद्द कर दिया गया। दोबारा आवेदन मांगे तो अधिकतर प्रॉपर्टी डीलरों, राजनीतिज्ञों ने आवेदन किया और अनेक को प्लाट अलाट भी हो गया। अब यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
1972 में प्रस्तावित कम्यूनिटी सेंटर का आज भी इंतजार
इंडस्ट्रीज एरिया के निर्माण के 1972 में ईएसआई केंद्र के पास ही कम्यूनिटी सेंटर भी प्रस्तावित किया गया था। मगर 43 साल बाद  भी कम्यूनिटी सेंटर तो अस्तित्व में नहीं आया, उलट जगह पर भी कब्जे होने लगे है।
क्या कहते है उद्यमी
आज अलग इंडस्ट्रीज एरिया की बहुत जरूरत है। नए उद्योग लगाने के लिए जगह ही नहीं है। अनेक दफा एसोसिएशन के माध्यम से इसकी मांग कर चुके है। 28 प्लाटों के लिए आवेदन मांगे थे तो अब मामला कोर्ट में है। ये प्लाट अलाट भी ऐसों को होते है, जिन्हें जरूरत नहीं। उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है कि इंडस्ट्रीज एरिया में प्लाट का सहीं आवंटन हो और पात्र और जरूरतमंद वालों को ही मिले।
संदीप सिंगला, उद्यमी, पीपी प्लांट संचालक



लोगों के पास उद्योग को बढ़ाने के लिए जगह ही नहीं है। ऐसे में नियमों को ताक पर रखकर बिना जगह छोड़े फैक्ट्रियों में काम हो रहा है। सरकार को जगह मुहैया करानी चाहिए। इसके अलावा भिवानी शहर की किसी के साथ भी सीधी कनेक्टिविटी नहीं है। हरेक सरकार की उद्यमियों, फैक्ट्री संचालकों के प्रति अलग ही नजरिया रहता है। समस्याओं का समाधान ही नहीं हो पाता।
रवि अग्रवाल, उद्यमी, पीपी प्लांट संचालक


सेक्टर में 35 के करीब खाली पड़े है। उद्यमियों के पास जगह नहीं है और ये खाली पड़े है। इसके अलावा इनमें बड़ी बड़ी झाड़ियां उगी है। जिस कारण आपराधिक किस्म के लोग आपराधिक घटनाएं कर इनमें छुप जाते है और पता भी नहीं लगता।
विज्ञापन

प्रमोद कुमार, सप्लायर


ये हो तो बने बात
* शहर में एक अलग इंडस्ट्रीज एरिया बने
* इंडस्ट्रीज एरिया के खाली प्लाटों का जल्द आवंटन हो
* उद्यमियों को ही प्राथमिकता के तहत प्लाट दिए जाए
* फिलहाल खाली प्लाटों की सफाई करवा बाउंड्री करवाई जाए



विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें