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सीता सवयंवर में लंकापति रावण समेत दूसरे राजा धनुष नहीं उठा सके तो सभा में छाया सन्नाटा

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बहल। कृष्ण वाटिका में चल रही रामलीला के तीसरे दिन सीता स्वयंवर का मंचन किया गया। मैथिली के राजा जनक द्वारा आयोजित सीता स्वयंवर में लंकापति रावण समेत दूसरे राजा धनुष नहीं उठा सके तो सभा में सन्नाटा छा गया। अपने आप में अपमानित हुए रावण ने कहा कि वो आज तो जा रहा है क्योंकि लंका में लगी आग को बुझाने वाला कोई नहीं है लेकिन एक दिन सीता को लंका अवश्य दिखाऊंगा।
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राजा जनक ने कहा कि यह सब चूड़ियां पहनकर घर बैठ जाओ क्योंकि यह पृथ्वी वीरों से हीन हो गई है, खाली हो गई है। इस पर महर्षि विश्वामित्र ने श्री राम को राजा जनक का संताप दूर करने के लिए धनुष उठाने के लिए भेजा। भगवान राम ने महर्षि विश्वामित्र से आशीर्वाद लेकर बड़ी आसानी से धनुष उठाया तो लोगों ने जोरदार तालियां बजाई। इसके अलावा जैसे ही प्रत्यंचा चढ़ाते समय भगवान राम के हाथ से धनुष टूटा तो रामलीला में उपस्थितजनों ने जय श्री राम के जोरदार जयकारे लगाए। उधर, राजा जनक ने अयोध्या नरेश राजा दशरथ को राम द्वारा सीता स्वयंवर में विजयी रहने की सूचना तथा मिथिला आने के लिए निमंत्रण भेजा गया।
रामलीला मंचन में कृष्ण की झांकी ने दर्शकों का मन मोह लिया। रामलीला में हास्य कलाकार घनश्याम भाया ने अपने चिर परिचित अंदाज में दर्शकों को खूब गुदगुदाया। आदित्य शर्मा ने विश्वामित्र, राजा जनक सुरेश कुमार, मनोज महमिया ने राम, बबलू शर्मा ने लक्ष्मण, शायर राणा ने परशुराम, मुकेश ने सीता का किरदार निभाया। कथावाचक दीपचंद चौधरी ने लोगों को एक एक चौपाई का विस्तार से वर्णन कर लोगों में धार्मिक भावना का संचार किया। रामलीला का समापन लक्ष्मण एवं परशुराम के संवाद के साथ पूरा हुआ। इस अवसर पर चेयरमैन सुशील केडिया, पूर्व वाइस चेयरमैन राकेश भाटोलिया, कमल बागड़ी, मंजीत सोनी, नवीन चौधरी अहमदाबाद, जयकुमार शर्मा, राकेश बंसल, ललित गोयल, कुलदीप मंढ़ोली सहित अनेक लोग मौजूद रहे। संवाद
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