प्राथमिक परिवारों की सूची में शामिल जिले के 26 सौ से अधिक परिवारों को अब रियायती दर पर खाद्यान्न नहीं मिलेगा। प्रापर्टी की जानकारी छिपाने वाले इन परिवारों को पात्रता सूची से बाहर कर दिया गया है।
अब इनकी गणना भी एपीएल (गरीबी रेखा से ऊपर) के परिवारों में ही की जाएगी। यानि अब इन्हें न तो राशन कार्ड पर खाद्यान्न मिलेगा और न ही कोई अन्य सुविधा।
खाद्य सुरक्षा अध्यादेश 2013 के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले हर परिवार को खाद्यान्न की गारंटी मिली है। इसका लाभ पाने के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने आवेदन जमा किए। खुद को गरीब और अभावग्रस्त बताकर रियायती दर पर खाद्यान्न के अधिकार के लिए दावा ठोंका।
अनुमान से अधिक पात्रता का दावा प्रस्तुत होने के बाद अफसरों का माथा ठनक गया था। इस सूची में तमाम लोगों के नाम गलत ढंग से शामिल किए जाने की शिकायतें भी बढ़ने लगी थी। सच्चाई का पता लगाने के लिए अफसरों ने सभी परिवारों की प्रापर्टी का सत्यापन करने का निर्देश दिया। बीते फरवरी माह से यह प्रक्रिया शुरू की गई थी। सत्यापन का जिम्मा पटवारियों को दिया गया।
प्राथमिक परिवारों की सूची में शामिल इन परिवारों को हिदायत दी गई थी कि पटवारियों के माध्यम से संपत्ति का ब्योरा सत्यापित कर जमा करें। वास्तविक गरीबों ने तो तुरंत जानकारियां जमा कर दी, लेकिन उन लोगों ने बार-बार हिदायतों के बाद भी अपनी संपत्ति नहीं बतायी, जिन्हाेंने गलत तरीके से नाम सूची में शामिल कराया था।
चुनाव के कारण विलंबित हुई इस प्रक्रिया में सर्वे पूरा होने के बाद पूरे जिले में ऐसे 2622 परिवार चिह्नित किए गए हैं। अब इन्हें पात्रता सूची से बाहर कर दिया गया है। ऐसे सभी परिवारों को न तो रियायती दर खाद्यान्न मिलेगा और न ही कोई अन्य सुविधा। एपीएल उपभोक्ताओं की तरह इनके कार्ड भी सिर्फ पते की पहचान बनकर रह जाएंगे।
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बीते जुलाई माह से लागू इस अध्यादेश के तहत रियायती दर पर खाद्यान्न के दो श्रेणी के परिवारों को पात्र माना गया है। पहली श्रेणी अंत्योदय परिवारों की है, जिसमें उन्हीं उपभोक्ताओं को शामिल किया गया है, जो पहले से ही अन्योदय अन्न योजना में सम्मिलित रहे हैं। दूसरी श्रेणी प्राथमिक परिवारों की है। इसमें बीपीएल के अलावा कुछ विशेष श्रेणियां बनाकर उन नये परिवारों को भी शामिल किया गया है, जो गरीबी रेखा के नीचे वाली सूची में तो नहीं थे, लेकिन उनका जीवन स्तर उनके जैसा ही है।
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हर परिवार को मिलना है 5 किलो खाद्यान्न
इस योजना के तहत अंत्योदय परिवार में शामिल होने वाले प्रत्येक परिवार को 35 किलो, जबकि प्राथमिक परिवारों की श्रेणी में शामिल परिवार के प्रत्येक सदस्य को पांच किलो की दर से खाद्यान्न दिया जाना है। खाद्यान्न के रूप में दिए जाने वाले गेहूं के बदले लाभार्थियों को सिर्फ दो रुपये प्रति किलो का भुगतान करना होगा।
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आंकड़ों में हालात
365275 कुल परिवारों की है संख्या।
144737 ने प्राथमिक परिवार पहले थे चिह्नित।
142115 कुल प्राथमिक परिवार अब नई सूची में।
2622 परिवारों ने नहीं दी संपत्ति की सूचना।
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सर्वे के बाद अब मिलेगा बकाया खाद्यान्न
प्राथमिक परिवारों की संपत्ति के सत्यापन के कारण खाद्य सुरक्षा अध्यादेश के तहत खाद्यान्न का वितरण रुका हुआ था। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित शहरी कार्डधारक थे। अब सर्वे पूरा होने के बाद वितरण सामान्य रूप से आरंभ हो गया है। पात्रता श्रेणी के परिवारों को पिछले बकाया माह का भी खाद्यान्न दिया जा रहा है। खाद्य विभाग के मुताबिक जिस कार्डधारक का जितना भी खाद्यान्न बकाया है, उसे पूरी मात्रा दी जाएगी।
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अपात्रों से होगी रिकवरी
संपत्ति की सूचना न देने वाले सभी परिवार अपात्र मान लिए गए हैं। अब उन्हें खाद्यान्न नहीं दिया जाएगा, अलबत्ता पहले के महीनों में इन परिवारों को जो सामग्री दी गई उसकी सख्ती से रिकवरी की जाएगी। खाद्यान्न जमा न करने पर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई होगी।
- अनिल कुमार, जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक।