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Bhiwani News: गांव गागड़वास में होली पर लगाते हैं पूरे गांव की फिरनी की कार

Tue, 07 Mar 2023 11:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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गांव गागड़वास का मुख्य द्वार।
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लोहारू (भिवानी)। क्षेत्र में मात्र ढाई सौ से तीन सौ घरों की आबादी के छोटे से गांव गागड़वास में संवत 1810 से होली पर्व पर पूरे गांव की फिरनी में कार लगाने यानी पानी, तेल, दूध और मदिरा के मिश्रण को सुराग वाली मटकी में भरकर सुरक्षा घेरा बनाने की परंपरा चली आ रही है। ऐसा पूरे गांव को महामारियों से बचाव के लिए किया जा रहा है। राजस्थान से आए गागड़ परिवार ने संवत 1531 में टीले पर गागड़वास गांव बसाया था। उस समय ऊंचे टीले पर गांव पर कई महामारियों के संकट भी आए। इसमें कार्तिक (कातक की) बीमारी भी अहम थी। उस दौर में दादु पंथ के बाबा बुधनाथ महाराज ग्रामीणों को ऊंचे टीले पर बसें गांव के उजड़ने के कारण से आदेश दिया था कि टीले से नीचे दक्षिण दिशा में बस जाओ।
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इसके बाद संवत 1810 में उन्हीं पूर्वजों के वंशज खेमकरण भगत ने टीले से नीचे गांव का फिर से बसाया था। तभी से लेकर होली पर महामारी से छुटकारा पाने और आसुरी शक्तियों से निजात दिलाने के लिए गांव के बाहर फिरनी पर पूरे गांव की कार लगाने यानी पानी, दूध, तेल और मदिरा मिलाकर गेहूं की बाकली को थैले में भरकर गांव के कुएं के पास से लेकर सुरक्षा घेरा बनाने की परंपरा चली आ रही है। इस परंपरा को गांव के युवा निभाते हैं। कार लगाने के दौरान खासकर गांव के लोग भी गांव की फिरनी से बाहर नहीं जाते हैं और न ही कोई गांव की फिरनी में अंदर सुरक्षा घेरे को तोड़ने के लिए दाखिल होता है। इसके लिए खास तौर पर युवा पहरेदारी भी करते हैं।
ये हैं मान्यता
ग्रामीणों ने बताया कि ऐसी मान्यता चली आ रही है कि गांव में कार लगाने की परंपरा के बाद से न तो अकाल पड़ा है न ही आग लगने की कोई बड़ी घटना हुई है और न ही महामारी का इस गांव पर कोई बुरा असर पड़ा है। ऐसा नहीं है कि गांव में पढ़े-लिखे लोग नहीं हैं, मगर ये परंपरा उनकी आस्था से जुड़ी है, तभी सदियों से लेकर अब तक बदस्तूर चली आ रही है। इसमें गांव के युवा भी उत्साह से भाग लेते हैं। होलिका दहन से पहले पूरे गांव से देशी घी एकत्रित किया जाता है। जिसे पंडितजी द्वारा विशेष पूजा के बाद होलिका मंगलाई जाती है। अगले ही दिन भोर में पूरे गांव को कार लगाने की परंपरा निभाई जाती है।
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