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भिवानी में बनेगा वीटा का चिलिंग प्लांट: मछली पालन के साथ-साथ अब दुग्ध क्रांति लाने के लिए मिलेगा माहौल

Tue, 02 Jan 2024 09:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)

सार

चिलिंग प्लांट निर्माण से सिवानी, लोहारू, बहल, सिंघानी क्षेत्र के करीब 75 से अधिक गांवों की 100 से अधिक दुग्ध समितियों को इससे जोड़ा जाएगा। जो समितियां बंद पड़ी थी, अब वे भी अपना दुग्ध उत्पादन वीटा को बेच सकेंगे।
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वीटा चिलिंग प्लांट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भिवानी में अब गांव सलेमपुर में दो एकड़ भूमि पर पांच करोड़ की लागत से वीटा चिलिंग प्लांट तैयार होगा। नए साल में इलाके के लोगों को मछली पालन के साथ-साथ अब दुग्ध क्रांति लाने के लिए भी बेहतर माहौल मिलेगा। जिसकी सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। जल्द ही पुलिस हाउसिंग काॅरपोरेशन चिलिंग प्लांट निर्माण कार्य का टेंडर कराएगा।

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चिलिंग प्लांट निर्माण से सिवानी, लोहारू, बहल, सिंघानी क्षेत्र के करीब 75 से अधिक गांवों की 100 से अधिक दुग्ध समितियों को इससे जोड़ा जाएगा। जो समितियां बंद पड़ी थी, अब वे भी अपना दुग्ध उत्पादन वीटा को बेच सकेंगे। नई दुग्ध समितियां भी इलाके में तैयार होंगी। सिवानी और लोहारू क्षेत्र के दुग्ध उत्पादकों को भिवानी के चिलिंग प्लांट आने में 65 से 70 किलोमीटर दूर का सफर कर करना पड़ता था। गर्मी के मौसम में तो इतनी दूर से दूध लाना असंभव हो गया था। इसी को ध्यान में रखते हुए कृषिमंत्री के प्रयासों से सलेमपुर गांव में वीटा का नया चिलिंग प्लांट खुलेगा।

भिवानी में 1972 में मिल्क प्लांट खोला गया था। उस समय प्लांट से इलाके की करीब ढाई हजार से अधिक दुग्ध समितियां भी जुड़ी थीं और दुग्ध क्रांति में भिवानी जिला अहम योगदान दे रहा था। समय की मार और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते भिवानी का मिल्क प्लांट रोहतक के मिल्क प्लांट से जोड़ दिया, जबकि भिवानी में सिर्फ चिलिंग प्लांट छोड़ दिया। यहां की मशीनरी भी रोहतक शिफ्ट कर दी गई। अब भिवानी के चिलिंग प्लांट से सिर्फ भिवानी और चरखी दादरी इलाके की करीब 200 दुग्ध समितियां ही जुड़ी हैं। भिवानी चिलिंग प्लांट में रोजाना ही करीब 60 हजार लीटर दुग्ध का उत्पादन होता है।
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जो रोहतक मिल्क प्लांट में प्रोसेसिंग के लिए भेजा जाता है। फिलहाल लोहारू, सिवानी और बहल क्षेत्र की कई दुग्ध समितियां सिर्फ इसलिए बंद हैं, क्योंकि 65 से 70 किलोमीटर दूर भिवानी चिलिंग प्लांट में दूध लाने पर ट्रांसपोर्टेशन का भारी भरकम खर्च उठाना और वाहन में दूध को सुरक्षित रख पाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में अब गांव सलेमपुर में दो एकड़ भूमि में बनने वाला नया चिलिंग प्लांट इलाके के लोगों के लिए दुग्ध उत्पादन की दिशा में नए विकल्प खोलेगा और यहां के लोग दुग्ध समितियां बनाकर दुग्ध उत्पादन से मालामाल भी होंगे।

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पहले गांव सेरला में बनना था प्लांट अब सलेमपुर में बनेगा

पहले गांव सेरला में दो से ढाई एकड़ भूमि का चयन चिलिंग प्लांट के लिए हुआ था, मगर सर्वेक्षण के बाद ये भूमि जोहड़ की पाई गई। भूमि स्थानांतरण को लेकर दिक्क्तें आ गईं। जिसके बाद कृषि मंत्री जयप्रकाश दलाल ने इलाके की ग्राम पंचायतों से प्लांट के लिए भूमि देने का अनुरोध किया। इस पर गांव सलेमपुर की पंचायत ने दो एकड़ भूमि देने का प्रस्ताव कर दिया। जिसके बाद हरियाणा डेयरी डेवलपमेंट कोऑपरेटिव फेडरेशन पंचकूला के नाम भूमि स्थानांतरित की गई। इसके बाद वीटा ने नए प्लांट के निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

इंडियन स्वीट्स तैयार कराने की प्रक्रिया भी शुरू कराई जाएगी- जेपी दलाल
लोहारू विधानसभा क्षेत्र में किसानों को पशुपालन और मछली पालन के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं। दुग्ध उत्पादन में भी इलाके के किसान अग्रणी भूमिका निभाए इसके लिए सलेमपुर में चिलिंग प्लांट का निर्माण होगा। द्वितीय चरण में यहां इंडियन स्वीट्स तैयार कराने की प्रक्रिया भी शुरू कराई जाएगी। चिलिंग प्लांट से लोहारू, सिवानी और बहल क्षेत्र के अलावा अन्य जिलों के किसानों के लिए भी दुग्ध उत्पादन से आमदनी का अहम जरिया मिल सकेगा। -जयप्रकाश दलाल कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री हरियाणा सरकार
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