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Bhiwani News: नंदीशाला के रजिस्ट्रेशन पर अब लगी पाबंदी, सूचीबद्ध कर ग्रांट देना भूला गो सेवा आयोग

Fri, 07 Jun 2024 02:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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शहर की नंदीशाला में बैठे गाय। 
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भिवानी। नगर परिषद की नंदीशाला पर अब रजिस्ट्रेशन पर पाबंदी लगी है। गो सेवा आयोग भी इसे सूचीबद्ध कर ग्रांट देना भूल गया है। वहीं नंदीशाला में 624 नंदियों की भूख भी दान में मिल रहे चारे से ही मिट रही है। नंदीशाला सेवा दल हर माह नंदियों के रखरखाव और इनकी दवाईयों पर हर माह दस लाख का खर्च उठा रहा है। नंदीशाला में फिलहाल दो माह के सूखे चारे का प्रबंध भी दान से किया है, लेकिन इसके बाद फिर से यहां चारे का संकट पैदा हो जाएगा। नंदीशाला में 850 से घटकर अब 624 नंदी ही रह गए हैं। वहीं शहर से नंदी पकड़ने का अभियान भी अब ठंडा पड़ चुका है।
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हालुवास गेट क्षेत्र स्थित नगर परिषद की नंदीशाला में लावारिस नंदियों को शहर से पकड़कर छोड़ा गया है। नंदीशाला का रखरखाव नंदीशाला सेवा दल के पदाधिकारी संभाल रहे हैं। नंदीशाला की व्यवस्था पूरी तरह से चंदे पर निर्भर है। दान में आया पशु चारा ही यहां इन्हें खिलाकर जिंदा रखा जा रहा है। जबकि बीमार और लाचार नंदियों के उपचार की यहां कोई स्थायी व्यवस्था तक नहीं है।
नंदीशाला में सात कर्मचारी हैं, जिसमें चार नगर परिषद और तीन कर्मचारी स्वयंसेवी संस्था ने अपने खर्च पर यहां लगाए हैं। 624 नंदियों के आगे दान में हर रोज आने वाली दो हरे चारे की ट्राली भी कम पड़ रही हैं। क्योंकि नंदियों के लिए रोजाना ही करीब 16 टन हरा चारा और करीब आठ टन सूखा चारा की जरूरत है। नंदीशाला सेवा दल सदस्य ही नंदियों की खुराक, दवाइयां और रखरखाव पर ही हर माह करीब दस लाख रुपये का बजट खर्च कर रहे हैं। जबकि पिछले साल गो सेवा आयोग ने नंदीशाला को सूचीबद्ध कर दिया था।
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गोशालाओं के साथ नंदीशाला को भी गो सेवा आयोग से प्रति नंदी के हिसाब से सालाना ग्रांट दी जानी थी, मगर सूचीबद्ध किए जाने के बाद नंदीशाला के रजिस्ट्रेशन पर पाबंदी लग गई। इसके बाद ग्रांट आई न कोई संदेशा। अब नंदीशाला सेवा दल सदस्यों के सामने विकट परिस्थिति ये है कि आखिर कब तक शहरवासियों से मिलने वाले चंदे पर इसे चलाया जाएगा, क्योंकि अकेले चंदे पर ही इतनी बड़ी नंदीशाला के नंदियों की खुराक पूरी कर पाना संभव नहीं है। गो सेवा आयोग से मिलने वाली ग्रांट शहर के लावारिस नंदियों की सुरक्षा की गारंटी बन सकती है, मगर इस पर भी अभी संशय बना है। नगर परिषद ने रोहतक की एजेंसी को करीब 25 लाख में शहर से तीन हजार नंदी पकड़ने का ठेका दिया था, मगर ये अभियान भी अब ठंडा पड़ा है।
नंदीशाला में इस समय 624 नंदी हैं, जिनकी खुराक और रखरखाव का पूरा जिम्मा नंदीशाला सेवा दल संभाले हुए हैं। इनके रखरखाव पर हर माह करीब दस लाख रुपये खर्च आ रहा है। सूखा और हरा चारा यहां दानवीरों के सहयोग से आ रहा है, जिससे इन नंदियों को यहां जिंदा रख पाना संभव हो रहा है। गो सेवा आयोग से नंदीशाला सूचीबद्ध हो चुकी है, लेकिन अभी तक इसका रजिस्ट्रेशन नहीं किया है। रजिस्ट्रेशन होता तो यहां नंदियों के लिए सरकार से मिलने वाली ग्रांट से थोड़ी राहत मिल जाती। जो लोग बछड़ों को लावारिस छोड़ देते हैं, उन्हें भी यहां रख पाना संभव हो पाता। काफी बार नंदीशाला सेवा दल की ओर से ग्रांट के संबंध में प्रयास किया गया, मगर बात नहीं बनी।
-अमित बंसल, संस्थापक सदस्य नंदीशाला सेवा दल भिवानी।
नंदीशाला को सूचीबद्ध किया जा चुका है, पहले सूचीबद्ध करने पर ही ग्रांट दिलाने का प्रयास किया गया था, लेकिन तकनीकी वजह रही अब इसका रजिस्ट्रेशन होने पर ही गो सेवा आयोग सरकार से मिलने वाली ग्रांट जारी कर सकता है। इसके लिए नगर परिषद को लिखित में देना होगा कि नंदीशाला नगर परिषद की है और ये नगर परिषद की भूमि पर ही संचालित हो रही है। इसके बाद ही इसे पंजीकृत किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी।
-श्रवण कुमार, चेयरमैन, गो सेवा आयोग हरियाणा।
नगर परिषद की नंदीशाला का गो सेवा आयोग से पंजीकरण कराने का प्रयास किया जाएगा और शहर से लावारिस नंदियों को पकड़कर यहां रखने के लिए भी अतिरिक्त व्यवस्था कराई जाएगी। नंदीशाला में दो अतिरिक्त शेड निर्माण का खाका तैयार किया जा रहा है। जिस पर करीब दो करोड़ का खर्च आएगा।
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-भवानी प्रताप सिंह चेयरपर्सन नगर परिषद भिवानी।
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