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Bhiwani News: अब ऋतुओं के हिसाब से पंचकर्म में तय हुआ सेहत के लिए खान-पान का मेन्यू

Tue, 05 Mar 2024 12:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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भिवानी। शहर के नागरिक अस्पताल में स्थित पंचकर्म केंद्र ने स्वस्थ लोगों व मरीजों के लिए ऋतु के अनुसार आहार-विहार, बचाव व ऋतु में हाेने वालों रोगों को लेकर आहार चार्ट जारी किया है। ऋतु अनुसार सेवन कर आमजन अपने आप को ठीक रख सकें।
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हमारे देश में मौसम अनुसार छह ऋतु है जिनमें शिशिर, वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद और हेमंत है। इन ऋतुओं के अनुसार ही यह चार्ट जारी किया है। हर ऋतु में अलग-अलग प्रकार की बीमारी आती है। उसी को ध्यान में रखकर यह चार्ट सामान्य लोगों व मरीज को बताएगा के उन्हें किस मौसम यानी ऋतु में किस समय क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए। यह चार्ट मौसम में बदलाव के कारण होने वाली बीमारियों के बारे में भी जानकारी देगा।

डॉ. रश्मि शर्मा ने बताया के पहले ये दोनों चार्ट शहर के 20 केंद्रों पर भेजे जाएंगे। कुछ समय बाद केंद्र की और से स्कूल, कॉलेज व गांवों में प्रोग्राम चलाया जाएगा। जिसमें हर एक बीमारी के विशेषज्ञ आकर लेक्चर के माध्यम से लोगों को जागरूक करेंगे। संवाद
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ऋतुचर्या- ऋतु अनुसार आहार विहार

शिशिर ऋतु

समयः जनवरी-फरवरी
रोगः सर्दी, बुखार, खांसी बुखार तथा श्वास

खाने योग्य आहार : विविध प्रकार के लड्डू, अदरक, लहसुन की चटनी, दूध, गर्म पानी।
करने योग्य कार्य : गुनगुने तेल से मालिश तथा ऊनी कपड़े पहनने चाहिए।

परहेज : ठंडी हवा से बचें

वसंत ऋतु
समय: मार्च, अप्रैल

रोग : दमा, खांसी, बदन दर्द, बुखार, बैचेनी, भूख न लगना, कब्ज, पेट में दर्द।
खाने योग्य आहारः पुराने जौ, गेहूं, ज्वार, बाजरा, मक्का, मूंग, मसूर, अरहर, चने की दालें, मूली, घीया, गाजर, बथुआ, चौलाई, परवल, सरसों, मेथी, पालक, धनिया, अदरक शहद के साथ।

करने योग्य कार्य : वमन, नाक में सरसों का तेल डालना, व्यायाम, योगासन, तथा उबटन लगाना है।
परहेज : ठंडी हवा से बचें, वायुवर्धक आहार न लें।
ग्रीष्म ऋतु

समय: मई, जून
रोग : रूखापन, कमजोरी, लू लगना, हैजा, चेचक, बुखार, नकसीर, जलन, पीलिया।

खाने योग्य आहार : हल्के, मीठे ठंडे पदार्थ, चावल, जौ, मूंग, मसूर, दूध, शरबत, लस्सी, फलों का रस, छाछ, नारियल पानी एवं जलजीरा।
करने योग्य कार्य : सूर्योदय से पहले उठना, सुबह टहलना, दो बार स्नान, ठंडी जगह पर रहना, बार-बार पानी पीते रहना।

परहेज : धूप, अधिक परिश्रम, सहवास, प्यास रोकना, रेशमी कपड़े, गरम, तीखे, नमकीन, तले हुए पदार्थ, मैदा, बेसन से बने एवं पचने में भारी व्यंजन, शराब का सेवन।

वर्षा ऋतु
समयः जुलाई, अगस्त

रोग: भूख कम लगना, गठिया, सूजन, खुजली, फोड़े-फुंसी, दाद, पेट में कीड़े, मलेरिया, टाइफाइड, दस्त।
खाने योग्य आहार : पुराना अनाज (चावल, जौ, गेहूं), मांस रस, घी एवं दूध, छाछ, पानी का उबालकर उपयोग।

करने योग्य कार्य : भीगने से बचें, सीलनयुक्त स्थान पर नहीं रहना चाहिए, तेल की मालिश करना, मच्छरदानी का उपयोग।
परहेज : पचने में भारी आहार, बासी भोजन, दही, मछली, शराब, तालाब एवं नदी के जल का सेवन, खुले में सोना, अधिक व्यायाम, धूप।
शरद ऋतु

समयः सितंबर, अक्तूबर
सम्भावित रोग : बुखार, रक्तविकार, जलन, उल्टी, सिरदर्द, चक्कर आना, खट्टी डकार, कब्ज

खाने योग्य आहार : हल्का भोजन, फलों का रस, सूखे मेवे, नारियल, चावल, करेला, इलायची, मुनक्का, खजूर, घी, त्रिफला चूर्ण, रात में हरड़
करने योग्य कार्य: तेल मालिश, व्यायाम तथा प्रातः भ्रमण, पेट साफ रखना एवं मुल्तानी मिट्टी का लेप।

परहेज : मैदे से बनी खाद्य पदार्थ, गरम, तीखा, भारी, मसालेदार एवं तेल में तले हुए खाद्य पदार्थ, दही, मछली, मूंगफली, दिन में न सोएं, धूप से बचें

हेमंत ऋतु
समय: नवंबर, दिसंबर

रोग : वात रोग, दमा, खांसी जुकाम, लकवा आदि।
खाने योग्य आहार : मीठा, भारी भोजन, घी, तेल, च्यवनप्राश

करने योग्य कार्य: सिर, कान, नाक, पैर के तलुओं पर तेल मालिश, उबटन, गुनगुने पानी से नहाना, ऊनी कपड़ों का प्रयोग, धूप सेंकना।
परहेजः ठंडी वस्तुओं का सेवन, दिन में सोना, अधिक हवादार स्थान में रहना तथा ठंडी हवा से बचना।
जल्द शुरू होगा पंचकर्म केंद्र

पंचकर्म केंद्र में क्षार सूत्र (पाइल्स) के चिकित्सक की नियुक्ति होगी। जिनका अलग से कक्ष होगा व अलग से वार्ड, माइनर ओटी होगी। जल्द ही पंचकर्म केंद्र में यह सेवा शुरू हो जाएगी। इसके साथ ही केंद्र में रसोई घर बनाया जाएगा। जिसमें दाखिल मरीजों को उनकी बीमारी के अनुसार पौष्टिक आहार दिया जाएगा।
ये दोनों चार्ट जिले के 20 केंद्रों पर भेजे जाएंगे। पंचकर्म केंद्र की और से अभियान के तहत विशेष लेक्चर प्रोग्राम चलाया जाएगा। अभियान स्कूल, कॉलेज व गांवों में यह प्रोग्राम चलाया जाएगा। जिसमें हर एक बीमारी के विशेषज्ञ आकर लेक्चर के माध्यम से लोगों को जागरूक करेंगे।
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-डॉ. रश्मि शर्मा, इंचार्ज जिला आयुर्वेदिक अस्पताल भिवानी।
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