भिवानी। विधानसभा चुनावों की सरगर्मियां तेज होने के साथ ही अब पंचायती उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में ताल ठोकने के लिए तैयार हैं। बवानीखेड़ा क्षेत्र में दो बड़ी पंचायतें हो चुकी हैं, जबकि कई वर्गों ने भी राजनीतिक हिस्सेदारी के लिए पंचायत प्रस्तावित कर दी है।
ऐसे में टिकटार्थी भिवानी जिले के चारों विधानसभा क्षेत्रों में जातीय समीकरण भी बिगाड़ सकते हैं। कई जातीय संगठन भी अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी के सुर को मुखर करने में लगे हैं। ये दौर ऐसा है जब राजनीतिक महत्वाकांक्षा अचानक ही हावी हो गई है, क्योंकि जिन वर्गों का विधायक की दौड़ में प्रत्याशी नहीं हैं अब वे भी अपनी दावेदारी मजबूत बनाने में जुटे हैं।
भिवानी विधानसभा क्षेत्र भिवानी, तोशाम, लोहारू और बवानीखेड़ा में पंचायती उम्मीदवारों को नामित करने के लिए पंचायतों का दौर शुरू हो गया है। इसमें किसी प्रत्याशी के नाम पर सभी सहमति जता रहे हैं, ये उम्मीदवार पहले तो किसी पार्टी की टिकट चाहते थे, लेकिन अब उन्हें अपनी दावेदारी कमजोर दिखाई दी तो पंचायती उम्मीदवार के तौर पर ही चुनावी रण की जमीन तैयार करने में जुट गए हैं।
भिवानी के चारों विधानसभा क्षेत्र में इस बार क्षेत्रीय दलों की दावेदारी भी कमजोर ही नजर आ रही है, क्योंकि जनता ऐसे प्रत्याशी का चयन करना चाहते हैं जिसकी सीधे सरकार में हिस्सेदारी बने और इलाके में विकास के द्वार खुलें। जिले की चार विधानसभा क्षेत्रों में आठ लाख 8,74,335 मतदाता हैं, जिनमें से 4,62,606 पुरुष और 4,11,729 महिला मतदाता हैं।
जिले में 29 नए पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं, जिसके बाद अब कुल 941 पोलिंग बूथ हो गए हैं। जिले में कुल 8,359 सर्विस वोटर हैं। इसी प्रकार से जिला में चारों विधानसभाओं में 7,457 दिव्यांग मतदाता हैं, जिनमें 4,959 पुरुष और 2,498 महिला मतदाता हैं। जिले में 18 से 19 वर्ष तक के 18,465 मतदाता हैं, जिनमें 12,852 पुरुष और 5,613 महिला मतदाता हैं। जिले में 85 वर्ष से अधिक आयु के 12,477 मतदाता हैं, जिनमें 4,116 पुरुष और 8,361 महिला मतदाता हैं। जिले में चारों विधानसभा क्षेत्रों के 941 बूथों पर मतदान होगा।