भिवानी। अब जून से पहले जिले के आठ गांवों की 2750 एकड़ कृषि भूमि को बारिश के बाद होने वाले जलभराव से राहत मिल जाएगी। इस पर 14 करोड़ 28 लाख रुपये लागत आएगी। इसके लिए सिंचाई विभाग इन आठ गांवों के अलावा चार अन्य गांवों में भी बड़ी परियोजना पर तेजी से काम कर रहा है। इसी के साथ अब मुंढाल कलां के समीप नेशनल हाईवे भी बारिश के पानी में नहीं डूबेगा।
इसके लिए एनएच-9 के आसपास की करीब 330 एकड़ कृषि भूमि से बरसाती पानी की निकासी की स्थायी व्यवस्था के लिए बड़ी पाइप लाइन डाली जा रही है। सबकुछ ठीकठाक रहा तो जून में ही काम पूरा हो जाएगा और जुलाई में शुरू होने वाले मानसून की दस्तक से पहले ही बरसाती जलभराव के प्रबंध भी पुख्ता हो जाएंगे।
सिंचाई विभाग की भिवानी वाटर सर्विसेज डिवीजन के तहत आने वाले बरसाती जलभराव प्रभावित गांवों में करोड़ों की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। ये परियोजनाएं भिवानी जिले के लिए ड्रीम प्रोजेक्ट के तौर पर भी देखी जा रही हैं, क्योंकि 1995 की बाढ़ के बाद से ही जिले के काफी गांव ऐसे हैं, जहां पर थोड़ी सी बारिश में ही जलभराव हो रहा है। ये इलाके अब सेमग्रस्त भी हो चुके हैं, जहां की भूमि भी खराब हो रही है। वहीं किसान एक फसल बिजाई तो करते हैं, लेकिन कटाई से पहले ही वहां बारिश का पानी खेतों में जमा हो जाता है। इससे किसानों को भी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है वहीं फसल उत्पादन भी ठप रहता है। इसी को देखते हुए जिले में करोड़ों की इन परियोजनाओं पर इसी साल काम शुरू किया गया है। जो जून में पूरा होने की संभावना है।
अब जलभराव से नहीं डूबेगा एनएच-9 नेशनल हाईवे, 330 एकड़ में होगी पानी की निकासी
सिंचाई विभाग की बरसाती जलभराव से निजात दिलाने की बड़ी परियोजना में एक परियोजना एनएच-9 के लिए भी अलग से बनाई गई है। हर बार बरसाती जलभराव में मुंढाल कलां के समीप हाईवे डूब जाता है। इससे स्थायी निजात दिलाने के लिए सिंचाई विभाग ने दो करोड़ 58 लाख रुपये की लागत से परियोजना बनाई। इसके तहत नेशनल हाईवे के आसपास के करीब 330 एकड़ भूमि से बरसाती जलभराव की निकासी मिताथल फीडर में कराने के लिए बड़ी पाइप लाइन डाली जा रही है। इन बड़े पाइपों के जरिए जलभराव वाली जगहों का पानी मिताथल फीडर में डाला जाएगा। इसे किसान जरूरत के हिसाब से सिंचाई में इस्तेमाल कर पाएंगे। वहीं बरसाती जलभराव की वजह से किसान यहां साल भर कोई भी फसल नहीं ले पाते थे या फिर खड़ी फसल भी जलभराव में डूब जाती थी, उससे भी किसानों को अब स्थायी तौर पर निजात मिल जाएगी।
ये आठ गांव होंगे बरसाती जलभराव से मुक्त
गांव का नाम-
एंकड़
1. तिगड़ाना-
380
2. तिगड़ी-
425
3. घुसकानी-
180
4. गुजरानी-
490
5. ढाणी हरिसिंह-
185
6. मिताथल-
510
7. जाटूलुहारी-
470
8. मुंढालकलां-
110
कुल एकड़-
2750
चार गांवों में बारिश के पानी की होगी डीवाटरिंग
जिले के गांव मुंढालकलां, तालू, मुंढाल खुर्द सहित चार गांवों में बरसाती पानी की डीवाटरिंग का काम होगा। इसके लिए सिंचाई विभाग 10 करोड़ 11 लाख रुपये की राशि भी खर्च करेगा। इस कार्य से बारिश के पानी का भी सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। इस पर भी सिंचाई विभाग का काम तेजी से चल रहा है। जिसके करीब एक माह में पूरा होने की संभावना है।
सिंचाई विभाग के तीन बड़े प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। ये तीनों ही प्रोजेक्ट पर जून के मध्य तक काम पूरा होने की संभावना है। इनके पूरा होने से गांवों की कृषि भूमि में जलभराव से स्थायी निजात मिलेगी। वहीं गांव की आबादी वाले इलाके के अलावा एनएच-9 हाईवे पर भी बारिश का पानी जमा नहीं होगा।
-जितेंद्र मान, कार्यकारी अभियंता, भिवानी वाटर सर्विसेज डिविजन सिंचाई विभाग भिवानी।