भिवानी। शहरी दायरे की 47 अनधिकृत कॉलोनियों का हरसेक (हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र) सर्वेक्षण करेगा। वहीं जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) की ओर से कंपनी के किए सर्वे की वेरिफिकेशन भी हरसेक से करवाई जाएगी। इसके बाद भिवानी की अनधिकृत कॉलोनियों को अधिकृत कराने के लिए फिर से मसौदा मुख्यालय में भेजा जाएगा।
अनधिकृत कॉलोनियों को अधिकृत किए जाने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित पैरामीटर की भी फिर से जांच होगी। इसके बाद ही ये मामला अब आगे बढ़ेगा। हाल ही में सरकार ने प्रदेश के कई जिलों में अनधिकृत कॉलोनियों को अधिकृत किया है, जिसमें भिवानी की एक भी कॉलोनी शामिल नहीं हो पाई थी।
सरकार ने अनधिकृत कॉलोनियों को अधिकृत किए जाने के लिए पैरामीटर तय कर दिए हैं। इसके बाद कई जिलों में तो अनधिकृत कॉलोनियां अधिकृत भी हो गई हैं, जहां पर अब विकास के कार्य होंगे। लेकिन भिवानी में करीब एक दशक से अधिकृत होने की बाट जोह रहीं 47 अनधिकृत कॉलोनियों को अभी तक अधिकृत नहीं कराया जा सका।
अधिकारियों का मानना है कि भिवानी नगर परिषद की हद में आने वाली जिन कॉलोनियों के खसरा नंबर और किले नंबर भेजे, वे शहरी दायरे से बाहर के होने की आशंका जताई गई। इसकी वजह से मामला खटाई में पड़ गया। मगर अब डीटीपी की ओर से शहर में कॉलोनियों का सर्वेक्षण करने वाली कंपनी जा चुकी है। ऐसे में डीटीपी की कंपनी के सर्वे डाटा की भी अब नगर परिषद हरसेक से जांच कराएगा। वहीं हरसेक के माध्यम से शहर की अनधिकृत कॉलोनियों का सर्वे कराकर उनकी बाउंड्री निर्धारित करेगा। इसके बाद डीटीपी के डाटा से भी हरसेक के सर्वेक्षण रिपोर्ट के साथ वेरिफिकेशन की जाएगी। उसी के बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार होगी, जिसे सरकार के समक्ष फिर से अनधिकृत कॉलोनियों को अधिकृत करने के लिए भेजा जाएगा।
हरसेक करेगी राजस्व विभाग में भूमि के ऑनलाइन डाटा की डिमार्केशन
हरसेक के पास ही ऐसी सुविधा है जो भिवानी शहर में राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज कॉलोनियों के किला नंबर और खसरा नंबर को दर्ज कर उन कॉलोनियों की डिमार्केशन कर सकता है। हरसेक द्वारा ही इन अनधिकृत कॉलोनियों की स्टीक इमेज और नक्शा तैयार किया जाएगा। इससे की कोई भी हिस्सा अधिकृत होने से नहीं बच पाएगा। इससे की पूरी कॉलोनी की प्रत्येक गली और उसका पूरा इलाका इसके अंदर डिमार्केशन में दर्ज होगा।
डी प्लान से हो रहा है अनधिकृत कॉलोनियों में काम, अधिकांश में नहीं मूलभूत सुविधा
फिलहाल अनधिकृत कॉलोनियों के अंदर डी प्लान के पैसे से ही कुछ छोटे-मोटे कार्य कराए जा रहे हैं, जबकि अधिकांश कॉलोनियों के अंदर तो लोगों के लिए कोई भी मूलभूत सुविधा नहीं है। डी प्लान में भी जिले को सीमित बजट मिल रहा है। इस सीमित बजट में कभी किसी कॉलोनी में कोई गली निर्माण करा दी तो किसी के अंदर छोटी पानी की लाइन डलवा दी। इससे ज्यादा न तो इन कॉलोनियों में कभी कोई विकास हुआ न कोई विकास का खाका तैयार हुआ।
ये हैं शहर में अनधिकृत कॉलोनी
बैंक कॉलोनी, न्यू डिफेंस कॉलोनी, राजीव कॉलोनी, नेताजी नगर, उत्तम नगर, कोंट रोड, देवनगर, हुन्नामल प्याऊ क्षेत्र, शांति नगर, लक्ष्मी नगर, डाबर कॉलोनी सहित करीब 54 अनधिकृत कॉलोनियों का सर्वे हो चुका है। इसमें से 47 अनधिकृत कॉलोनी अधिकृत होने के मानक पूरे कर रही हैं।
नगर परिषद ने हरसेक से शहर की अनधिकृत कॉलोनियों की डिमार्केशन के लिए भेजा है, जो राजस्व विभाग के ऑनलाइन भूमि रिकाॅर्ड से इन कॉलोनियों के किला नंबर और खसरा नंबर की वेरिफिकेशन करेगी। इसके साथ-साथ डीटीपी के सर्वे किए गए साफ्टवेयर से भी डाटा की जांच होगी। हरसेक अपनी अंतिम रिपोर्ट नगर परिषद को देगा। इसके बाद फिर से सरकार के सभी पैरामीटर पूरे करने वाली सभी अनधिकृत कॉलोनियों को अधिकृत किए जाने का मसौदा मुख्यालय भेजा जाएगा। हमारा प्रयास रहेगा कि इसी साल अनधिकृत दायरे में आने वाली हर गली और कॉलोनी को तय मानक पूरे कराकर अधिकृत कराएंगे।
-भवानी प्रताप सिंह, चेयरपर्सन प्रतिनिधि, नगर परिषद भिवानी।