शहर का हुडा सेंट्रल पार्क में न फव्वारों का शोरगुल है न झूलों पर बच्चों की चहल-पहल। भ्रमण करने वालों के लिए भी पगडंडियां टूटी पड़ी हैं। पार्क में घास सूख रही है तो व्यवस्था चौपट हो गई है। हालांकि सेंट्रल पार्क सहित शहर के मुख्य पार्काें के रखरखाव की जिम्मेदारी अब नगर परिषद के कंधों पर है।
पार्क में जीर्णोद्धार कराकर व्यवस्था कराने के लिए करोड़ों के बजट का खाका भी तैयार हुआ है। लेकिन अभी तक हुडा सेंट्रल पार्क में दिन नहीं बदले हैं। हुडा सेंट्रल पार्क में बच्चों के लिए बने झूले टूट चुके हैं। ये झूले इतने खतरनाक स्थिति में है कि अगर कोई बच्चा गलती से इनके पास गया तो निश्चित रूप से चोटिल हो जाएगा। क्योंकि जगह-जगह से झूले टूटे हैं और लोहे की चद्दर और एंगल भी टूटे हैं, जो बच्चों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती है।
यही हाल पार्क के आकर्षण का केंद्र बने फव्वारों का है। ये शांत है और बदहाल भी पड़े हैं। इनमें पानी का शोरगुल नहीं और न ही लाइटें जल रही हैं। यहां रोजाना शाम को पार्क के अंदर फव्वारों में लाइट शो देखने के लिए लोग तो आते हैं, मगर उन्हें यहां अंधेरा छाया ही मिलता है। पार्क के अंदर रोजाना ही करीब डेढ़ हजार लोग भ्रमण के लिए आते हैं। ये लोग सैर सपाटा कर चले जाते हैं। यहां दो मिनट बैठने के लिए ठीक से घास तक नहीं है, क्योंकि कई जगह घास भी उखड़ चुकी है।
अब नगर परिषद कर रहा रखरखाव
पार्क का पहले रखरखाव हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के पास था, मगर अब ये जिम्मेदारी नगर परिषद को मिली है। नगर परिषद के चेयरपर्सन प्रतिनिधि भवानी प्रताप का कहना है कि शहर के मुख्य पार्कों का करीब ढाई करोड़ से जीर्णोद्धार कराकर इनके अंदर जरूरी व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई जाएंगी। जिसका कार्य शुरू हो चुका है।