शहर के चिड़ियाघर में टाइगर ‘ब्रांडिस’ की दहाड़ खत्म होने के बाद अब मादा पेंथर ‘करीना’ की पेड़ पर अठखेलियां भी नजर नहीं आएंगी।
बुधवार देर शाम पेेंथर करीना की मौत हो गई। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकाें का मानना है कि उसकी आंत में अल्सर होकर सुराख हो गया था। यही उसकी मौत का कारण बना। बृहस्पतिवार को पोस्टमार्टम के बाद पहले उसकी अंत्येष्ठि की गई और फिर दफनाया गया।
मादा पेंथर करीना और नर पेंथर जानू को वर्ष 2012 में शिमला के जंगलों से पकड़कर भिवानी चिड़ियाघर लाया गया था। इन्हें जंगलों से पकड़ा गया था, इस कारण इन्हें एक से डेढ़ महीना तो पिंजरों में रखा गया। करीना की उम्र करीब 11-12 वर्ष थी।
मैदान में बैठी और बैठी ही रह गई
चिड़ियाघर कर्मचारियों का कहना है कि बुधवार को चिड़ियाघर देखने के लिए समय खत्म होने के बाद शाम करीब सवा छह बजे पेंथर करीना को पिंजरे से बाहर निकाला गया था।
वैसे तो उसका पिंजरा खुला ही रहता है मगर कूलर व ठंडक के चलते करीना दिन के समय अंदर रहती थी। खाना खिलाने के लिए उसे पिंजरे से बाहर निकाला गया। चिड़ियाघर इंचार्ज सुरेंद्र सिंह ने बताया कि करीना छोटे पिंजरे से निकलने के बाद खुले में बैठी। कर्मचारियों ने पिंजरे की सफाई की और मांस रखा।
मगर करीना नहीं आई। करीब आधे घंटे तक इंतजार किया मगर करीना नहीं आई। उसके शरीर में कोई हरकत नहीं होने के कारण कर्मचारियों ने फिर डंडी से हिलाकर देखा मगर उसके शरीर में कोई हरकत नहीं हुई। बाद में नर पेंथर जानू को दूसरे पिंजरे में बंद करके कर्मचारी अंदर घुसे। जब करीना के पास पहुंचे तो वह दम तोड़ चुकी थी।
उछल-कूद ही बनी मौत का कारण
करीना अक्सर पिंजरे के अंदर लगे पेड़ों पर उछल-कूद करती रहती थी। उसका अधिकतर समय पेड़ों पर ही गुजरता था। वह हर समय पेड़ों पर पत्तों के बीच छिपी नजर आती थी। जबकि नर पेंथर जानू जमीन पर रहना ज्यादा पसंद करता है। उसके शव का पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों की माने तो एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर छलांग लगाने के दौरान शरीर में खिंचाव आता है।
छलांग के दौरान ही उसकी आंत में खिंचाव आया होगा और उसकी आंत में अलसर हुई और सुराख हुआ। इस सुराख में पानी भरने के कारण उसकी मौत हुई। पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. जयपाल, डॉ. विजय सनसनवाल ने बताया कि करीना की आंत में अलसर होकर सुराख हो गया।
उसमें पानी भरने के कारण समस्या बनी और उसकी मौत हुई।
पूंछ की दवाओं से बढ़ी जिंदगी
करीना की पूंछ में भी चोट लगी हुई थी। जिसका इलाज चल रहा था। उसे एंटीबायटिक दवाइयां दी जा रही थी। चिकित्सकाें की माने तो इन एंटीबायटिक दवाइयों के कारण ही आंत में अल्सर व सुराख के बावजूद वह कुछ समय ज्यादा जिंदा रही।
छह तरह के सैंपल जांच के लिए भेजे बरेली
दोपहर करीब साढे़ 12 बजे करीना के शव का डॉ. जयपाल, डॉ. विजय सनसनवाल और डॉ. राजेश की टीम ने पोस्टमार्टम किया। उसके शरीर के ब्रेन, हार्ट, लीवर, स्पलीन, किडनी, गुर्दे के सैंपल लेकर जांच के लिए आईवीआरआई विद्युत नगर बरेली लैब में जांच के लिए भेजे गए।
आधी जिंदगी ही जी पाई करीना
मादा पेंथर करीना की उम्र करीब 11-12 वर्ष थी। पेंथर की औसतन उम्र चिड़ियाघर में करीब 20 वर्ष होती है। जंगल में इनकी उम्र थोड़ा कम होता है। मादा पेंथर करीना की मौत के बाद नर पेंथर जानू अकेला रह गया। अकेलापन इन जानवरों की स्वास्थ्य के लिए घातक है। अब जू अथॉरिटी भी इस विषय पर सोच रही है।
18 अप्रैल को हुई थी बाघ ‘ब्रांडिस’ की मौत
चिड़ियाघर के एकमात्र बाघ ब्रांडिस ने बीती 18 अप्रैल की रात को दम तोड़ दिया था। उसकी मौत लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी से हुई थी। करीना को भी ब्रांडिस के नजदीक ही दफनाया गया।