दादरी से गांव इमलोटा तक दिल्ली-पिलानी नेशनल हाईवे के जीर्णोद्घार को मिनिस्ट्री ने तो मंजूरी दे दी है लेकिन अब तक केंद्र सरकार की ओर से मंजूरी न मिलने से इसके सुधारीकरण की प्रक्रिया अधर में लटक गई है। इस हाईवे पर 29 करोड़ की राशि खर्च होनी है। दादरी से गांव इमलोटा तक हाईवे जवाब देने लगा है। यह मार्ग दिल्ली- पिलानी से जुड़ा है। 22 किलोमीटर की लंबाई में यह हाईवे चरखी दादरी पीडब्ल्यूडी विभाग के अधीन पड़ता है। उसके बाद झज्जर जिले की सीमा आरंभ हो जाती है।
अब नेशनल हाईवे के हालात बद से बदतर हो गए है। जगह-जगह से क्षतिग्रस्त होने के कारण सड़क के बीचोंबीच गहरे गड्डे बन चुके हैं। झज्जर टी-प्वाइंट से लेकर गांव समसपुर तक सड़क पर बनी जंपिंग राहगीरों को खासा परेशान कर रही हैं। इस मार्ग से रोजाना हजारों की तादाद में छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। महेंद्रगढ़, नारनौल, राजस्थान के झुंझुनू, पिलानी, चिड़ावा का सीधा जुड़ाव इसी मार्ग से है। अब सड़क मार्ग कंडम होने पर वाहनों की गति पर विराम लगने लगा है। दिल्ली अब दादरी से काफी दूर होने लगी है।
केंद्र सरकार ने अटकाया मामला
करीब छह माह पहले पीडब्ल्यूडी विभाग ने चरखी दादरी से गांव इमलोटा तक नेशनल हाईवे के जीर्णोद्घार के लिए प्रपोजल भेजा था। मिनिस्ट्री ने तो इसकी मंजूरी दे रही है। नेशनल हाईवे होने की वजह से इसे अंतिम रूप केंद्र सरकार की ओर से दिया जाना है। अब यह प्रक्रिया देरी से पूरी होने पर बारिश के इस मौसम में हाईवे का बिल्कुल कंडम होना स्वाभाविक है। इस मार्ग पर पड़ने वाले गांवों में जलभराव की समस्या शुरू से ही बनी रही है। गांव लोहरवाड़ा, अचीना ताल, मोरवाला व इमलोटा का एरिया तराई युक्त है। इस तराई एवं नमी का असर हाईवे पर भी पड़ रहा है। विभाग समय- समय पर इस हाईवे के लेवल को ऊंचा भी उठाता रहा है।