भिवानी। बिजली के बिल देखकर उद्योगपतियों की दिल की धड़कन तेज हो गई। इंडस्ट्रियल एरिया की हर दूसरी व तीसरी फैक्टरी के बिलों में गड़बड़ी है। एफएसए समेत कुछ चार्ज बिल में जुड़ने की बात तो सभी के समझ में आ रही है, लेकिन बिलिंग पैटर्न में बदलाव देख सबका सिर चकरा रहा है। उद्योगपतियों का कहना है कि बिलिंग पैटर्न केडब्ल्यूएच से बदलकर केवीएच करने की वजह से उनका बिल 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गया है। विभाग का कहना है कि बिल वृद्धि का बिलिंग पैटर्न बदलने से कोई लेना-देना नहीं है।
तीन से चार महीने बाद मिले बिजली के बिल देखकर लगभग सभी उद्यमी टेंशन में हैं। कोई यूनिट के जंप से हैरान है तो कोई पावर फैक्टर को लेकर परेशान है। किसी को शक है कि केडब्ल्यूएच के बजाय केवीएच पैटर्न करने की वजह से उनका बिल बढ़ा है। औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 में करीब ढाई सौ यूनिट हैं। नए बिजली के बिलों से लगभग आधे उद्योगपति संतुष्ट नहीं हैं।
बता दें कि केवीएच पैटर्न शुरू हुए छह महीने से अधिक हो चुका है। चूंकि, चार महीने के बिल एक साथ भेजे गए हैं, इसलिए भी बिल के अमाउंट और कंज्यूम यूनिट को लेकर उपभोक्ताओं में संशय बना हुआ है।
युवा उद्यमी आशुतोष बताते हैं कि लगभग चार महीने बाद उन्हें बिल मिला है। पिछले बिलों की तुलना में करीब 20 से 22 प्रतिशत बढ़ोतरी है। वे यूनिट व अन्य चीजों का मिलान कर रहे हैं। उन्हें अंदेशा है कि केवीएच पैटर्न की वजह से उनका बिल बढ़ा है। उद्योगपति मनोज गर्ग का कहना है कि एफएसए व अन्य सरचार्ज के मूल्याकंन के बावजूद उनका बिजली का बिल में लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।
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चार महीने का बिल एक साथ आने की वजह से ज्यादा उद्योगपति ज्यादा परेशानी महसूस कर रहे हैं। लेकिन, यह भी सही है कि बिलों में गलतियों की भरमार है। बिल समय पर न मिलने की वजह से वे अपना पावर फैक्टर चेक नहीं कर पाए। इस वजह से खुद उन्हें मोटी रकम विभाग को देनी पड़ी। केवीएच पैटर्न लागू करने की वजह से इतनी परेशानी नहीं है।
धर्मवीर नेहरा
प्रधान, भिवानी इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
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केवीएच पैटर्न की वजह से बिल बढ़े हैं, ऐसा नहीं है। सिटी मीटर भी लगे हैं। कोई भी जांच कर सकता है। यह सही है कि एक साथ तीन-चार महीनों का बिल भेजा गया है। इस वजह से कुछ कमियों भी हैं। विभाग बिलों में कमियों को दूर कर रहा है।
संजय रंगा
कार्यकारी अभियंता, बिजली निगम