भिवानी। नगर परिषद से जुड़े बहुचर्चित एक्सिस बैंक घोटाले में पूर्व चेयरमैन रणसिंह यादव और तत्कालीन ईओ संजय यादव को हाईकोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। सेशन कोर्ट दोनों की डिस्चार्ज याचिका पहले ही खारिज कर चुका है। हाईकोर्ट में मामले की अगली सुनवाई तीन सितंबर को होगी।
प्राथमिकी संख्या 149 में अतिरिक्त सत्र न्यायालय भिवानी ने तीन जून को रणसिंह यादव और संजय यादव की डिस्चार्ज याचिका खारिज की थी। अदालत ने मामले में पर्याप्त प्रथमदृष्टया सामग्री पाते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश दिए थे। इस आदेश के खिलाफ दोनों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया।
उपलब्ध हाईकोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार 25 अगस्त को मामले की सुनवाई हुई लेकिन याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ अधिवक्ता के अनुरोध पर इसे तीन सितंबर तक स्थगित कर दिया गया। हाईकोर्ट से अभी कोई अंतिम राहत अथवा डिस्चार्ज का आदेश नहीं हुआ है।
57 चेकों के जरिए किया 15.07 करोड़ रुपये का लेन-देन
सेशन कोर्ट के आदेश में दर्ज अभियोजन पक्ष के अनुसार वर्ष 2018 से 2021 के बीच 57 चेकों के माध्यम से कुल 15,07,63,420 रुपये नगर परिषद भिवानी के खातों से विभिन्न निजी व्यक्तियों और फर्मों के खातों में ट्रांसफर किए गए। इन चेकों पर रणसिंह यादव, राजेश मेहता और संजय यादव के नाम से हस्ताक्षर बताए गए थे।
जांच के दौरान इन हस्ताक्षरों को एफएसएल जांच के लिए भेजा गया था। अदालत के रिकॉर्ड में एफएसएल रिपोर्ट का उल्लेख है जिसमें चेकों पर मौजूद हस्ताक्षरों का बैंक रिकॉर्ड से मिलान नहीं होने की बात दर्ज है। अदालत ने कहा कि केवल हस्ताक्षर मैच न होने के आधार पर इस स्तर पर आरोपियों को डिस्चार्ज नहीं किया जा सकता क्योंकि चेक बुक और खातों की कस्टडी, नियंत्रण तथा कथित लेन-देन से जुड़े अन्य साक्ष्य भी रिकॉर्ड पर हैं।
कोर्ट ने कहा- प्रथमदृष्टया मामला बनता है
अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि रणसिंह यादव और संजय यादव के खिलाफ पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है। दोनों की डिस्चार्ज की मांग को योग्यता से रहित पाते हुए अस्वीकार कर दिया गया। अदालत ने सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में आरोप तय करने का निर्देश दिया।
आदेश में जांच के दौरान सामने आए कई बैंक लेन-देन का भी उल्लेख है। इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना के खाते से 4 करोड़ तथा अमृत योजना से 2.79 करोड़ से अधिक की राशि के ट्रांसफर से संबंधित दस्तावेज शामिल हैं जिनमें रणसिंह यादव और राजेश मेहता के हस्ताक्षरों का उल्लेख किया गया है।
आईफोन और कमीशन के आरोप भी जांच रिकॉर्ड में
अदालत के आदेश में एक्सिस बैंक के तत्कालीन मैनेजर नितेश अग्रवाल के कथित खुलासे का भी उल्लेख है। रिकॉर्ड के अनुसार उसने रणसिंह यादव को लगभग 15 लाख रुपये नकद और 10 आईफोन देने की बात कही। इसी रिकॉर्ड में राजेश मेहता को 50,000 रुपये कमीशन दिए जाने के आरोप का भी उल्लेख है। ये सभी बातें अभियोजन रिकॉर्ड में दर्ज आरोप हैं और अंतिम रूप से अदालत में साक्ष्य के आधार पर तय होंगी।
जांच में कथित 10.50 करोड़ के हिस्से का भी उल्लेख
सेशन कोर्ट के आदेश में जांच के दौरान रणसिंह यादव के कथित डिस्क्लोजर का उल्लेख है जिसमें 10.50 करोड़ रुपये उनके हिस्से में आने की बात दर्ज है। इसी प्रकार अन्य आरोपियों के कथित हिस्सों और रकम की रिकवरी से संबंधित दावे भी जांच रिकॉर्ड में दर्ज हैं।
सीबीआई जांच की रिपोर्ट में रणसिंह की भूमिका सामने आने का दावा
सुशील वर्मा द्वारा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दायर याचिका के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद हुई प्राथमिक जांच में भी पूर्व चेयरमैन रणसिंह यादव की भूमिका से संबंधित साक्ष्य सामने आने की बात कही गई। सीबीआई की प्राथमिक जांच रिपोर्ट में रणसिंह यादव के खिलाफ साक्ष्य मिलने की पुष्टि होने का दावा है।
इसके अलावा, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच और चार्जशीट में भी रणसिंह यादव की भूमिका को गंभीरता से दर्ज किए जाने तथा उन्हें मामले का मुख्य आरोपी और मुख्य साजिशकर्ता बताए जाने की बात कही गई है।