बवानीखेड़ा निवासी रेखा छाबड़ा अपने बेटे रजत छाबड़ा के साथ। संवाद
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बवानीखेड़ा। कस्बे बवानीखेड़ा के वार्ड नंबर 6 निवासी रेखा छाबड़ा ने अपने बेटे की किडनी खराब होने पर साढे़ तीन साल पहले अपनी एक किडनी देकर बेटे को नई जिंदगी दी। अब बेटा और मां दोनों पूर्णरूप से स्वस्थ है।
कस्बे के वार्ड नंबर 6 निवासी प्रवीण छाबड़ा ने बताया कि जनवरी 2019 में उसके बेटे रजत छाबड़ा की तबीयत बिगड़ी। चेकअप कराया तो चिकित्सकों ने उसकी किडनी खराब बताई। रजत को जन्म से ही एक किडनी थी। करीब 2 माह उन्होंने डायलिसिस करवाया। उसके बाद उसकी मां से बेटे की हालत देखी नहीं गई, तो उन्होंने अपनी एक किडनी बेटे को दे कर उसकी जिंदगी बचाई। अब उसका बेटा रजत (28) स्वस्थ है।
किडनी ट्रांसप्लांट के बाद लगती है ज्यादा भूख
किडनी ट्रांसप्लांट के बाद रजत को पहले से ज्यादा भूख लगती है। रजत छाबड़ा ने बताया कि जब डॉक्टरों ने उसकी मां की किडनी ट्रांसप्लांट की तो दो-तीन दिन बाद तक उसे तेज बुखार आया। तब से उसका डॉक्टरों से नियमित परामर्श व दवाइयां चल रही है। उसने बताया कि भूलवश यदि एक दिन भी दवा लेने में चूक हुई तो उसकी तबीयत बिगड़ जाती है। उसे चक्कर व दौरे आने लगते हैं। उसने बताया कि डॉक्टरों के अनुसार उसे बाजार की तली हुई चीज व फास्ट फूड खाने आजीवन वर्जित है। वह स्वस्थ है और उसकी मां भी स्वस्थ है।