भिवानी। पिछले दो-तीन दिनों से पारे में हुई गिरावट से किसानों के मायूस चेहरे फिर से खिलखिला उठे। फसलों को होने वाले नुकसान से किसानों को राहत मिली है। आमतौर पर मकर संक्रांति के बाद सर्दी से राहत मिलने की उम्मीद होती है, लेकिन इस वर्ष सर्दी आरंभ होने के संकेत मिले है। ऐसे में किसान गेहूं, सरसों व चने की फसलों की बेहतर पैदावार की उम्मीद कर सकते हैं।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान समय में फसलें विकास के चरण में है। इस दौरान फसलों में होने वाले फुटाव के लिए सर्द मौसम की आवश्यकता होती है। ताकि पकाव के दौरान फसलें बेहतर बनी रहे। फसलों के लिए न्यूनतम तापमान 4 डिग्री से कम नहीं होना चाहिए तो अधिकतम तापमान भी 27-28 डिग्री तक ही फायदेमंद रहता है।
किसान इन बातों का रखें ध्यान
-फसलों में यूरिया, खाद का छिड़काव फायदेमंद रहेगा।
-नहरी पानी की उपलब्धता फसलों के लिए बेहतर होगी।
-फसलों को रोग से बचाने के लिए कीटनाशक दवाइयों का स्प्रे कर सकते हैं।
बारिश की जरूरत
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक फसलों के बेेहतर पैदावार के लिए बारिश की इस वक्त जरूरत है। जिले में केवल 15 प्रतिशत भूमिगत जल कृषि के योग्य है। बाकी 85 प्रतिशत में नमक घुला हुआ है जो फसलों के लिए नुकसानदायक है। अगर बारिश सही समय पर नही होती हैं तो किसानों के लिए नहरी पानी ही बेहतर विकल्प के तौर पर प्रयोग में लाया जा सकता है।
वर्जन:::::::::
इस समय फसलें अपरिपक्व स्टेज में है। अब तक पारा फसलों के अनुरूप न होने के कारण गेहूं, सरसों की फसलों में फुटाव सही ढंग से नही हो पा रहा था। लेकिन पिछले दिनों से पारे में आई गिरावट फसलों के लिए फायदेमंद होगी।
-डॉ. अतर सिंह, कृषि विज्ञानी, कृषि विज्ञान केन्द्र भिवानी