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Bhiwani News: पारा 42 डिग्री पार, पशुओं की सेहत पर हीट स्ट्रोक का वार

Tue, 23 May 2023 10:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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भिवानी। तापमान 42 डिग्री से ऊपर पहुंचने के साथ ही इंसान ही नहीं पशु भी हांफने लगे हैं। गर्मी से बेहाल इंसान तो लू से बचाव के कई तौर तरीके अपना रहा है, मगर गर्मी में बेजुबान पशुओं की मुसीबत भी बढ़ गई है। पशु अस्पतालों में अभी से पशुओं में हीट स्ट्रोक के मामले ज्यादा आ रहे हैं। इनके उपचार के साथ-साथ पशु चिकित्सक पशुपालकों को बचाव के उपाय बता रहे हैं। इसी के साथ पशुपालन विभाग ने भी हीट स्ट्रोक से पशुओं को बचाने के लिए एडवाइजरी जारी की है।
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पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. रवींद्र सहरावत ने बताया कि हीट स्ट्रोक से पशुओं को बचाने के लिए पशुपालकों को खास तौर पर सावधानियां बरतनी होंगी। गर्मी के मौसम में दुधारू पशुओं में भी 15 से 20 फीसदी दुग्ध उत्पादन में भी कमी आ जाती है।
वहीं पशुपालन विभाग बारिश के मौसम से पहले जिलेभर में करीब तीन लाख छह हजार पशुओं को छह लाख 12 हजार मुंह खुर की डोज लगाने की तैयारी में जुटा है। क्योंकि हीट स्ट्रोक के साथ-साथ मुंह खुर बीमारी भी पशुओं की सेहत के लिए बहुत ही गंभीर है। ऐसे में पशु अस्पतालों में भी पशु चिकित्सकों को सख्त हिदायतें दी गई हैं।
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पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. रवींद्र सहरावत ने बताया कि पशुपालक मुंह खुर व गल घोटू के बचाव के लिए टीकाकरण में एक भी पशु को न छूटने दें क्योंकि पशुपालन विभाग का ये अभियान पोलियो अभियान की तरह है और बीमारी के प्रति सुरक्षा चक्र को मजबूत करना है।
पशु अस्पताल में अभी से हीट स्ट्रोक से पीड़ित पशु अस्पताल पहुंच रहे हैं। हम पशुपालकों को इससे बचाव के देशी नुस्खे और विभाग द्वारा जारी की गई हिदायतों से भी अवगत करा रहे हैं। पशुओं का इलाज भी किया जा रहा है। ज्यादातर पशुओं को गर्मी में खास आवास और रखरखाव की जरूरत पड़ती है। उसी हिसाब से पशुपालक को भी बदलाव करने पड़ते हैं।
-डॉ. विजय सनसनवाल, पशु चिकित्सक, पशु अस्पताल बलियाली।
लू लगे पशु के लक्षण
- पशु का तापमान 103 से 106 फारेनहाइट तक पहुंच जाता है।
- पशु हांफना शुरू कर देता है। पशु की सांसें बढ़ जाती हैं।
- पशु खाना-पीना छोड़ देता है।
- दूध घट जाता है।
- ज्यादा दिन बीमार रहने पर पशु की पानी की कमी हो जाती है और खाल में झुर्रियां पड़ जाती हैं, ऐसे पशु को तुरंत पशु चिकित्सक से इलाज करवाएं।
लू से पशुओं के बचाव के तरीके
- पशुओं को खुले व हवादार स्थान पर रखें।
- सुबह धूप निकलने से पहले व शाम को धूप खत्म होने के बाद पशु को कम से कम आधा घंटा नहलाएं।
- ज्यादा से ज्यादा ठंडा पानी पशु को पिलाया जाए।
- अगर आसपास जोहड़ है तो सुबह और शाम भैंसों को जोहड़ में घंटे भर तक रखें।
- पशु को सूखे चारे की जगह हरा चारा ज्यादा मात्रा में दें।
- अगर पशु हांफने लगे तो घरेलू उपचार के तौर पर हरी भांग आधा किलो तीन दिन तक हरे चारे में काटकर खिला सकते हैं।
- लू लगे पशु के लिए 250 ग्राम नींबू का रस, 200 ग्राम देशी खांड व 10 ग्राम जीरे का पाडर मिलाकर देना भी अच्छा रहेगा।
- गर्मी के दिनों में दूध कम न हो इसके लिए दाने में जौ का प्रयोग किया जा सकता है। आधा किलो जौ को रात को पानी में दलिया के साथ में भिगोए। सुबह इसमें तरल विटामिन मिलाकर पशु को खिलाएं। इसमें पाचन प्रक्रिया को बढ़ाने के लिए लीवर टॉनिक लीव सोल्यूशन 50 ग्राम प्रतिदिन के हिसाब से दी जा सकती है।
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