भिवानी। डीसी साहब, ये कंपनी आलां नै गैर कानूनी रूप तैं नहर के पास बोर कर रखे हैं। इसतैं गांव का जलस्तर ब्होत नीचे चला गया। अधिकारियों तैं मिले तो वो बोले यो म्हारा काम कोनी। आप इस मामलै मैं कार्रवाई करो। ये कहना था गांव हालुवास मजरा देवसर के ग्रामीणों का। वे कष्ट निवारण समिति की बैठक में अपनी फरियाद लेकर पहुंचे थे।
बुधवार को पंचायत भवन में आयोजित हुई बैठक की अध्यक्षता लोक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक निगम ने की। ग्रामीणों ने आगे बताया कि पूरा गांव खेती-बाड़ी पर निर्भर है। गांव के पास लगे एक कारखाने ने अवैध रूप से वहां कई बोर कर लिए हैं और 24 घंटे पानी का दोहन किया जा रहा है। इससे क्षेत्र का जलस्तर काफी नीचे चला गया है। बगैर पानी के खेती कर पाना संभव नहीं है। कृषि विभाग के अधिकारी इसे अपने क्षेत्र से बाहर का मामला बता रहे हैं। इस पर अतिरिक्त मुख्य सचिव और उपायुक्त ने एसडीएम भिवानी और डीएसपी को निर्देश दिए कि वो बैठक खत्म होने के बाद तुरंत मौके पर जाकर जांच करें। इस मामले में जो भी दोषी उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जाए।
बैठक में कुल 15 परिवाद रखे
बुधवार को आयोजित बैठक में कुल 15 परिवाद रखे गए। इनमें से एक परिवाद सीएम विंडो पर लंबित समस्या से संबंधित था। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने दो समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया और शेष परिवादों पर अधिकारियों को जांच करने व रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। बैठक में विधायक घनश्याम दास सर्राफ भी मौजूद रहे। बैठक में रखे गए परिवादों की सुनवाई करने के दौरान पुलिस विभाग से संबंधित रवि पुत्र प्रभाति लाल, निवासी हालु मोहल्ला व नीरज पुत्र रामफल, निवासी वार्ड नंबर छह निवासी के परिवाद पर पुलिस उप अधीक्षक मुख्यालय विरेंद्र सिंह ने बताया कि इन परिवादों का समाधान किया जा चुका है। स्थानीय दादरी गेट, ढाणा रोड निवासी मनीषा पुत्री बनारसी दास के मामले में उप पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र सिंह ने अतिरिक्त मुख्य सचिव को बताया कि इस मामले आरोपियों का लाई डिक्टेटर टेस्ट किया जा चुका है और नार्को टेस्ट भी किया जाएगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने इस मामले को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए। गांव रिवासा के नहरी पानी से संबंधित परिवाद पर अधीक्षक अभियंता यमुना जल सेवाएं मंडल ने श्री निगम को बताया कि इस मामले का भी निपटारा कर दिया गया है।
तीन साल पहले तीन लाख का गबन, अब तक नहीं मिला न्याय
गांव नलोई निवासी किसान कर्मवीर ने बताया कि उसने तीन साल किसान क्रेडिट कार्ड का कर्ज चुकाने के लिए अपने खाते में 3 लाख 10 हजार रुपये नगद जमा कराए थे। इसकी उसके पास रसीद भी है। मगर उसके खाते में रुपये नहीं आए। बैंक का कहना है कि रुपये उसे दे दिए जा चुके हैं। मगर पासबुक में रुपये अपडेट नहीं हो रहे हैं। कर्मवीर ने बताया कि लोन चुकता नहीं होने के कारण उसे 80 हजार से ज्यादा रुपये ब्याज के भी भर चुका है। इसके अलावा शिकायतों के लिए आने-जाने में भी हजारों रुपये खर्च हो चुके हैं। इस पर आलोक निगम ने निर्देश दिए कि अगली मीटिंग में उस समय कैश जमा करने वाले कर्मचारी को भी बुलाया जाए। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो बैंक शाखा के मैनेजर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया जाएगा।
बिजली निगम अधिकारियों पर परेशान करने का आरोप
गांव सैय निवासी राजबीर कौशिक ने बताया कि वह सामाजिक कार्यकर्ता हैं। बिजली निगम में हो रही धांधली के खिलाफ उन्होंने आवाज उठाई तो निगम अधिकारियों ने उन पर बिजली चोरी का झूठा आरोप लगा दिया। वर्ष 2018 के 7वें महीने की 18 तारीख को बिजली चोरी का आरोप लगाया तथा 8वें महीने की 9 तारीख को एफआईआर दर्ज कराई गई। उसके बाद 10वें महीने की 16 तारीख को एफआईआर की सूचना देने के लिए उनके पास स्पीड पोस्ट की गई। इससे साबित होता है कि ये सब निगम अधिकारियों ने मिलीभगत कर किया है। एसीएस ने मामले की जांच एसपी को करने के निर्देश दिए।
अधिकारी देते हैं रेहड़ी लगवाने की धमकी
बवानीखेड़ा अनाजमंडी में यदुवंशी ट्रेडिंग कंपनी चलाने वाले ललित कुमार ने बताया कि एफसीआई भिवानी के अधिकारियों ने रिश्वत नहीं देने पर उसकी अनाज से भरी गाड़ी को बिना किसी कारण रिजेक्ट कर दिया। जब उनसे इसका कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा जो बन सके कर लो। तुम्हारा अनाज नहीं लिया जाएगा। अधिकारियों ने यहां तक कहा कि वो उससे रेहड़ी लगवा देंगे। एसीएस ने इस मामले की जांच एसडीएम संदीप अग्रवाल को सौंपी।