भिवानी और रोहतक के अस्पतालों में हुए पहले दो पोस्टमार्टम में गर्दन पर चोटें और चेहरे-गर्दन की संरचनाओं का नुकसान पाया गया। दोनों ने जहर को मौत का कारण बताया, विसरा रिपोर्ट में ऑर्गेनोफॉस्फोरस मिला। विरोध के बाद एम्स, दिल्ली में तीसरे पोस्टमार्टम में विच्छेदित गर्दन संदिग्ध पाई गई। एम्स बोर्ड ने मौत का कारण धारदार हथियार से लगी गंभीर चोट बताया।
एम्स बोर्ड को जहर के सबूत नहीं मिले, जिसके बाद सीबीआई ने एसएसएमबी की राय ली। एसएसएमबी ने एम्स के निष्कर्षों को खारिज करते हुए गायब संरचनाओं का कारण जानवरों की गतिविधि बताया। बोर्ड ने मनीषा की मौत ऑर्गेनोफॉस्फोरस विषाक्तता से होने का निष्कर्ष दिया। एसएसएमबी की राय पर सीबीआई ने मनीषा की मौत को मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या बताया।
मनीषा के पिता संजय कुमार का कहना है कि सीबीआई की तरफ से करीब 3700 पेज का करीब दस किलो वजनी क्लोजर रिपोर्ट का पुलिंदा भेजा गया है। जिसमें सीबीआई ने बेटी की मौत को आत्महत्या करार दिया है। सीबीआई के इस फैसले को चुनौति देंगे।
सीबीआई के पूर्व उप कानूनी सलाहकार एडवोकेट हर्ष मोहन सिंह ने बताया कि वे इस मामले की नि:शुल्क पैरवी करेंगे। उन्होंने कहा कि पहले पुलिस और अब सीबीआई ने मामला दबाया है। सीबीआई के पास अब भी कई सवालों के जवाब नहीं हैं। इस मामले में तथ्यों का अवलोकन कर निश्चित तौर पर चुनौति दी जाएगी।
सीबीआई के पूर्व उप कानूनी सलाहकार एडवोकेट हर्ष मोहन सिंह का कहना है कि इन सवालों का सीबीआई के पास भी कोई जवाब नहीं है। जिसमें ये तथ्य नरकिनार किए गए हैं। जिनमें मुख्य तौर पर...
- सिंघानी नहर के पास खेत में जहां मनीषा का शव पुलिस को मिला था, उससे 48 घंटे पहले उसकी मौत हो चुकी थी।
- मृतका के परिजन जिस जगह मनीषा की लाश मिली थी, वहां करीब 24 घंटे पहले गुजरे थे, उस दौरान वहां कोई लाश नहीं थी।
- मनीषा के शव को करीब 10 फीट तक घसीटने के भी निशान मिले थे।
- मौके पर मौत से पहले संघर्ष का कोई निशान नहीं था, इससे साफ है कि मनीषा को यहां लाकर डाला गया था।
- मनीषा का फोन टूटी हुई हालत में बरामद हुआ। पुलिस द्वारा मनीषा के फोन का कोई डॉटा रिकवर नहीं कर पाई।
- मनीषा के शव से करीब 50 फीट दूर उसका दुपट्टा और चप्पलें पड़ी मिली