ढाणी लक्ष्मण निवासी 19 वर्षीय शिक्षिका मनीषा की मौत मामले में वीरवार को पंचकूला की विशेष अदालत में मनीषा के पिता संजय की तरफ से दाखिल विरोध याचिका पर सुनवाई के दौरान करीब तीन घंटे तक बहस चली। सीबीआई की तरफ से विशेष अदालत में दाखिल क्लोजर रिपोर्ट पर मनीषा के पिता संजय की तरफ से पैरवी कर रहे सीबीआई के पूर्व उप कानूनी सलाहकार एडवोकेट हर्ष मोहन सिंह ने सवाल उठाए गए।
हर्ष मोहन सिंह की तरफ से सीबीआई की कोर्ट में बहस के दौरान सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट में मनीषा की मौत जहर खाने से होने पर सवाल उठाए। सीबीआई की जांच रिपोर्ट में मनीषा के दो सुसाइड नोट बरामद किए गए हैं। इसमें एक सुसाइड नोट 13 अगस्त 2025 को मनीषा के शव के पास से बरामद हुआ बताया गया, जबकि दूसरा सुसाइड नोट मनीषा के किसी रिश्तेदार द्वारा डीएसपी को सौंपा गया। शव के पास से मिला सुसाइड नोट ना तो परिजनों की मौजूदगी में पुलिस ने बरामद किया था और ना ही फारेंसिक जांच में उस सुसाइड नोट की लिखावट मनीषा की लिखावट से मिलान हो पाई।
जबकि डीएसपी को मिला दूसरा सुसाइड नोट जिस रिश्तेदार से प्राप्त हुआ था। सीबीआई ने उसके बयान तक दर्ज नहीं किए। केवल डीएसपी के बयानों के आधार पर ये सुसाइड नोट जांच में शामिल कर दिया। मनीषा के पिता की तरफ से पैरवी कर रहे वकील ने अदालत को बताया कि कोई व्यक्ति आत्महत्या के लिए दो अलग-अलग सुसाइड नोट लिखेगा और फिर तीसरी जगह 600 रुपये में जहर खरीदकर दूर जाकर आत्महत्या करेगा। जबक मात्र दस रुपये में सल्फास जो आसानी से उपलब्ध होने वाला जहर है, उसे निगल कर जान भी दे सकता है।
इसी तरह अदालत में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट में सीबीआई द्वारा मनीषा की मौत जहर खाने से होने की बात पर विरोध याचिका दायर करने के पक्ष के वकील ने कहा कि पुलिस ने मनीषा की तीन पोस्टमार्टम कराए थे। पहला पोस्टमार्टम जिला नागरिक अस्पताल भिवानी में हुआ था। जबकि दूसरा पोस्टमार्टम रोहतक पीजीआई में हुआ। तीसरा पोस्टमार्टम दिल्ली एम्स से कराया गया। एम्स ने भी पोस्टमार्टम की जांच के बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट दी।
एम्स की पोस्टमार्टम और अंतिम रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि मनीषा की मौत से पहले उसका गला बेहरमी से तेजधार हथियार से पीछे से काटा गया है। जबकि जहर से मौत की कोई पुष्टि तक नहीं हुई। इसी तरह मनीषा के चेहरे को किसी कैमिकल से जलाया गया है, जिसकी वजह से उसके चेहरे की त्वजा और माॅस भी झुलस चुका था। हर्ष मोहन ने अदालत में यह भी तर्क रखा कि सीबीआई की एफएसएल रिपोर्ट में मनीषा के जहर से मौत की कोई पुष्टि नहीं हुई जबकि स्टेट पुलिस की आरएफएल रिपोर्ट में जहर निकलने से मौत की बात कही गई थी।
जबकि पुलिस को मौके से जहर की कोई शीशी नहीं मिली थी। जिस कॉलेज में मनीषा को अंतिम बार जाते हुए देखा गया था। उस कॉलेज की सीसीटीवी की फुटेज तक नहीं ली गई और वहां काले रंग की स्कॉर्पियो गाड़ी के अंदर दो लोग कौन से इसका भी पता नहीं लगाया गया। कॉलेज मालिक की तरफ से बाद में सीसीटीवी फुटेज की डीवीआर सीबीआई को सौंपी गई, इसे भी सीबीआई ने नियमानुसार नहीं दर्ज किया। हर्ष मोहन की दलीलों पर सीबीआई पक्ष के अधिवक्ता की तरफ से अदालत में अपना पक्ष रखा।
उनका कहना था कि सीबीआई ने सही तरीके से जांच की है, इसमें किसी तरह की कोई चूक नहीं है। अदालत से भी कोई तथ्य सीबीआई ने नहीं छिपाया है। वहीं दूसरी तरफ मनीषा के पिता संजय के वकील हर्ष मोहन ने अदालत में कहा कि सीबीआई ने स्टेट पुलिस की रिपोर्ट को ही सही माना है जबकि अपनी जांच में कई गंभीर चूक की हैं। मनीषा मौत मामले में जो तथ्य सबके सामने आने चाहिए थे वे अभी तक उजागर नहीं हुए हैं। अदालत ने मनीषा मौत मामले में पिता की तरफ से दाखिल विरोध याचिका की सुनवाई में दोनों पक्षों की बहस के बाद 28 अक्तूबर तक फैसला सुरक्षित रखा है। इस मामले में 28 अक्तूबर को यह तय होगा कि सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट सही है या फिर इस मामले में आगे जांच होनी जरूरी है।