बहुचर्चित मनीषा मौत मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत में सोमवार को महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। सोमवार को मनीषा मौत मामले में मृतका के पिता संजय की तरफ से सीबीआई के पूर्व उप कानूनी सलाहकार एडवोकेट हर्ष मोहन सिंह ने अदालत में अपना जवाब दाखिल किया है। यह जवाब 14 अक्तूबर को मामले की अगली सुनवाई के बहस में रहेगा।
केंद्रीय जांच ब्यूरो इस मामले की गहन जांच कर रही है। मनीषा मौत मामला लंबे समय से सुर्खियों में रहा है। अदालत में दाखिल किए गए इस जवाब में एडवोकेट हर्ष मोहन सिंह ने मनीषा के पिता संजय का पक्ष रखा है। जवाब में जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत तथ्यों या आरोपों पर प्रतिक्रिया दी गई है। सोमवार को अधिवक्ता की तरफ से दाखिल जवाब के बाद अब विशेष अदालत ने 14 अक्तूबर को अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी है। अगली सुनवाई में इस जवाब पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। अदालत जवाब में दिए गए तर्कों और सबूतों पर विचार करेगी। इस जवाब से मामले की दिशा में बदलाव आ सकता है।
गांव ढाणी लक्ष्मण निवासी शिक्षिका मनीषा (19) के बहुचर्चित मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में आत्महत्या का निष्कर्ष निकाला है। यह निष्कर्ष दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बिल्कुल विपरीत है। एम्स की रिपोर्ट में मनीषा की मौत का कारण धारदार हथियार से लगीं चोटों को बताया गया है।
मनीषा के पिता संजय कुमार का कहना है कि परिवार सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है। इस निर्णय को सीबीआई की विशेष अदालत में चुनौति देते हुए जवाब दाखिल किया है। मनीषा 11 अगस्त 2025 की सुबह घर से निकलने के बाद लापता हो गई थी। उसका शव 13 अगस्त की सुबह दो दिन बाद सिंघानी गांव के समीप नहर के पास खेत में मिला था। शव से चेहरा, नाक की संरचनाएं, दोनों आंखों के सॉकेट और गर्दन गायब थी।