मुक्केबाज मनीष कौशिक के ओलंपिक क्वालीफाई करने पर उसके गांव देवसर में पिता सोमदत्त कौशिक को मिठा?
- फोटो : Bhiwani
एशिया ओसनिया ओलंपिक क्वालिफायर पुरुष वर्ग के 63 किलो भार वर्ग में भिवानी जिले के गांव देवसर के मुक्केबाज मनीष कौशिक ने जैसे ही ऑस्ट्रेलियाई मुक्केबाज गारसिंडे को 4-1 से हराया परिजन और ग्रामीण झूम उठे। इस जीत के साथ ही मनीष कौशिक ने भी ओलंपिक का टिकट पा लिया है। इस बार भारत के नौ मुक्केबाजों ने ओलंपिक क्वालिफाई किया है, जो रिकार्ड है। इससे पहले 2012 में सात मुक्केबाजों ने अपने मुक्कों के दम पर क्वालिफाई किया था और एक को वाइल्ड कार्ड एंट्री मिली थी। इस बार ओलंपिक में भिवानी के तीन मुक्केबाज विकास कृष्ण यादव, मनीष कौशिक और महिला वर्ग में पूजा बोहरा दम दिखाएंगी।
मनीष कौशिक ओलंपिक क्वालिफायर के 63 किलो भार वर्ग में सोमवार को हुए अपने मुकाबले में हार गए थे। लेकिन चार ही मुक्केबाजों को कोटा मिलने के कारण उन्हें एक और मौका मिला। जिससे में बुधवार को वे कामयाब रहे। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रमंडल खेलों के चैंपियन व दूसरी वरीयता प्राप्त मुक्केबाज गारसिंडे को 4-1 से हराया।
भिवानी के गांव देवसर में 23 वर्षीय मुक्केबाज मनीष कौशिक आर्मी में हैं और आर्मी की ओर से खेलते हैं। वे एशियन वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडलिस्ट है। मनीष कौशिक ने 2019 में हुई वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज, कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में सिल्वर मेडल हासिल कर चुका है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज शिवा थापा को हराकर नेशनल चैंपियन बने थे।
मनीष कौशिक के पिता सोमदत्त शर्मा ने बताया कि बेटे की जीत पर गर्व है। वह 11 साल से मेहनत कर रहा है। आठवीं कक्षा में उसने बॉक्सिंग के ग्लब्स पहने थे। उसके जुनून को देखते हुए हमने भी पूरा सहयोग किया। अब जाते समय भी देवसर माता और हमारे आशीर्वाद लेकर गया था। हमें पूरी उम्मीद है कि वह ओलंपिक में भी शानदार खेलेगा।
पढ़ाई के साथ खेल का बिठाया तालमेल
मनीष ने दसवीं तक की पढ़ाई गांव से ही की और इसके बाद 12वीं तक की पढ़ाई भिवानी शहर से की। गवर्नमेंट कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। वर्ष 2016 में वह भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर भर्ती हुआ और अपनी बॉक्सिंग को निखारने में जुटा रहा। वह सुबह चार बजे उठकर बॉक्सिंग का अभ्यास करने जाता, ताकि पढ़ाई और खेल में तालमेल बना सके। इसमें परिवार का भी खूब सहयोग मिला।