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Bhiwani News: पर्व ग्रहों की शुभ युति और शिव के सर्वार्थ सिद्धि योग में मनेगी आठ मार्च को महाशिवरात्रि

Wed, 21 Feb 2024 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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तोशाम। फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी पर आठ मार्च को महाशिवरात्रि मनाया जाएगा। इस बार यह पर्व ग्रहों की शुभ युति और शिव योग के सर्वार्थ सिद्धि योग में मनेगा। महाशिवरात्रि पर इस प्रकार के योग व ग्रह स्थिति 300 साल में एक या दो बार ही बनती है। इस दुर्लभ योग में भगवान शिव की पूजा शीघ्र फल प्रदान करने वाली मानी गई है।
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पंडित श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि योग, नक्षत्र व ग्रहों की इस स्थिति में भक्त अगर अपनी राशि के अनुसार पूजन करें, तो शीघ्र सफलता प्राप्त होगी। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि पर शुक्रवार के दिन श्रवण नक्षत्र उपरांत धनिष्ठा नक्षत्र, शिवयोग, गर करण तथा मकर, कुंभ राशि के चंद्रमा की साक्षी रहेगी। वहीं कुंभ राशि में सूर्य शनि बुध का युति संबंध रहेगा। इस प्रकार के योग तीन शताब्दी में एक या दो बार बनते हैं, जब नक्षत्र, योग और ग्रहों की स्थिति केंद्र त्रिकोण से संबंध रखती है। इस युति में जब कोई महापर्व आता है तो धर्म, सनातन व वैदिक परंपरा को विशेष रूप से आगे बढ़ने का अनुक्रम साधता है। इस दृष्टि से इस बार आने वाली महाशिवरात्रि विशेष रूप से पूजनीय है। इसी दौरान साधक, उपासक आराधक यथा श्रद्धा भक्ति अपने व्रत उपवास को वैदिक पौराणिक दृष्टिकोण से संपादित करेंगे। क्योंकि योगों की यह स्थिति बार-बार नहीं बनती।
श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि साधना-उपासना की दृष्टि शिवरात्रि विशेष महाशिवरात्रि पर व्रत अवश्य रखना चाहिए, दिनभर भगवान शिव के बीज मंत्र, एकाक्षी मंत्र या वैदिक मंत्रों का मानसिक जाप करना चाहिए। पुष्पार्चन, धान्यार्चन, रूद्राक्ष अर्चन आदि शिव सहस्त्रनामावली स्त्रोत पाठ के माध्यम से करना चाहिए। शिव की कृपा पाने का खास दिन वर्ष भर में आने वाली 12 शिवरात्रियों में यह महाशिवरात्रि है। अर्थात फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से युक्त यह शिवरात्रि महाशिवरात्रि की श्रेणी में आती है। इस दिन भगवान शिव की विशेष रूप से पूजा करनी चाहिए। इसमें पंचामृत अभिषेक, षोषोडशोपचार पूजन, अष्टाध्यायी लघु आदि के माध्यम से शिव को प्रसन्न किया जा सकता है।
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सर्वार्थ सिद्धि योग का लाभ व कार्य सिद्धि के लिए शुभ

श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि महाशिवरात्रि पर स्वार्थ सिद्धि योग में पूजा करने व वृत रखने से परम सिद्धि मिलती है। सर्वार्थ सिद्धि योग धन लाभ और कार्यसिद्धि के लिए विशेष शुभ माना जाता है। उन्होंने बताया कि इस शुभ योग में कोई भी नया कार्य, बिजनेस या फिर नौकरी में नई शुरूआत करना फलदायी माना जाता है।
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राशि अनुसार इस प्रकार करें पूजन

पंडित श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि राशि अनुसार पूजन करें।

मेष:- रक्त चंदन का त्रिपुंड लगाएं, लाल कनेर का पुष्प चढ़ाकर शिवाष्टक पढ़ें।

वृषभ:-सफेद चंदन का त्रिपुंड लगाकर सफेद सुगंधित पुष्प चढ़ाएं रूद्राष्टक का पाठ करें।

मिथुन:- भस्म का त्रिपुंड लगाकर सफेद आंकड़े के सात पुष्प चढ़ाएं शिव स्त्रोत का पाठ करें।

कर्क:- सफेद चंदन का त्रिपुंड लगाएं तथा शिव सहस्त्र नामावली का पाठ करें।

सिंह:- पीले चंदन का त्रिपुंड लगाएं तथा शिव महिमा स्त्रोत का पाठ करें।

कन्या:- अबीर का त्रिपुंड लगाएं और शिव चालीसा का पाठ करें।

तुला:- सफेद चंदन का त्रिपुंड लगाएं, सात सुगंधित सफेद पुष्प चढ़ाएं तथा अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ।

वृश्चिक:- लाल चंदन का त्रिपुंड लगाएं, लाल कनेर के सात पुष्प चढ़ाएं तथा शिवाष्टक का पाठ करें।

धनु:- पीले चंदन का त्रिपुंड लगाएं, पीले पुष्प चढ़ाएं, महामृत्युंजय पाठ करें।

मकर व कुंभ:- राशि वाले भस्क का त्रिपुंड लगाएं, अपराजिता के फूल चढ़ाएं तथा महामृत्युंजय कवच का पाठ करें।

मीन:- पीले चंदन का त्रिपुंड लगाएं, पीले पुष्प अर्पित करें तथा 12 अमोघ शिव कवच का पाठ करें।
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