भिवानी। कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलनरत किसानों ने वीरवार को लघु सचिवालय के बाहर, कितलाना टोल प्लाजा पर और अन्य धरनास्थलों पर संपत्ति क्षति वसूली कानून की प्रतियां फूंककर रोष जताया। किसान नेताओं ने कहा कि हरियाणा सरकार ने विधानसभा सत्र में संपत्ति क्षति वसूली विधेयक पेश करके उसे कानून का दर्जा महज किसान आंदोलन को दबाने के उद्देश्य से दिया है, लेकिन सरकार अपने मकसद में कतई कामयाब नहीं होगी।
प्रतियां जलाते हुए किसान नेताओं ने कहा कि कोरोना काल में भी देश की गिरती अर्थव्यवस्था को किसानों ने ही संभाला था। ऐसे में जब आंदोलन अपनी चरम सीमा पर है, उस समय ये कानून बनाने से प्रदेश सरकार की किसानों के प्रति उनकी सोच उजागर हो गई है। केंद्र और हरियाणा की सरकार जनता के हौसले को तोड़ने का असफल प्रयास कर रही हैं। कितलाना टोल पर चल रहे धरने के 105वें दिन खाप सांगवान 40 के सचिव नरसिंह डीपीई, बिजेंद्र बेरला, मास्टर शेर सिंह, गंगाराम श्योराण, रत्तन जिंदल, राजसिंह जताई, राजेश कुमारी, बीरमति डोहकी, बिमला, अनोखी मंदोली ने संयुक्त रूप से अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि संपत्ति क्षति वसूली कानून के अंतर्गत पुलिस के हाथों में शक्ति का केंद्रीकरण कर दिया गया है। पुलिस इस कानून के तहत जांच एजेंसी के साथ शिकायतकर्ता भी है, जो न्याय के बुनियादी उसूलों के खिलाफ है। इस कानून से आम जनता में भारी रोष है। मंच संचालन कामरेड ओमप्रकाश ने किया। इस अवसर पर बलबीर बजाड़, सूरजभान सांगवान, राजू मान, धर्मेन्द्र छपार, दिलबाग ग्रेवाल, रणधीर घिकाड़ा, कमलेश भैरवी, कृष्ण फौगाट, अजित सिंह सांगवान, प्रोफेसर राजेन्द्र डोहकी, मंगल सुई, राजकुमार हड़ौदी, जगदीश हुई, कंवर झोझू, नत्थूराम शर्मा, रामफल देशवाल, जागेराम डीपीई, परमजीत फतेहगढ़, महीपाल आर्य, कप्तान चंदन सिंह, भूपेंद्र पूर्व सरपंच चरखी, ईश्वर, महेंद्र प्रजापति, सूबेदार सत्यवीर आदि मौजूद थे।