भिवानी। अब यमुना में 15 हजार क्यूसेक पानी से नहरों का जलस्तर काफी बेहतर होगा। प्रदेश में सिंचाई विभाग के नहरी पानी के पांच ग्रुपों में भी जल संकट दूर होगा। सिंचाई विभाग ने यमुना में कम पानी की वजह से प्रदेशभर में नहरी पानी के शेड्यूल को पांच ग्रुपों में बांट दिया है। जिसमें आठ दिन प्रत्येक ग्रुप को नहरी पानी मिलेगा और 32 दिन तक नहर बंद रहेगी।
पहले ये चार ग्रुप थे, जिसमें आठ दिन पानी मिलने के बाद 24 दिन नहरें बंद रहती थी। वेस्ट यमुना से उत्तर और दक्षिण हरियाणा के अधिकांश जिले जुड़े हैं, जिनमें पेयजल और सिंचाई की जरूरतें यमुना के पानी से ही पूरी होती हैं।
सिंचाई विभाग के नहरी पानी शेड्यूल के हिसाब से पांच ग्रुप बने हैं। जिनमें पहला ग्रुप सुंदर सिस्टम एवं नंगला है। दूसरा भालोठ के साथ सिरसा, तीसरा ग्रुप जवाहरलाल नेहरू कैनाल व हावड़ी और चौथा ग्रुप जवाहरलाल कैनाल के साथ मारकंडा है। पांचवां ग्रुप बुटाना के साथ जनसूई है। फिलहाल सिंचाई विभाग के शेड्यूल के हिसाब से सुंदर व नंगल ग्रुप में 26 फरवरी से पानी चला हुआ है। जिसकी सात मार्च तक टर्न है। लेकिन यमुना का जलस्तर कम होने की वजह से चौथे दिन भी सुंदर सब ब्रांच नहर बंद पड़ी है। जबकि कम पानी के चलते जूई और मित्ताथल फीडर ही चल रही हैं। लेकिन अब यमुना का जल स्तर बारिश के बाद अचानक बढ़ा है। जिससे नहरी पानी की स्थिति बेहतर होने के आसार हैं।
हेड से ही तय हो रही है नहरों में पानी की स्थिति : यमुना के जल को इस तरह से विभाजित किया है कि हेड पर पानी से ही प्रत्येक ग्रुप की नहरों में पानी की स्थिति का अंदाजा हो जाता है। अगर यमुना में पानी कम है तो हेड पर भी डिमांड से कम पानी आता है। जिसका वितरण भी फिर ग्रुप की सभी नहरों में अधिकारियों को अपने हिसाब से ही करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में कम पानी के चलते टेल तक लगने वाले गांवों में पानी नहीं पहुंच पाता है। यही वजह है कि भिवानी जिले की जीवनरेखा सुंदर सिस्टम की नहरें सुंदर सब ब्रांच, जूई फीडर व मित्ताथल फीडर में इस समय बेहद कम पानी पहुंचा है।
दो सर्कलों में बंटा है भिवानी जिला, उठान सिंचाई परियोजना से जुड़ा रेतीला इलाका : राजस्थान की सीमांत भिवानी जिला सिंचाई विभाग के दो सर्कलों में बंटा है। यमुना जल सेवाएं परिमंडल और लोहारू उठान सिंचाई परिमंडल शामिल हैं। लोहारू उठान सिंचाई परिमंडल में ज्यादातर नहरों के अंदर उठान सिंचाई प्रणाली से पानी ऊंचे रेतीले टीलों तक पहुंचाया जा रहा है। जिसके लिए जूई नहर और बौंद वाटर डिविजन का इलाका शामिल है। इनमें नहरों के बीच में ही बड़ी मोटरें लगाकर पानी आगे धकेला जाता है।