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2019 में जेजेपी ने जनता को दिया धोखा, 2024 में कांग्रेस ने किया छल : अभय चौटाला

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तोशाम (भिवानी) । इनेलो के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अभय सिंह चौटाला ने शनिवार को तोशाम में कहा कि 2019 में जेजेपी ने जनता के साथ विश्वासघात किया जबकि 2024 में कांग्रेस ने छल किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता दोनों दलों के राजनीतिक रवैये को समझ चुकी है और आने वाले समय में इसका जवाब देगी। चौटाला 27 सितंबर को नूंह में प्रस्तावित सम्मान दिवस रैली का निमंत्रण देने तोशाम पहुंचे थे।
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इस दौरान इनेलो प्रदेशाध्यक्ष रामपाल माजरा, सुनील लाम्बा, अशोक ढाणीमाहू, किसान प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष अजीत बडेसरा, युवा जिलाध्यक्ष संदीप घणघस, बिजेंद्र सागवनिया, सोनू दूहन सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे। चौटाला ने भाजपा, कांग्रेस और जेजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता 2019 और 2024 के विधानसभा चुनावों के अनुभव को भूली नहीं है।
उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार पर भी चुनावी वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया। कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी ने दो करोड़ रोजगार देने, विदेशों से काला धन वापस लाने और लोगों के खातों में 15-15 लाख रुपये जमा करवाने जैसे वादे किए थे लेकिन उनके अनुसार प्रमुख वादे पूरे नहीं हुए।
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हुड्डा पर भाजपा के साथ राजनीतिक समझौते का आरोप
अभय चौटाला ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर आरोप लगाया कि 2024 के विधानसभा चुनाव में जनता भाजपा से छुटकारा चाहती थी लेकिन हुड्डा ने भाजपा की टीम के रूप में काम कर उसे फायदा पहुंचाया। उन्होंने राजनीतिक दबाव, जांच एजेंसियों की कार्रवाई, कथित छापों और अमित शाह से मुलाकात का जिक्र करते हुए इन घटनाओं को भाजपा और हुड्डा के बीच राजनीतिक तालमेल से जोड़कर देखा। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की ओर से सिटिंग विधायकों को टिकट दिए जाने की बात के बाद कांग्रेस में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हुईं। राहुल गांधी से टिकटों की घोषणा करवाने के अगले दिन मनोहर लाल के सरकार बनाने संबंधी बयान का हवाला देते हुए उन्होंने इसे भाजपा के इशारे पर हुई राजनीति बताया।
चौटाला ने इस वर्ष मार्च में राज्यसभा सीट के लिए हुए चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के क्रॉस वोट और रद्द हुए वोटों से चुनाव का समीकरण प्रभावित हुआ और कर्मवीर बौद्ध एक वोट के अंतर से जीत गए। उनका दावा था कि भाजपा के एक विधायक का वोट रद्द नहीं होता तो परिणाम अलग हो सकता था। उन्होंने भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सार्वजनिक मंच पर बहस की चुनौती देते हुए कहा कि मौका मिलने पर वह जनता के सामने पूरे मामले की तस्वीर साफ कर देंगे।
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