लोहारू की अनाज मंडी में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के प्रतिभागी।
लोहारू। एसडीएम मनोज दलाल ने कहा कि प्राचीन काल में विश्व के युवा अध्यात्म और संस्कृति की शिक्षा लेने के लिए भारत में आया करते थे। सभ्यता, संस्कृति और अध्यात्म की शिक्षा के लिए नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय युवाओं को शिक्षा देते थे। भारतीय संस्कृति को संजो कर रखना हमारा नैतिक दायित्व है।
एचडीएम मनोज दलाल शुक्रवार को संस्कृति मंत्रालय के उत्तर मध्य क्षेत्र संस्कृति केंद्र प्रयागराज व जिला प्रशासन के संयुक्त आयोजन में लोहारू की अनाज मंडी में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। भारतवर्ष की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षण एवं संवर्धन प्रदान करने के उद्देश्य से कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, असम, हरियाणा आदि प्रदेशों के कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में राजस्थान के बाराबंकी के कलाकारों ने चाकरी और घूमर नृत्य और पौड़ी गढ़वाल उत्तराखंड से आए कलाकारों ने चौमासा नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं असम के कलाकारों ने बिहू नृत्य, सागर के कलाकारों ने बढ़ाई नृत्य और छत्तीसगढ़ के कलाकारों ने सुआ नृत्य प्रस्तुत किया।
मोहित और उसकी टीम ने काली स्वांग प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में गोहाना से आए नरेन संगी व पूनम ने रागनी प्रस्तुत कर दर्शकों का मनोरंजन किया। इस अवसर पर श्याम सुंदर सांगवान सहित लोहारू के अनेक नागरिक व दर्शक उपस्थित रहे।