भिवानी। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की सदस्य दिव्या गुप्ता ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोग के निर्देशों के अनुपालन का जायजा लिया। इस दौरान एडीसी हर्षित कुमार ने बताया कि आयोग के सभी निर्देशों का अनुपालन किया जा रहा है। जिले में चार पंजीकृत संस्थाएं कार्यरत हैं। इनमें दो बाल देखभाल गृह और दो मुक्त आश्रय गृह शामिल हैं। इसके तहत अपंजीकृत संस्थाओं में अनाथ, यतीम और जरूरतमंद बच्चों को रखना गैर कानूनी है। यह किशोर न्याय अधिनियम 2015 का उल्लंघन है।
एडीसी ने कहा कि जिले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के निर्देशों का अनुपालन किया जा रहा है। अगर कोई अपंजीकृत सामाजिक संस्था अनाथ और यतीम बच्चों को रख रही है तो इसकी सूचना तुरंत प्रशासन को दें। सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि बच्चों के अधिकारों को सुरक्षित रखने में प्रशासन को अपना भरपूर सहयोग दें। ऐसा करके नादान मासूम बच्चों के साथ हो रहे अन्याय और दुर्व्यवहार को रोका जा सकता है।
एडीसी ने बताया कि भिवानी जिले में यदि कोई ऐसा यतीमखाना अथवा संस्था जोकि किशोर न्याय अधिनियम 2015 के तहत बिना पंजीकरण के चल रही है तो किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 42 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बिना पंजीकरण के चल रही संस्था की सूचना लोग प्रशासन को दे सकते हैं। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जिला संरक्षण अधिकारी किरण देवी और संरक्षण अधिकारी गैर संस्थागत संदीप कुमार भी मौजूद रहे।