भिवानी। कोरोना की तीसरी लहर को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह तैयार है। अंदेशे के अनुसार अगर तीसरी लहर में बच्चे प्रभावित होते हैं तो उसके लिए पुख्ता प्रबंध किए जाएंगे। जिला अस्पताल में एक बाल रोग विशेषज्ञ है और एक अन्य की जरूरत है। बच्चों के स्पेशल वार्ड में वेंटिलेटर की व्यवस्था भी है। जल्द ऑक्सीजन प्लांट शुरू हो जाएगा तो ऑक्सीजन की कमी नहीं रहेगी और सिलिंडरों की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह बात उपायुक्त जयबीर सिंह ने खास बातचीत में कही।
डीसी ने कहा कि चिकित्सकों को निर्देश दिए गए हैं कि वो बच्चों के स्वास्थ्य पर कड़ी नजर रखें। अगर कोई बच्चा बीमार होता है तो पूरी एहतियात बरती जाए। लोगों को जागरूक किया जाएगा कि बच्चों के आस-पास सफाई रखें। उन्हें ज्यादा बाहर घूमने के लिए न जाने दें। इसके अलावा सरकार और विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों पर भी काम किया जाएगा। (संवाद)
12 लाख की आबादी में 21881 हुए संक्रमित
जिले की करीब 12 लाख की आबादी है, जिसमें ढाई लाख शहरी और साढ़े नौ लाख आबादी ग्रामीण क्षेत्र से है। स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में अब तक कोरोना संक्रमण के 21881 पॉजिटिव केस सामने आए हैं, इनमें से 20252 ठीक हो गए। वहीं कोरोना संक्रमण से 563 की मौत हो गई। जिले में फिलहाल कोरोना संक्रमण के 1066 सक्रिय केस हैं। इनमें 250 शहरी और 816 ग्रामीण क्षेत्र से हैं। इसके अलावा 583 की रिपोर्ट लंबित है।
सब संसाधन झोंककर कोरोना संक्रमण पर काबू पाया
कोरोना को काबू में करने के लिए जिला प्रशासन ने अपना हर संसाधन लगा दिया, चाहे औद्योगिक क्षेत्र के ऑक्सीजन सिलिंडर हों या फिर पुलिस और प्रशासन की गाड़ियों को एंबुुलेंस में बदलना हो, सभी प्रयास जिला प्रशासन द्वारा किए गए। इसके अलावा फ्रंट लाइन वर्कर्स का सबसे पहले टीकाकरण किया गया। उसके बाद बाकी जिलेवासियों को टीका लगाया जा रहा है। प्रशासन द्वारा जिले में टीकाकरण अभियान को तेज किया गया। लोगों को टीका लगवाने और जांच करवाने के लिए जागरूक किया गया। तब जाकर जिले में हालातों पर काबू पाया जा सका है।
284 टीम फील्ड में उतारी
उपायुक्त जयबीर सिंह ने बताया कि लोगों की स्क्रीनिंग करने के लिए जिले में 284 टीम फील्ड में उतारी गई। इनमें आशा वर्कर्स, आंगनबाड़ी वर्कर्स, अध्यापक और अन्य विभागों के कर्मचारी शामिल हैं। ये टीम घर-घर जाकर लोगों की स्थिति जान रही है। जो भी संदिग्ध दिखता है, उसकी जांच कराई जाती है। जो संक्रमित मिलता है उसे उपचार दिया जाता है।
जिले को 18 जोन में बांटा
उपायुक्त ने बताया कि मई की शुरुआत में जब हालात काबू से बाहर होते दिखे तो उन्होंने जिले को 18 जोन में बांट दिया। हर जोन में एक नोडल अधिकारी को नियुक्त किया गया। नोडल अधिकारियों ने लगातार हालात पर नजर रखी और आवश्यक कदम उठाए। उसका फायदा यह हुआ कि बहुत जल्द जिले की स्थिति में सुधार हुआ। अब जिले की संक्रमण दर केवल 7 प्रतिशत है और रिकवरी दर 93 प्रतिशत पहुंच गई है।
चिकित्सकों और सिलिंडरों की कमी आई थी आड़े
जिला प्रशासन के बाद मरीजों के उपचार के लिए सभी संसाधन थे, मगर ऑक्सीजन सिलिंडर और चिकित्सकों की कमी खल रही थी। ऐसे में उद्योगों से सिलिंडर लिए गए और निजी अस्पतालों के चिकित्सकों की ड्यूटी कोरोना मरीजों के उपचार में लगाई गई।
अपने स्तर पर लिया माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाने का फैसला
डीसी ने बताया कि जिस क्षेत्र में कोरोना मरीजों की संख्या ज्यादा होती है, उस क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन बना दिया जाता था। मगर जिला प्रशासन ने अपने स्तर पर फैसला लेते हुए माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाए। इससे शहरवासियों को कम परेशानियों का सामना करना पड़ा।
ऑक्सीजन सिलिंडर की किल्लत नहीं भूल सकता
डीसी जयबीर सिंह आर्य ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर में मरीजों को ऑक्सीजन की कमी होने लगी। जिले में जब यह समस्या आई तो थोड़ी घबराहट भी हुई पर हौसला और धैर्य रखा। अधिकारियों के साथ चर्चा की और उद्योगों से सिलिंडर लेने का फैसला किया। हां, मगर उस समय जो महसूस हुआ उसे मैं जीवनभर नहीं भूल पाऊंगा।
तीन दिन में हो जाएगी पूरे जिले की स्क्रीनिंग
डीसी ने बताया कि जिले में स्क्रीनिंग का काम जोरों पर चल रहा है। हर गांव और हर घर में जाकर लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है। नगर परिषद भिवानी और नगर पालिका सिवानी में स्क्रीनिंग का काम पूरा जो चुका है, जबकि लोहारू और बवानीखेड़ा में तीन दिन में स्क्रीनिंग कार्य पूरा हो जाएगा।
दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग से सुविधा
आर्य ने कहा कि कोई भी व्यक्ति टीकाकरण से न छूटे ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं। जिले में 33 टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं। जो दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिक टीकाकरण केंद्र तक नहीं जा सकते, उन्हें प्रशासन की गाड़ी घर से केंद्र तक लेकर जाएगी। इसके लिए 20 गाड़ियां लगाई गई हैं।
चिकित्सा सुविधाओं को सुधारा
डीसी ने कहा कि कोरोना संक्रमण काल के दौरान जिला प्रशासन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि जिले में चिकित्सा सुविधाओं में काफी सुधार किया गया है। यह सुधार बहुत कम समय में किया गया है। जिला सामान्य अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाया जा रहा है। अस्पताल में वेंटिलेटर और ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर लाए गए हैं।