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एक साल के बच्चे के सिर से उठा पिता का साया

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भिवानी। बलियाली गांव निवासी प्रवीण कुमार की 17 मई को कोरोना के कारण मौत हो गई। प्रवीण के पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। प्रवीण परिवार में इकलौता कमाने वाला था। अब परिवार में केवल प्रवीन की पत्नी शीतल, मां रोशनी देवी और एक साल का बेटा विनय रह गए हैं। वह मजदूरी करता था, मगर परिवार का पेट पाल रहा था। अब परिवार के सामने दो वक्त की रोटी का भी संकट खड़ा हो गया है।
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बलियाली निवासी अरविंद कुमार ने बताया कि उसके भाई प्रवीण को कोरोना संक्रमण के चलते 9 मई को हिसार के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पास में रुपये न होने के कारण कर्ज लिया। मगर 17 मई को प्रवीण की मौत हो गई। अब कर्ज देने वाले लोग रुपये मांग रहे हैं। कर्ज भी सिर पर हो गया और भाई भी नहीं बचा। दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
फरवरी 2019 में हुई थी शादी
प्रवीण की शादी दो साल पहले फरवरी 2019 में हुई थी। उसका एक साल का बेटा है। बेटा अभी समझ ही नहीं पा रहा है कि उसके जीवन में क्या हादसा हो गया है। अब परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है। घर का गुजारा कैसे चलेगा यह सोचकर सब परेशान हैं।
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सरकार से मदद की उम्मीद
शीतल ने कहा कि मैं ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं हूं। इसलिए कोई ढंग की नौकरी नहीं कर सकती हूं। अब तो सरकार से ही उम्मीद है कि वो मुझे कोई नौकरी प्रदान करे या आर्थिक सहायता प्रदान करे, ताकि परिवार का गुजारा चल सके। उन्होंने कहा कि अभी तो बेटा छोटा है, मगर दो-तीन साल बाद उसे स्कूल भी भेजना होगा। अगर कोई रोजगार ही नहीं हुआ तो उसके लिए फीस कहां से जुटा पाऊंगी।
हर रोज बहते हैं आंसू
शीतल ने बताया कि हालात पर उनका कोई जोर नहीं चलता है। मगर प्रवीण को याद करके हर रोज परिवार की आंखों से आंसू बहते हैं। प्रवीण के जाने से हालात बहुत खराब हो गए हैं। वही एक कमाने वाला था। अब घर का गुजारा चलाने के लिए भी दूसरों का मुंह ताकना होगा। सरकार को हमारी मदद करनी चाहिए।
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