इंश्योरेंस के अभाव में भिवानी डिपो की 28 रोडवेज बसों के पहिये थम गए हैं और फिलहाल ये बसें रोडवेज कर्मशाला में पिछले तीन माह से खड़ी हैं। इतना ही नहीं 33 बसें कंडम हो चुकी हैं। बसों के वर्कशॉप में खड़ा होने का सीधा असर बस सेवा पर हुआ है और अनेक लंबे रूटों के साथ-साथ ग्रामीण रूटों पर भी बस सेवा बंद हो गई है।
हालांकि बस सेवाएं बंद होने को कोरोना संक्रमण से भी जोड़कर देखा जा रहा है मगर इतनी बड़ी संख्या में बसें वर्कशॉप में खड़े होना भी एक बड़ा कारण है। कर्मचारियों की माने तो अधिकारी चलाने के लिए दबाव बना रहे हैं मगर बिना इंश्योरेंस वे कैसे बसें चला सकते हैं। रोडवेज विभाग के अधिकारियों की माने तो इस बारे में परिवहन मुख्यालय को कई बार पत्र लिखकर इंश्योरेंस बजट की मांग कर चुके हैं, लेकिन मामला वित्त विभाग में मंजूरी को लेकर अटका हुआ है। डिपो की 14 बसें तो कबाड़ में ऑक्सन होने के इंतजार में खड़ी हैं।
भिवानी डिपो में 175 बसों का नॉर्म निर्धारित किया हुआ है। लेकिन फिलहाल डिपो के पास 166 रोडवेज बसें है। इनमें 28 रोडवेज बसें लॉकडाउन से पहले ही बिना इंश्योरेंस के रोडवेज कर्मशाला में पिछले तीन माह से खड़ी हैं। जबकि 33 बसें कंडम हो चुकी हैं। इनमें से 14 रोडवेज बसें तो चल भी नहीं सकती, जिन्हें अधिकारी ऑक्सन कराने की तैयारी कर चुके हैं। केवल 105 बसें ही रूटों पर दौड़ने लायक हैं। इनमें भी अधिकांश बसों को रोडवेज विभाग में चलते छह साल से अधिक का समय बीत चुका है। हर साल रोडवेज विभाग बसों का इंश्योरेंस कराता है। जिसके लिए अलग से बजट की मंजूरी वित्त विभाग से लेना अनिवार्य है। लेकिन लॉकडाउन की वजह से अधिकारियों ने कई बार परिवहन निदेशालय के साथ पत्राचार किया और बजट की मांग की, मगर मामला वित्त विभाग के समक्ष मंजूरी को लेकर लटक गया।
नहीं चल रही बसें, लोग परेशान
लंबी दूरी के अलावा अनेक लोकल रूटों पर भी लोग बस सेवा के लिए परेशान है। मजबूरी में प्राइवेट वाहनों में सफर करने को मजबूर है। लोकल रूटों पर इक्का-दुक्का बसें ही चल रही हैं। इनमें सबसे अधिक प्रभावित होने वाले रूट भिवानी से महम, भिवानी से चरखी दादरी, भिवानी से रोहतक, भिवानी से लोहारू व लंबी दूरी के अधिकांश रूट बंद पड़े हैं, जिनमें दिल्ली, चंडीगढ़, अजमेर, देहरादून, हरिद्वार शामिल हैं।
2019 में आई थी पांच नई बसें, 33 हो गई कंडम
भिवानी परिवहन बेड़े में वर्ष 2019 में सिर्फ पांच नई बसें आई थी। जबकि 33 बसें कंडम घोषित हो गई। इसी तरह हाल ही में पांच नई मिनी बसें भी शामिल हुई हैं। लेकिन अधिकांश बसें कंडम होने से लगातार परिवहन बेड़ा सिमट कर छोटा होता जा रहा है, जिससे यात्री सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
यूं खड़ी हुई बिना इंश्योरेंस रोडवेज बसें
अप्रैल माह छह बसें खड़ी हुई
मई माह छह बसें खड़ी हुई
जून माह 16 रोडवेज बसें बिना इंश्योरेंस खड़ी हो गई
वर्जन-
अप्रैल माह से रोडवेज बसों का इंश्योरेंस बकाया चल रहा है। इस संबंध में परिवहन निदेशालय के साथ लगातार पत्राचार किया जा रहा है। बसों के इंश्योरेंस के लिए वित्त विभाग से बजट आना है। इसी के बाद इन बसों का इंश्योरेंस होगा और फिर इनका संचालन संभव हो पाएगा।
- भरत सिंह परमार, जिला यातायात प्रबंधक भिवानी डिपो।