भिवानी। जिले में लगातार बढ़ रही उमस भरी गर्मी लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही है। सरकारी और निजी अस्पतालों में संक्रमण से पीड़ित मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में जहां पहले 800 से 900 मरीज प्रतिदिन आते थे, अब यह आंकड़ा बढ़कर 1200 से 1400 तक पहुंच गया है।
चिकित्सकों के अनुसार, गले, नाक, कान और त्वचा से जुड़ी बीमारियों में सबसे अधिक इजाफा देखा जा रहा है। इसके अलावा बुखार और सांस लेने में दिक्कत जैसी शिकायतें भी आम हो गई हैं।
ईएनटी विभाग में रोज आ रहे 150 मरीज, बच्चों और युवाओं की संख्या ज्यादा
पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज के कान, नाक और गला रोग विशेषज्ञ डॉ. शुभम महता ने बताया कि इन दिनों ईएनटी विभाग में प्रतिदिन 120 से 150 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। इनमें से अधिकतर मरीज बच्चे और युवा हैं। उन्होंने बताया कि गर्मी और धूल के चलते गले में सूखापन, खराश, नाक सूखना, पपड़ी जमना और निकालने पर खून आना जैसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं। इसके अलावा कान में खुजली, फंगल इंफेक्शन, तेज दर्द और भारीपन की शिकायतें भी आम हो गई हैं।
बिना सलाह दवाएं न लें, नहरों में नहाने से परहेज करें
डॉ. महता ने कहा कि इस मौसम में लोग सावधानी बरतें। धूप और धूल से बचाव करें, बाहर निकलने पर नाक और कान को कपड़े या तौलिए से अच्छी तरह ढकें। गले में परेशानी होने पर गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारे करें। कान में किसी भी नुकीली वस्तु का प्रयोग न करें और बिना चिकित्सक की सलाह के कोई भी दवा या नेजल ड्रॉप का प्रयोग न करें। उन्होंने विशेष रूप से चेताया कि गर्मी से राहत पाने के लिए लोग स्वीमिंग पूल, वाटर पार्क और नहरों में नहाना पसंद कर रहे हैं, लेकिन इन जगहों का गंदा पानी कान में चला जाता है, जिससे फंगल इंफेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके चलते मरीजों में बुखार, तेज दर्द, बहना और सुनाई देने में परेशानी जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं।
ओपीडी में प्रतिदिन 120 से 150 मरीज आ रहे हैं। कान में संक्रमण, खुजली और दर्द के मामले बढ़ रहे हैं। गले में सूजन और खराश के मरीज भी लगातार आ रहे हैं। ऐसे में खुद इलाज न करें और जल्द डॉक्टर से परामर्श लें।
— डॉ. शुभम महता, ईएनटी रोग विशेषज्ञ, राजकीय मेडिकल कॉलेज, भिवानी