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Bhiwani News: 50 साल का हुआ हमारा भिवानी, मुक्केबाजों ने विदेशों तक बनाई पहचान

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भिवानी शहर के बढ़ रहे दायरे की ड्रोन से ली गई तस्वीर। - फोटो : Bhiwani
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भिवानी। म्हारी भ्याणी अब 50 की होग्यी। अंतरराष्ट्रीय फलक पर प्रहरियों और खिलाड़ियों की खान है अपना जिला। विकास की नई ऊंचाइयों को छूने के लिए बेताब है। जिला एक लाख की आबादी के साथ 22 दिसंबर 1972 को हिसार जिले से अलग होकर अस्तित्व में आया था। समय के साथ कदमताल करते हुए विकास की चाह में अब चरखी दादरी भी भिवानी से अलग होकर जिला बन गया है। अब भिवानी जिले में करीब साढ़े 12 लाख की आबादी के मुकाबले विकास और सुविधाएं काफी बढ़ी हैं।
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भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार भिवानी जिले की मिट्टी में खास बात है। क्योंकि सीमाओं पर रक्षा करने वाले सैनिकों के साथ ही अंतरराष्ट्रीय खेल मैदान में दम दिखाने वाले मुक्केबाज, पहलवान सहित अनेक खिलाड़ी देश को दिए हैं। इनकी वजह से ही खेल जगत में भिवानी को मिनी क्यूबा के नाम से जाना जाता है। धार्मिक आस्था से जुड़ी भिवानी छोटी काशी के नाम से भी विख्यात है। यहां की बेटियां फुटबाल में भी विश्वस्तर पर भिवानी को मिनी ब्राजील की पहचान दिला चुकी हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि पर भी भिवानी प्रदेश की राजनीति का गढ़ माना जाता है। जिले के गांव गोलागढ़ निवासी चौ. बंसीलाल ने मुख्यमंत्री बनकर प्रदेश में सत्ता की बागडोर संभाल विकास की नई राह प्रशस्त की। भिवानी के गांव मानहेरू के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बनारसीदास गुप्ता ने भी मुख्यमंत्री बनकर भिवानी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। भिवानी के ही महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित नेकीराम शर्मा ने देश की आजादी के आंदोलन में अहम योगदान निभाया। जिले से करीब 30 हजार सैनिक भी हैं और 50 हजार पूर्व सैनिक व सैन्य अधिकारी भिवानी से रहे हैं।
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ऐसे पड़ा भानी से भिवानी नाम
कहा जाता है कि नीम सिंह नाम का एक जाटू राजपूत वर्तमान भिवानी नगर के समीप गांव कोंट में बसने के लिए आया था। नीम का वहां के निवासियों ने विरोध किया और उसको मारने का षड्यंत्र रचा। नीम को एक महिला, जिसका नाम भानी था, उसने इस षड्यंत्र के प्रति आगाह किया। बाद में नीम सिंह ने भानी से शादी कर ली। उसने अपनी पत्नी के नाम पर एक नगर बसाया, जिसका नाम भानी रखा गया, जो अब भिवानी के नाम से विख्यात है।
1810 में झज्जर के नवाब के नियंत्रण में था भिवानी
19वीं शताब्दी के आरंभ में भिवानी दादरी परगना का महत्वपूर्ण गांव था, जोकि नवाब झज्जर के नियंत्रण में था। सन 1810 ई. में जब अंग्रेजों ने इसे अपने अधिकार में लिया, तब भिवानी को नगर का दर्जा प्राप्त हुआ। अंग्रेजों के शासनकाल में इसे और महत्व प्राप्त हुआ, जब 1817 ई. में इस स्थान को मंडी के लिए चुन लिया गया। भिवानी का वर्णन आइन-ए-अकबरी में भी मिलता है।
ये थे भिवानी के 12 गेट
पुराना भिवानी शहर एक चहारदीवारी से घिरा हुआ था। शहर के हांसी गेट, घंटाघर गेट, दिनोद गेट, देवसर गेट, हालुवास गेट, पतराम गेट, हनुमान गेट, दादरी गेट, बावडी गेट, रोहतक गेट, महम गेट आदि इसके 12 दरवाजे थे, जिससे पूरा शहर सुरक्षित था। शहर में पुरातन शैली की हवेलियां आज भी मौजूद हैं। इनकी दीवारों पर सुंदर चित्रकारी की हुई है। देश विभाजन से पहले भिवानी पंजाब का महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र था। औद्योगिक, शैक्षणिक व व्यापारिक दृष्टि से विकसित होने के साथ-साथ भिवानी शहर में धार्मिक स्थलों, धर्मशालाओं व मंदिरों का भी निर्माण हुआ, जो कि यहां के निवासियों की आस्था के केंद्र बिंदु माने जाते हैं। शहर में छोटे-बड़े करीब 300 मंदिर हैं, इस कारण भिवानी का नाम छोटी काशी भी प्रचलित है।
भिवानी को औद्योगिक सेक्टर बनने का इंतजार
जिले में करीब 250 लघु औद्योगिक इकाईयां हैं। इसमें बड़ा कपड़ा उद्योग भी है। जिला बनने के बाद दो बड़े कपड़ा उद्योग दम तोड़ चुके हैं। इसके बाद भिवानी में कोई भी बड़ा उद्योग स्थापित नहीं हुआ है। सीएम मनोहर लाल ने भिवानी में औद्योगिक सेक्टर बनाने की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक उसका इंतजार है। ज्यादातर लघु उद्योग प्लास्टिक दाना या फिर सर्जिकल उपकरण बनाने से जुड़े हैं।
मिल्क प्लांट चिलिंग प्लांट में सिमटा
भिवानी के हांसी रोड पर मिल्क प्लांट को करीब एक दशक पहले चिलिंग प्लांट में समेट दिया गया। इससे आसपास की करीब 350 दुग्ध समितियां जुड़ी हैं। जिले को फिर से मिल्क प्लांट व स्वीट्स अब बनाने की घोषणा थी, मगर अभी तक जिले की ये उम्मीद भी अधूरी है। मिल्क प्लांट व स्वीट्स हब बनता है तो रोजगार भी बढ़ेगा और दुग्ध उत्पादन भी ज्यादा होगा।
जिले को मिला पीजीआई
जिले को नया पीजीआई मिला है, जिसमें नए साल में नए सत्र की कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। फिलहाल नागरिक अस्पताल 300 बेड का है। पीजीआई बनने के बाद 720 बेड का अस्पताल होगा और चिकित्सा सुविधाएं भी बढ़ जाएंगी। यहां डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए भी बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
1948 में पाकिस्तान से आए थे यहां, हमारे सामने बना भिवानी
शहर के प्रबुद्ध नागरिक सुशील सरदाना का कहना है कि 1948 में उनका परिवार पाकिस्तान से यहां बंटवारे के समय आया था। 1966 में उनके सामने ही संयुक्त पंजाब से हरियाणा अलग बना। इसके बाद 1972 में हिसार से अलग होकर भिवानी अस्तित्व में आया। जिले में नए बड़े उद्योग और रोजगार के नए अवसर बढ़ाने की जरूरत है, ताकि यहां के युवा जिले के विकास में अपना सीधा योगदान दे सकें।
उद्योगों को मिले खास रियायत तो समृद्ध होगी भिवानी
जिला उद्योग संघ के अध्यक्ष शैलेंद्र जैन का कहना है कि सरकार से छोटे उद्योगों को बिजली के साथ साथ टैक्स व अन्य रियायतें मिले तो भिवानी और अधिक समृद्ध होगा। क्योंकि भिवानी में छोटे उद्योगों पर केवल नीतियों की मार है, उद्योगों का उत्पादन भी घट रहा है। औद्योगिक सेक्टर में भी सब्जी मंडी और ट्रांसपोर्ट ही शामिल किया है, जबकि नए सेक्टर बनने पर उद्योगों के लिए कोई जगह नहीं है।
भिवानी का 50 वां स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। इस पर पूरे जिलेवासियों को शुभकामनाएं देता हूं। भिवानी जिला निरंतर प्रगति की राह पर है। जिला प्रशासन जिलेवासियों की खुशहाली और स्मृति की कामना करता है।
- नरेश नरवाल, उपायुक्त भिवानी।
केंद्र सरकार ने भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र तक भारतमाला सड़क परियोजना का विस्तार किया है। इसकी वजह से भिवानी भी देश के राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ा है और नई सड़कों का जाल भी भिवानी में बिछा है। इसकी सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद काम भी शुरू हो गया है। शहर को दो नए रेलवे ओवरब्रिज भी जल्द मिलेंगे।
-चौ. धर्मबीर सिंह, सांसद भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा।
भिवानी जिले का अपने आपमें समृद्ध इतिहास है। प्रदेश भाजपा सरकार ने पिछले तीन सालो में भिवानी जिले का सड़क, परिवहन, चिकित्सा, शिक्षा सहित अन्य क्षेत्रों में आशातीत विकास किया है और अनेक बड़ी परियोजनाओं को क्रियान्वित किया है।
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- जयप्रकाश दलाल, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, हरियाणा।
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