भिवानी। शाबास बेटियों! फुटबाल में ऐसा रंग जमाया कि जमाना देखता रह गया। किसान परिवार से ताल्लुकात रखने वाली बेटियों ने खेल के मैदान में गोल दागकर देश को पहचान दिलाया। इनकी मेहनत ने परिवार की खुशियों में चार चांद लगा दिया। किसानों ने खेत में और बेटियों ने खेल के मैदान में पसीना बहाया। यही वजह है कि आज परिवार की तस्वीर और तकदीर बदली हुई है। भिवानी की पांच बेटियां अपने शानदार खेल की बदौलत हरियाणा आउटस्टैंडिंग स्पोर्ट्स पर्सन के नाते जूनियर कोच नियुक्त हुईं हैं। इनमें चार बेटियां अकेले अलखपुरा गांव से हैं। जिले के लोगों को इन बेटियों पर नाज है।
गांव अलखपुरा की फुटबाल एकेडमी बेटियों को ही नहीं देश को अलग पहचान दे रही है। यहां की खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रदर्शन से सुब्रतो कप, सैप गेट, खेल इंडिया खेलो, फुटबाल चैंपियनशिप में अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं। इस शानदार खेल की बदौलत ही अलखपुरा की चार बेटियां ऋतु रानी, मुनेश, दीपिका और पूजा को सरकार ने जूनियर कोच नियुक्त किया है। दीपिका वर्ष 2018 से सीआरपीएफ में नौकरी कर रही है। ऋतु भारतीय सीनियर टीम की ओर से खेल रही है। मुनेश वर्ष 2017 से एचएसबी में है, जबकि पूजा पिछले करीब एक साल से शिक्षा विभाग में बतौर क्लर्क कार्यरत है। शनिवार को खेल विभाग की ओर से हरियाणा आउटस्टैंडिंग स्पोर्ट्स पर्सन सर्विस रूल 2021 के तहत प्रदेश के 32 खिलाड़ियों को जूनियर कोच के पद पर नियुक्ति दी। इनमें पांच बेटियां भिवानी से है। चार बेटियां अलखपुरा से है, तो एक बेटी मुकेश गांव बामला से है।
पिता की मेहनत को बेटियों ने सिंचा
जूनियर कोच बनी भिवानी की बेटियों के पिता खेतीबाड़ी करते हैं। इन बेटियों ने पिताओं के विश्वास पर सोने की तरह खरा उतरीं। अलखपुरा की ऋतु, मुनेश, दीपिका और पूजा एक गांव से फुटबाल की चार-चार जूनियर कोच बनना इतिहास में पहली बार हुआ है।
अलखपुरा एकेडमी ने फुटबाल में देश को दी नई पहचान
अलखपुरा की बेटियों ने गांव को फुटबाल के क्षेत्र में अलग पहचान दी है। गांव के मैदान पर हर रोज करीब 200 बेटियां पसीना बहा रही हैं। इनमें सुब्रतो कप खेलने वाली बेटियां, सैप गेम, खेलो इंडिया खेलो, फुटबाल चैंपियनशिप खेलने वाली बेटियां भी शामिल हैं। 2012 से 2020 तक महज 2014 और 2019 को छोड़ दे तो छह बार सुब्रतो कप में भिवानी की टीम का नेतृत्व रहा। यहां से समीक्षा जाखड़ ने 2018 में अंडर-18 सैप खेलों का प्रतिनिधित्व किया। सीनियर में संजू, ऋतु रही। संतोष को अंडर-17 विश्वकप में मौका मिला। यहां खेल विभाग और ग्राम पंचायत मिलकर बेटियों के खेलने का खर्च उठा रहे हैं।
यह खुशी की बात है कि हमारी फुटबाल एकेडमी की चार खिलाड़ी जूनियर कोच बनी हैं। ऋतु, मुनेश कुमारी, दीपिका, पूजा ने काफी संघर्ष किया है। वे पहले बैच में थी और एकेडमी का शुरुआती दौर था। उस समय उन्होंने संघर्ष किया, परिवारजनों और ग्रामीणों का सहयोग लिया। खेल के दम पर देश को नई पहचान के साथ परिवार को अलग पहचान दी है। जूनियर कोच बनने पर सभी को बधाई।
- सोनिका, कोच, अलखपुरा एकेडमी
नवनियुक्त 32 जूनियर कोच में 22 बेटियां
खेल विभाग की ओर से हरियाणा आउटस्टैंडिंग स्पोर्ट्स पर्सन सर्विस रूल 2021 के तहत 32 खिलाड़ियों को जूनियर कोच नियुक्त किया है। इनमें 22 बेटियां है। इनमें भिवानी के अलखपुरा से ऋतु रानी, मुनेश, दीपिका, पूजा, बामला गांव से मुकेश के अलावा नौरंगाबाद से प्रदीप, धारेडू से संदीप, रोहतक के किलोई खास से ज्योति, रिटौली की पिंकी, कन्हेली का सुरेंद्र, योगेश, सैनीपुरा की काजल सैनी, बहु अकबरपुर की प्रियंका, रेवाड़ी के बिटोरी से कर्मबीर, करनाल से अत्तर सिंह, कुरुक्षेत्र के शाहबाद मारकंडा से रेणु बाला, सोनीपत के लहरारे की निक्की, वेस्टरामनगर की रीना, मुरथल की प्रियंका, प्रीति, खरखौदा से प्रदीप दहिया, शास्त्री कॉलोनी से रेखा और काजल, हिसार के मंगाली झारा की निर्मला, मंगाली अकलान की मधुबारा, सिसाय बोला की मंजू कुमारी, कंवारी का विक्रम दुहन, झज्जर के नूना माजरा की मनीषा, खोरा की महिला खिलाड़ी संजू, बहादुरगढ़ का सुरेंद्र राठी, करनाल की ऊषा शामिल है। संवाद