फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bhiwani News: राजस्व विभाग ने दिसंबर 2011 में भी तीन विरासत के इंतकाल कर दिए थे खारिज

Thu, 24 Apr 2025 10:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
विज्ञापन
कुसुंभी मोड़ पर 1884 से पहले निर्माण किए गए मुसाफिरों के लिए कुंड परिसर में कमरे।
विज्ञापन
भिवानी। राजस्व विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत कर कुंड की भूमि बिक्री मामले में अब नए तथ्य सामने आ रहे हैं। राजस्व विभाग ने दिसंबर 2011 में भी इस भूमि पर विरासत के तीन इंतकाल खारिज कर डाले थे, जिन्हें वर्ष 2016-17 की जमाबंदी रिपोर्ट में भी दर्शाया गया है। हालांकि अधिकारियों ने इसके बावजूद नियम ताक पर रखकर न केवल दो विरासत के इंतकाल कर डाले, बल्कि मुख्तयारनामा पर कुंड की भूमि की रजिस्ट्री भी कर डाली। अब इस कारनामे से परत दर परत कई सच्चाई भी सामने आ रही हैं।
विज्ञापन

दिल्ली-पिलानी नेशनल हाईवे 709 ई पर कुसुंभी मोड़ के समीप प्राचीन ऐतिहासिक बरसाती कुंड की भूमि का जिला राजस्व विभाग के रिकार्ड में वर्ष 1884 से ही इंतकाल दर्ज है, जिसमें भूमि की जगह पर कुंड दर्शाया गया है। इस मामले में मुख्य सचिव को शिकायत करने वाले स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के अध्यक्ष बृजपाल सिंह ने राजस्व विभाग से कुंड की भूमि का 1884-85 से लेकर 1894-95, 1889-90 का पुराना रिकाॅर्ड और अब तक चला आ रहा भूमि का रिकाॅर्ड भी खोज निकाला है।
इसके बाद यह सामने आया कि इस भूमि पर पहले भी तीन इंतकाल गलत तरीके से दर्ज कराए गए थे, जिन्हें राजस्व विभाग ने दिसंबर 2011 को खारिज कर डाला था। 28 नवंबर 2011 को पटवारी ने कुंड भूमि के विरासत के तीन इंतकाल खारिज करने की रिपोर्ट तैयार की थी। इसे 16 दिसंबर 2011 को तत्कालीन तहसीलदार ने मंजूर कर दिया था। इसके बाद 2016-17 की जमाबंदी रिपोर्ट में भी तीनों इंतकाल खारिज करना दर्शाया गया है।
विज्ञापन

अब 11 मई 2022 को नियमों को ताक पर रखकर कुंड की भूमि की 39.75 लाख रुपये में रजिस्ट्री कर डाली। इससे पहले इस भूमि पर 11 अप्रैल 2022 को विरासत के इंतकाल पटवारी ने दर्ज किए थे, जिसे 19 अप्रैल को ही तत्कालीन तहसीलदार ने मंजूर कर दिया था। इसमें यह भी जांच का विषय है कि राजस्व विभाग में विरासत के इंतकाल एक साल से छह माह तक लटकाए जाते हैं, लेकिन इस मामले में पटवारी की रिपोर्ट दर्ज होने के महज सप्ताह भर बाद ही तत्कालीन तहसीलदार ने अपनी मंजूरी की मुहर लगा डाली। इस भूमि को मुख्तयारनामा पर बेचा गया है। इसमें महज दो लाख 78 हजार 250 रुपये का स्टॉप इस्तेमाल किया गया है। फिलहाल दिल्ली-पिलानी नेशनल हाईवे रोड की करीब 20 करोड़ कीमत की भूमि की नियम ताक पर रखकर की गई बिक्री में स्टाॅप गड़बड़ी का भी मामला जांच में सामने आ सकता है।

संगठन के पास इस मामले की गुप्त सूचना आई थी। संगठन ने इस मामले की अपने स्तर पर तहकीकात की तो सामने आया कि नवंबर 2011 में भी इस कुंड की भूमि पर तीन विरासत के इंतकाल खारिज किए जा चुके हैं, जबकि राजस्व विभाग के रिकार्ड में 1884-85 से ये भूमि कुंड के नाम से ही चली आ रही है। इस सार्वजनिक इस्तेमाल में लाई जाने वाली भूमि को बिक्री व खरीदा नहीं जा सकता है। इस भूमि के मलकियत में चाहे जो भी व्यक्ति हैं, वे भी इसे अपने निजी हित में प्रयोग नहीं कर सकते हैं। संगठन ने विजिलेंस और मुख्य सचिव को शिकायत दी है और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। जिला प्रशासन भी इस भूमि की रजिस्ट्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाकर संबंधित तहसील अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई कराए।
-बृजपाल सिंह परमार, अध्यक्ष, स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन भिवानी।

राजस्व विभाग के रिकार्ड में भूमि संबंधी दस्तावेजों के आधार पर ही विरासत का इंतकाल दर्ज किया जाता है। कुंड की भूमि पर तीन विरासत के इंतकाल खारिज किए जाने की कोई जानकारी नहीं है। ये मामला 2011 का है।
विज्ञापन

- सुरेश कुमार, तहसीलदार, भिवानी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें