फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शहरी दायरे के चारों तरफ 76 एकड़ में फैला अवैध कॉलोनाइजरों का साम्राज्य

विज्ञापन
अवैध निर्माण ढहाता जेसीबी। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : Bhiwani
विज्ञापन
सरकारी व्यवस्था की जड़ों में भ्रष्टाचार का दीमक धीरे-धीरे इसको खोखला बना रहा है। इसी का एक उदाहरण शहरी दायरे के बाहर फैले अवैध कालोनाइजरों का साम्राज्य है। जिसने साल दर साल 76 एकड़ भूमि पर अवैध कॉलोनियों का जाल बिछा दिया है। इनमें से अधिकांश अवैध कॉलोनियां तो कई सालों से आबाद हैं। यहां तक कि इनमें रहने वाले लोग अब जनसुविधाओं की मांग करने लगे हैं।
विज्ञापन

आश्चर्य की बात तो यह है कि राजस्व विभाग और जिला योजनाकार विभाग की कार्रवाई के बावजूद अवैध कॉलोनियों में कोई कमी नहीं आ रही है। बल्कि हर साल शहरी दायरे से बाहर 20 से 25 एकड़ भूमि पर टुकड़ों में अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं। जब तक जिला टाउन प्लानिंग विभाग और राजस्व विभाग जागता है, यहां घरों का निर्माण कर लोग आबाद हो जाते हैं। इसके बाद इन अवैध निर्माण को तोड़ पाना टाउन प्लानिंग विभाग के लिए भी चुनौती बन जाता है।
ताजा हालात ये हैं कि भिवानी शहर के सभी प्रमुख मार्गों पर शहरी लाल डोरा से बाहर कास्तकारों की भूमि पर अवैध कॉलोनियां धड़ल्ले से काटी और प्लाटों की खरीद फरोख्त हो रही हैं। हालांकि जिला प्रशासन ने इन अवैध कॉलोनियों में प्लाटों की खरीद फरोख्त को रोकने के लिए रजिस्ट्रियों पर भी प्रतिबंध लगा रखा है। जबकि अलग-अलग इलाकों में खसरा व खतौनी नंबर सार्वजनिक कर इनमें जमीन रिहायशी उद्देश्य से खरीद और बिक्री भी नहीं किए जाने के आदेश हैं। मगर फिर भी राजस्व विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत कर धड़ल्ले से प्रतिबंधित जमीनों की रजिस्ट्रियां भी हो रही हैं। पिछले दिनों इस मामले में जिला योजनाकार विभाग और राजस्व विभाग भी आमने-सामने आ गए थे। इसमें दोनों ही विभागों के अधिकारियों ने एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाए थे।
विज्ञापन

आठ माह में गिराए 33 एकड़ भूमि पर अवैध निर्माण
जिला योजना कार विभाग के अधिकारियों की मानें तो पिछले आठ माह के दौरान नगर परिषद हद से बाहर अवैध रूप से काटी गई कॉलोनियों पर पीला पंजा चला कर करीब 33 एकड़ भूमि पर अवैध निर्माण गिराए गए हैं। जून 2019 से अब तक दर्जनों बार अवैध निर्माण करने वालों को नोटिस दिए गए हैं।
दो कनाल से अधिक भूमि खरीद बिक्री के लिए एनओसी लेनी जरूरी
शहरी दायरे से बाहर और नगर परिषद की हद से परे अगर कोई भूमि की खरीद फरोख्त होती है तो उसमें दो कनाल के लिए एनओसी लेना अनिवार्य है। ये एनओसी जिला योजनाकार विभाग से लेना जरूरी है। लेकिन अचरज की बात तो एक ने भी कोई एनओसी नहीं ली है। जबकि हैरानी तो इस बात की भी है कि यहां पर किसी भी कालोनाइजर के पास कोई लाइसेंस नहीं हैं। अवैध कॉलोनाइजर ही भूमि खरीद फरोख्त का अवैध कारोबार कर मुनाफा कमा रहे हैं।
यहां फैला है अवैध कॉलोनियों का जाल
शहर के लोहारू रोड पर गांव देवसर तक, रोहतक रोड पर गांव निनान तक, कोंट रोड पर गांव कोंट तक, ढाणा रोड पर गांव ढाणा तक, महम रोड पर गांव कालुवास तक, हांसी रोड पर तिगड़ाना मोड़ और तोशाम बाईपास पर गांव बापोड़ा तक अवैध कॉलोनियां काटी जा चुकी हैं। इसी तरह सिटी स्टेशन लाइन पार भी कई अवैध कॉलोनियां काटी गई हैं।
भिवानी नगर परिषद की हद से बाहरी दायरे में शहर के चारों तरफ अवैध कॉलोनियों की पहचान की गई है। इनमें अवैध निर्माण हटाने पर भी काम किया जा रहा है। अधिकांश अवैध कॉलोनियां आधा एकड़ से एक एकड़ तक के दायरे में हैं। ये टुकड़ों में कॉलोनियां काटते हैं और फिर उन्हें लोगों को झांसा देकर बेच देते हैं। इसलिए कोई भी ऐसे झांसे में न आए।
-राजकीर्ति, जिला नगर योजनाकार भिवानी।
जिला प्रशासन ने शहरी दायरे से बाहर रजिस्ट्रियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रखा है। दो कनाल से ऊपर जमीन बेची व खरीद की जा सकती है, इससे नीचे डीटीपी से एनओसी जरूरी है। इसके अलावा एग्रीमेंट पर कोई प्रतिबंध नहीं है। अवैध कॉलोनियों में ज्यादातर एग्रीमेंट ही हैं।
विज्ञापन

-मोहनलाल, तहसीलदार भिवानी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें