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अवैध खनन के साथ पर्यावरण को पहुंचाया बड़ा नुकसान, देना होगा मोटा हर्जाना

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भिवानी। डाडम की पहाड़ी में खुलकर अवैध खनन के साथ-साथ पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचाया गया। हरित पट्टी और खनन क्षेत्र में कोई सुरक्षा नहीं दी गई। पर्यावरण सुरक्षा के सभी नियम ताक पर रहे। अब परियोजना प्रस्तावक यानी खनन करने वाली एजेंसी को मोटा जुर्माना इसके लिए भरना होगा। एनजीटी ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया है। खनन सामग्री के मूल्य का 10 प्रतिशत तक हर्जाना हो सकता है। वहीं वन विभाग ने भी आदेशों के बाद दो माह में हर्जाना वसूलने की तैयारी कर ली है।
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने डाडम में परियोजना प्रस्तावक (पीपी) से अवैध खनन के साथ-साथ पर्यावरण को नुकसान का भी कड़ा संज्ञान लिया है।
मालूम हो कि डाडम में खनन कार्य को लेकर बड़े सवाल खड़े होते रहे हैं। विपक्ष शुरु से सरकार पर सवाल उठा रहा है। नए साल के दिन एक जनवरी को भूस्खलन में पांच श्रमिकों की मृत्यु हो जाने के बाद तो विपक्ष के अनेक नेताओं ने सरकार पर सवाल खड़े करते हुए सीबीआई जांच तक की मांग की थी। अब सामने आई रिपोर्ट में अवैध खनन के साथ-साथ पर्यावरण को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।इसमें आरोप हैं कि पट्टे की सीमा के साथ 7.5 मीटर चौड़ाई की आवश्यक हरित पट्टी और खनन क्षेत्र में एक सुरक्षा क्षेत्र प्रदान करने में खनन करने वाली एजेंसी फेल रही। एनजीटी ने अवैध रूप से खनन सामग्री की लागत के अलावा वृक्षारोपण को नुकसान की बहाली की लागत वसूलने की बात भी फैसले में कही हैं। इस संबंध में वन विभाग ने विशेष पर्यावरण न्यायालय, कुरुक्षेत्र में 1.241 हेक्टेयर से अधिक के अवैध खनन के लिए मैसर्स सुंदर मार्केटिंग और 0.097 हेक्टेयर से अधिक के मैसर्स गोवर्धन माइंस के खिलाफ मामला दर्ज किया हुआ है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) ने भी वर्तमान पीपी के खिलाफ विशेष पर्यावरण न्यायालय में पर्यावरण मानदंडों के उल्लंघन पर कार्रवाई की है। वर्तमान पीपी पर पर्यावरण को नुकसान की लागत 7.5 करोड़ रुपये पर विचार करने के बजाय, एनजीटी ने खनन सामग्री के मूल्य के 10 प्रतिशत पर अंतरिम मुआवजा तय करने की बात कही है।
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खनन के दौरान लापरवाही की बात फैसले में है। पर्यावरण नियमों के उल्लंघन की बात है। पूरा फैसला अभी नहीं पढ़ पाया हूं। जो फैसला है, उसके अनुसार दो माह में हर्जाना वसूला जाएगा।
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- दलीप सिंह, डीएफओ
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