कासनी खुर्द गांव के खेत में मिली बालाजी की मूर्ति के समक्ष हाथ जोड़े खड़े ग्रामीण।
बहल (भिवानी)। बहल क्षेत्र के कासनी खुर्द गांव के बस अड्डे के समीप एक खेत में खोदाई करने पर सालासर बालाजी की मूर्ति का मिलना क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई। सोशल मीडिया पर खबर वायरल होने से बड़ी संख्या में लोग मूर्ति देखने कासनी खुर्द गांव पहुंचे। लोगों की राय थी कि मूर्ति को पूरे विधि विधान से स्थापित किया जाना उचित होगा।
मामला शनिवार दोपहर करीब दो बजे का है। कासनी खुर्द गांव के बस अड्डे के पास कुछ लोग बैठे ताश खेल रहे थे। एक बाबा ने उन लोगों से बातचीत के दौरान उनको पास के खेत में ही एक मूर्ति के बारे में बताया। बाबा ने बताया कि यहां से महज 15 फुट के दायरे में अगर खोदाई की जाए तो वहां किसी देवता की मूर्ति मिल सकती है।
एक बार तो ग्रामीणों ने बाबा की बात पर विश्वास नहीं किया, लेकिन जब बाबा ने यकीन दिलाया तो लोगों ने बाबा के बताई लोकेशन की जेसीबी की मदद से खोदाई करवाई। ग्रामीण यह देखकर हैरत में रह गए कि जहां बाबा ने चिमटा रखा था उसी जगह पर करीब चार फुट नीचे एक मिट्टी से सनी मूर्ति मिली। ग्रामीणों ने मूर्ति को निकालकर मिट्टी हटाई तो यह सालासर बालाजी की मूर्ति मिली।
मूर्ति मिलने की सूचना जैसे ही सोशल मीडिया पर फैली तो बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचे। मौके पर मौजूद ग्रामीण आनंद भालोटिया, भगत राममेहर, सतवेन्द्र, अत्तर सिंह, राजेंद्र ने बताया कि जिस बाबा ने यह लोकेशन बताई वो उसने आपको अलवर शहर का बताया। मूर्ति मिलने के बाद बाबा ने अपना चिमटा व कमंडल वहां पर छोड़ दिया और खुद सुबह आने की बात कहकर झुंपा गांव के लिए निकल गए।
लोगों ने कहा कि यह एक आस्था से जुड़ा मामला है। मूर्ति के बारे में कोई भी फैसला गांव की आपसी सहमति के बाद लिया जाएगा। लोगों का कहना था कि ऐसा कोई निशान नहीं मिला है, जिससे यह कहा जा सके कि यह प्रायोजित था। ऐसे में सही यही रहेगा कि इस मूर्ति को विधि विधान से स्थापित किया जाए।