भिवानी। उमस भरी गर्मी का असर अब लोगों के पाचन तंत्र पर साफ दिखाई देने लगा है। पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में इन दिनों पेट दर्द, अपच, हल्के दस्त और उल्टी की शिकायत लेकर प्रतिदिन 40 से 45 मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार उमस बढ़ने के साथ संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से सक्रिय हो जाते हैं जिससे फूड पॉइजनिंग और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में लो ब्लड प्रेशर (बीपी) की समस्या भी देखने को मिल रही है। पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज के फिजिशियन डॉ. यतिन गुप्ता ने बताया कि गर्मी के बाद आने वाले उमस भरे मौसम में शरीर का पाचन तंत्र बेहद संवेदनशील हो जाता है। हवा में अत्यधिक नमी रहने के कारण बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से पनपते हैं। ऐसे में पका हुआ भोजन जल्दी खराब हो जाता है और उसके सेवन से फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि उमस के कारण शरीर की पाचन क्रिया और मेटाबॉलिज्म भी धीमा पड़ जाता है। इससे भारी, तली-भुनी और अधिक मसालेदार चीजें आसानी से नहीं पचतीं। यही वजह है कि पेट दर्द, गैस, अपच और उल्टी जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। डॉ. गुप्ता ने बताया कि इस मौसम में सबसे अधिक खतरा जलजनित बीमारियों का रहता है। दूषित पानी पीने से दस्त, उल्टी, पेट में मरोड़ और डिहाइड्रेशन की समस्या तेजी से बढ़ सकती है।
इसलिए पानी की शुद्धता का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि दस्त या उल्टी लगातार बनी रहे तो स्वयं दवा लेने की बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, बुजुर्ग, छोटे बच्चे और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित मरीज इस मौसम में विशेष सावधानी बरतें। खानपान में हल्के और सुपाच्य भोजन को प्राथमिकता दें तथा पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पीते रहें।
उमस भरे मौसम में ऐसे रखें सेहत का ध्यान
बासी भोजन का सेवन बिल्कुल न करें। भोजन बनने के दो घंटे के भीतर उसका सेवन कर लें। पानी हमेशा उबालकर या अच्छी तरह फिल्टर करके ही पिएं। बाहर के खुले पानी और बर्फ के इस्तेमाल से बचें। भोजन में खिचड़ी, दलिया, दही और छाछ जैसी सुपाच्य चीजों को शामिल करें तथा मसालेदार, तैलीय और फास्ट फूड से दूरी बनाए रखें। यदि दस्त या उल्टी की शिकायत हो तो शरीर में पानी और नमक की कमी रोकने के लिए तुरंत ओआरएस या नींबू-पानी का घोल लेना शुरू करें। साथ ही लक्षण बढ़ने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।