भिवानी। ग्रामीण योग कर कैसे निरोग बनेंगे जब आयुष विभाग की व्यायामशालाओं का उपयोग उपले बनाने में किया जा रहा है। यह हाल ग्रामीण स्तर की हर व्यायामशाला का है। जहां झाड़ झंकाड़े खड़े हैं और ग्रामीण भी गांव में बने प्लेटफार्म का उपले बनाने में उपयोग कर रहे हैं।
पंचायती राज विभाग ने 45 लाख रुपये का बजट खर्च व्यायामशालाएं तो बना दीं, मगर इनके अंदर बिजली, पानी और शौचालय की मूलभूत सुविधाएं देना भूल गया। हालांकि पहले खेल विभाग और अब जिला आयुष विभाग इन व्यायामशालाओं का रख रखाव कर रहा है। मगर भिवानी जिले में 91 गांवों में स्वीकृति के बाद 71 गांवों ही व्यायामशालाएं खुली हैं। इनमें अव्यवस्था और बदहाली भी साफ झलक रही है। शाम ढलते ही यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगता है। वहीं गांव की आबादी से दूर दराज होने की वजह से महिलाएं बच्चे और लोग भी यहां योग अभ्यास करने जाने से कतराते हैं।
हरियाणा सरकार ने 2015 में प्रत्येक गांव के अंदर व्यायामशाला खोलने की घोषणा की थी। इसके बाद गांव की व्यायामशाला में एक-एक आयुष योग सहायक भी लगाए थे। भिवानी जिले में 91 गांवों में व्यायामशालाएं खोलने घोषणा हुई थी। इसमें से 71 गांवों में व्यायामशालाएं बनकर तैयार हो गईं। प्रत्येक व्यायामशाला में एक-एक आयुष योग सहायक भी तैनात किया हुआ है। ये व्यायामशालाएं और योग सहायक पहले तो जिला खेल विभाग के अधीन थे, मगर 2019 में इन व्यायामशालाओं और आयुष योग सहायकों को जिला आयुष विभाग को स्थानांतरित कर दिया।
इसके बाद से जिला आयुष विभाग ही इन व्यायामशालाओं की व्यवस्थाएं देख रहा है। पंचायती राज विभाग ने जिले के 71 गांवों में व्यायामशालाओं का निर्माण कराया था। प्रत्येक व्यायामशाला पर 42 से 45 लाख रुपये के बजट खर्च हुआ है। मगर इस बजट के बावजूद न यहां बिजली है न पीने का पानी, शौचालय तक की व्यवस्था यहां नहीं है। गांव की आबादी से करीब तीन से चार किलोमीटर दूर बनाई गई। इन व्यायामशालाओं में बच्चे, महिलाएं और ग्रामीण जाने से भी कतराते हैं, क्योंकि ये वीरान इलाके में हैं। जहां सुबह शाम जाने में भी डर लगता है। वहीं नियमित रखरखाव नहीं होने के कारण कई व्यायामशालाओं की बाहरी दीवारें भी टूट चुकी हैं और चबूतरा भी उखड़ चुका है।
कई जगह तो चबूतरा बना, मगर शेड ही गायब है। न यहां स्टोर है न कोई चेंजिंग रूम। ऐसे में वीरान, सुनसान और बदहाल व्यायामशालाएं ग्रामीणों द्वारा उपले बनाने में ही इस्तेमाल हो रही हैं। कई व्यायामशालाओं में तो बारिश का पानी जमा है और आसपास उपले बनाने की वजह से यहां का वातावरण भी स्वास्थ्य वर्धक होने के बजाय प्रदूषित ही हो रहा है।
व्यायामशाला में ये होनी चाहिए जरूरी व्यवस्था
ग्रामीण क्षेत्र की व्यायामशालाओं में बैठने के लिए बैंच, योग करने के लिए मैट की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा व्यायामशाला में एक ट्रैक हो जिस पर लोग भ्रमण कर सकें। मौसम से बचाव के लिए चबूतरे पर सुरक्षित शेड बनाना अनिवार्य है। परिसर में औषधीय व फूलदार पौधों की व्यवस्था होनी चाहिए। व्यायामशाला में पीने का पानी, बिजली और शौचालय की व्यवस्था जरूरी है। व्यायामशाला में बरसाती पानी व गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था भी बेहद जरूरी है।
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भिवानी जिले में 91 व्यायामशालाएं स्वीकृत हैं। इनमें से अब तक 71 गांवों में पंचायती राज तकनीकी विभाग की ओर से व्यायामशालाओं का निर्माण किया जा चुका है। सभी व्यायामशालाओं में आयुष विभाग की ओर से आयुष योग सहायक तैनात किए गए हैं। जो रोजाना सुबह छह से आठ और शाम को छह से आठ चार घंटे योगाभ्यास कराते हैं और चार घंटे गांव की आयुष डिस्पेंसरी में लोगों को योग परामर्श देते हैं।
- डॉ. संजय वैद, जिला योग कोऑर्डिनेटर आयुष विभाग भिवानी।
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ग्रामीण क्षेत्र में व्यायामशालाओं का निर्माण पंचायती राज तकनीकी विभाग की ओर से किया गया है। जिस हालत में व्यायामशालाएं पंचायती राज विभाग ने निर्माण कर दी हैं, उसी हालत में विभाग ने इन्हें हैंडओवर किया है। व्यायामशालाओं में मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था कराए जाने के संबंध में पंचायती राज विभाग को पत्र लिखा है। विभाग के अधिकारी एस्टीमेट तैयार करेंगे, जिस पर बजट जिला आयुष विभाग मुहैया कराएगा। व्यायामशालाओं में जरूरी व्यवस्थाएं कराने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
-डॉ. देवेंद्र शर्मा, जिला आयुष अधिकारी भिवानी।