भिवानी। मंत्री जी! सुबह आठ बजे आए थे, तीन घंटे हो गए लेकिन अभी तक ट्रीटमेंट स्लिप नहीं बनी है। यह गुहार कृषि मंत्री जेपी दलाल के समक्ष अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे रामनगर कॉलोनी वासी रोहित ने लगाई। दरअसल, सिविल अस्पताल में अनुबंध पर लगे कर्मचारियों का ठेका बदला गया है और नए ठेकेदार के कारिंदों ने कर्मचारियों को हाजिरी लगाने से रोका तो उन्होंने काम छोड़ हड़ताल शुरू कर दी। जिस कारण अस्पताल की व्यवस्था चरमरा गई।
उपचार पर्ची (ट्रीटमेंट स्लिप) बनाने के लिए भीड़ उमड़ी मगर कोई भी कंप्यूटर ऑपरेटर उपचार पर्ची बनाने के लिए नहीं था। वहीं कृषि मंत्री जेपी दलाल सुबह कोरोना वैक्सीन लगवाने सामान्य अस्पताल परिसर स्थित वार रूम पहुंचे थे। वहीं उपायुक्त व अन्य अधिकारी भी पहुंचे। मरीजों ने सबके सामने अपनी समस्या बताई। जिसके बाद मंत्री व अधिकारियों ने अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारियों को व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए।
सामान्य अस्पताल में अनुबंध आधार पर 308 कर्मचारी हैं। जो उपचार पर्ची, कंप्यूटर ऑपरेटर, सैनिटाइज कर्मी, सुरक्षा कर्मी, चिकित्सक कक्ष के बाहर ड्यूटी दे रहे हैं। वीरवार को स्वास्थ्य विभाग ने ठेकेदार बदला है। ऐसे में नए ठेकेदार के कारिंदों ने पुराने कर्मियों को हाजिरी लगाने से रोक दिया।
एक फोन पर वापस ड्यूटी पर लौटे कर्मचारी
जिला सामान्य अस्पताल में कार्यरत अनुबंध आधार कर्मचारी 43 दिन बाद फिर से काम से न हटाने की मांग को लेकर हड़ताल पर उतरे। शुक्रवार सुबह आठ बजे कर्मचारी जब अपनी ड्यूटी की हाजिरी लगाने पहुंचे तो नए सुपरवाइजर ने उनकी हाजिरी लगाने से रोक दिया। जिसको लेकर कर्मचारियों ने रोष जताया और काम छोड़ हड़ताल शुरू कर दी। कर्मचारियों ने अस्पताल परिसर में ओपीडी के बाहर सरकार व अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। रोष प्रदर्शन करते हुए कर्मचारियों के प्रधान दीपक कुमार, संदीप, पंकज, प्रवीण, महावीर, संदीप, रमेश, सुनील, अरूण ने बताया कि वो पिछले साल से जिला सामान्य अस्पताल में अनुबंध आधार पर कार्यरत हैं। एक अप्रैल से सरकार ने ठेका नए ठेकेदार को दे दिया है। आज उन्हें हाजिरी लगाने से रोक दिया गया है। जिसको लेकर उनकी कहासुनी भी हुई। सभी कर्मचारी काम छोड़ कर ओपीडी के सामने एकत्रित हुए और नारेबाजी कर रोष जताया। कर्मचारी इस दौरान प्रधान चिकित्सा अधिकारी से भी मिले, मगर ठोस आश्वासन न मिलने पर फिर से हड़ताल शुरू कर दी। दोपहर बाद करीब चार बजे सुपरवाइजर के माध्यम से ठेकेदार ने कर्मचारियों से फोन पर बात की और आश्वासन दिया कि उन्हें नौकरी से नहीं हटाया जाएगा। ठेकेदार ने स्वयं सोमवार को कर्मचारियों से मिलने का बात कही। जिसके बाद कर्मचारी काम पर लौटे।
क्लर्क ने कंप्यूटर ऑपरेटर बन काटी मरीजों की ट्रीटमेंट स्लिप
शुक्रवार को अस्पताल की ओपीडी में 1300 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचे। कर्मचारियों की हड़ताल के कारण परेशान रहे। कृषि मंत्री और उपायुक्त के निर्देश के बाद अस्पताल अधिकारियों ने वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए क्लर्क को कंप्यूटर ऑपरेटर बना पर्ची बनवाई।
ये बोले मरीज :
मेरे हाथ में चोट लगी है। प्लस्टर है। आज अस्पताल में जांच करवाने के लिए आया था। यहां आकर देखा तो कर्मचारी हड़ताल पर थे। न कोई गेट पर सैनिटाइजर की व्यवस्था है और न ही कोई उपचार पर्ची बनाने के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर। इनकी हड़ताल की वजह से मरीजों को परेशानी हो रही है। मंत्री जी से बेहतर व्यवस्था की गुहार लगाई है।
- रोहित, मरीज।
ओपीडी में उपचार स्लिप बनाने के लिए दो घंटे से लाइन में लगे हैं। अब पता चला कि कर्मचारियों ने काम छोड़कर हड़ताल कर दी है। बच्चे रो रहे हैं और गर्मी से बुरा हाल है। एक तरफ सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने की बात कह रही है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों की हड़ताल से लोग परेशान हैं।
- आशीष, मरीज।
दो दिन से सिर में दर्द है। सुबह साढ़े आठ बजे घर से आकर डॉक्टर से चेकअप करवाने के लिए लाइन में खड़े हैं। अब सभी कर्मचारी काम छोड़कर हड़ताल पर बैठ गए हैं। कौन स्लिप बनाएगा और कौन चिकित्सक रूम के बाहर नंबर लगाएगा। पहले ही बीमार हैं अब उपचार के लिए भी इंतजार करना पड़ेगा।
- ओमपति देवी, मरीज।