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डाक्टर एविडेंस पर, अल्ट्रासाउंड बिना लौटीं गर्भवती महिलाएं

Sun, 21 Aug 2016 12:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
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ultrasound - फोटो : फाइल फोटो
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सिविल अस्पताल में इलाज के लिए मरीजों को जूझना पड़ रहा है। पहले पर्ची कटवाने के लिए घंटों लाइन में लगे रहने के बाद ओपीडी के बाहर घंटों इंतजार के बावजूद गर्भवती महिलाओं को बेरंग लौटना पड़ रहा है। कई महिलाएं लगातार तीन दिन से अल्ट्रासाउंड के लिए अस्पताल आ रही हैं, लेकिन डाक्टर साहब हैं कि मिलते ही नहीं। जल्दी नंबर आने की उम्मीद लेकर दूर-दराज गांवों से आने वाली महिलाओं को पूरे दिन भूखा रहकर इंतजार करती हैं, दोपहर बाद मायूस होकर वापस घर को लौट रही हैं। अस्पताल प्रबंधन का तो एक ही रटा-रटाया जबाव होता है कि डाक्टर एविडेंस के लिए कोर्ट गए हैं। लोगों की परेशानी के मद्देनजर वैकल्पिक व्यवस्था करने में विभाग न जाने क्यों आलस कर रहा है।
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सामान्य अस्पताल में ऑन लाइन सिस्टम की ट्रायल बनी आफत
मरीजों को बेहतर इलाज और बेहतर सुविधाएं देने के लिए सामान्य अस्पतालों को ऑनलाइन करने की कवायद ओपीडी ट्रीटमेंट स्लिप बनाने के दौरान ही पटरी से उतरी नजर आई। दो मिनट के काम के लिए मरीजों को 15 से 20 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। गर्मी में मरीजों का हाल बेहाल था और कर्मचारी कंप्यूटर के नए साफ्टवेयर में उलझे थे। चूंकि इसे केवल ट्रीटमेंट स्लिप बनाने में शुरू किया गया था, ऐसे में समय पर मरीज नहीं आने के कारण डाक्टरों के कक्ष भी खाली नजर आए।प्रदेश भर के अस्पतालों को कंप्यूटराइज्ड किया जा रहा है। मरीजों की एक यूनिक आईडी बनाई जा रही है। जिसके आधार पर उनकी बीमारी का पूरा रिकार्ड ऑनलाइन रहेगा।

एक क्लिक पर मरीज व उसकी पूरी जानकारी मिलेगी। ओपीडी के अलावा सभी चिकित्सकों, लैब में कंप्यूटर होंगे। मरीज को अपना आईडी नंबर बताना है और डाक्टर के पास उनकी पूरी जानकारी पहुंच जाएगी। लैब की रिपोर्ट भी ऑन लाइन होगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ट्रीटमेंट स्लिप गुम हो जाने या किसी अन्य जिले में इलाज के लिए मरीज जाता है तो भी उसे सिर्फ अपना आईडी नंबर देना होगा। कुछ जिलों में ऑनलाइन सिस्टम शुरू हो चुका है। भिवानी अस्पताल में अभी लंबित है। शनिवार से इसकी शुरुआत की गई। प्राथमिक स्तर पर ओपीडी और इमरजेंसी की ट्रीटमेंट स्लिप बनाने से इसकी शुरुआत की गई। पहले ही दिन व्यवस्था पटरी से उतरी नजर आई। दरअसल जिन कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी गई थी उन्हें या तो हटा दिया गया है या कहीं अन्य जगह स्थानांतरित कर दिया गया है। ऐसे में अब नए कर्मचारियों की ड्यूटी ओपीडी में लगाई गई है। यह नई व्यवस्था राहत कम आफत ज्यादा बनी। दरअसल नए कर्मचारियों को कंप्यूटर में मरीजों की पूरी जानकारी फीड करने में 15 मिनट तक का समय लगा। इस दौरान मरीजों की भीड़ गर्मी में परेशान रही। वहीं डाक्टर के कक्षों के बाहर मरीज कम पहुंचे। इस कारण चिकित्सक राहत में नजर आए।
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तीखी नोकझोंक और कहासुनी
ओपीडी में गर्मी के बीच लाइन में लगे मरीजों ने परेशान होकर कर्मचारियों को भी खरी-खोटी सुनाना शुरू कर दिया। इस कारण तीखी नोकझोंक भी हुई। कुछ मरीजों ने काम नहीं करने के आरोप लगाए तो कुछ ने सिफारिश पर ट्रीटमेंट स्लिप पहले बनाने के आरोप लगाए। महिला गीता, सरोज, ऋतु, शर्मिला ने बताया कि सिफारिशी तो सीधे अंदर जाकर बनवा रहे है और बाकी मरीज चार-चार घंटे से कतार में लगे हैं।

ये डिटेल करनी है कंप्यूटर में फीड
नए साफ्टवेयर के तहत मरीज का नाम, लिंग, आयु, पता के अलावा आधार नंबर, कैटेगरी, राज्य, मासिक आय की भी जानकारी देनी होगी। क्या बीमारी है और कौन डाक्टर जांच करेगा।
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