सामान्य अस्पताल में दवाइयां ही नहीं, अब ऑपरेशन करने का सामान भी खत्म हो गया है। हालात ये हे कि ऑपरेशन थियेटर में न धागे हैं, न गलव्य और न अन्य जरूरी सामान। यहां तक कि बैंडेज (पट्टियां) भी खत्म हैं। ऐसे में ऑपरेशन टाले जा रहे हैं। नए मरीजों को 15 दिन बाद की तिथि दी जा रही है। हर्निया किट तक मरीज खुद खरीद रहे हैं। जो मरीज सामान खरीदकर ला रहे हैं, उन्हीं के ऑपरेशन हो रहे हैं। प्रधान चिकित्सा अधिकारी का कहना है कि बजट उनके पास खत्म हो चुका है और सामान की सप्लाई आई नहीं है। उन्होंने ब्लड बैंक से लोन के लिए प्रयास किए थे, मगर नहीं मिला। अब उच्च अधिकारियों को इस स्थिति के बारे में अवगत करवा दिया है।
सामान्य अस्पताल में इन दिनों कुछ भी सामान्य नहीं है। पिछले 10 दिनों से अधिकतर दवाइयां खत्म होने से मरीज और उनके तीमारदार परेशान हैं, अब ऑपरेशन थियेटर में भी सामान खत्म हो गया है। हालात ये है कि ऑपरेशन थियेटर में सबसे अहम माने जाने वाले धागे और पट्टियां ही खत्म हैं। इसके अलावा ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों द्वारा पहने जाने वाले गलव्ज तक नहीं हैं। सामान नहीं होने पर अब ऑपरेशन स्थगित किए जा रहे हैं और जो बहुत ज्यादा जरूरी है, वे भी किए जा रहे हैं।
इसके अलावा मरीजों को स्थिति से अवगत कराया जाता है। ऐसे में जो मरीज सामान ले आता है, उसी के ऑपरेशन किए जा रहे हैं।
औसतन होते हैं 15 से 20 ऑपरेशन
सामान्य अस्पताल में औसतन 20 से 25 ऑपरेशन हर रोज होते हैं। इनमें छह-सात सर्जन के होते हैं तो आठ-10 हड्डी रोग विशेषज्ञ के। इसके अलावा कुछ आंखों के व अन्य ऑपरेशन होते हैं। सिर्फ गायकोनोलोजिस्ट से संबंधित ऑपरेशन के लिए ही सामान है।
क्या कहते हैं मरीज
कल-कल करके टाल रहे हैं
हर्निया का ऑपरेशन करवाना है। कल-कल करके टाला जा रहा है और चार दिन से यहां एडमिट हूं। पता नहीं कब ऑपरेशन करेंगे।
गीता, हनुमान गेट।
24 को ऑपरेशन हुआ था। वह स्वयं हर्निया किट लेकर आया, जो कि 1200 रुपये में आई।
कुलवंत, डालावास।
23 जुलाई को ऑपरेशन हुआ है। वह स्वयं हर्निया किट लेकर आया। जो कि 1300 रुपये की आई है। ऑपरेशन ठीक रहा।
अतर सिंह, पूर्व सैनिक।
23 जुलाई को हर्निया का ऑपरेशन हुआ है। वह 1200 रुपये की किट लेकर आया था, तब ऑपरेशन हुआ।
चेतराम जांगड़ा, बरालू
दवाइयों और सामान की सप्लाई नहीं आने के कारण समस्या है। हम अस्पताल में एक करोड़ 72 लाख खर्च कर चुके हैं, जबकि बजट मिला 40 लाख रुपये है। अब दवाइयां व अन्य सामान खरीदने के लिए बजट नहीं है। ब्लड बैंक से लोन का प्रयास किया था, मगर नहीं मिला। अब उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा है।
रवींद्र पूनिया, प्रधान चिकित्सा अधिकारी।
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